
प्राइवेट और सरकारी सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए 2025-26 के नए लेबर लॉ बड़ी खुशखबरी लेकर आए हैं। चार नए श्रम कोड्स- वेज कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और OSH कोड- के तहत ‘अर्न्ड लीव’ (Earned Leave-EL) यानी काम के बदले कमाई गई छुट्टियों पर क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। पहले साल के अंत में बची छुट्टियां लैप्स हो जाती थीं, लेकिन अब इन्हें कैरी फॉरवर्ड करने और एनकैशमेंट की सुविधा से कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
अर्न्ड लीव का नया कोटा
नए नियमों के अनुसार, हर कर्मचारी को सालाना कम से कम 30 अर्न्ड लीव मिलेंगी- हर 20 दिन काम पर 1 दिन की गणना से। पहले कंपनियां मनमाने कोटे तय करती थीं, लेकिन अब यह न्यूनतम सीमा अनिवार्य है। खास बात, बची छुट्टियों को अगले साल कैरी फॉरवर्ड किया जा सकेगा, जिसमें अधिकतम 30 दिनों की सीमा तय की गई है। इससे अधिक जमा होने पर कंपनी को अतिरिक्त छुट्टियों का एनकैशमेंट देना होगा। सरकारी कर्मचारियों के लिए पहले से 300 दिनों तक जमा की सीमा थी, लेकिन नए कोड्स प्राइवेट सेक्टर को भी इसी दिशा में ले जा रहे हैं।
लीव एनकैशमेंट में बड़ा फायदा
सबसे रोचक बदलाव लीव एनकैशमेंट में है। पहले यह सुविधा केवल रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ते समय मिलती थी, लेकिन अब साल के अंत में बची 15-30 छुट्टियों को कैश करवाया जा सकेगा। उदाहरणस्वरूप, अगर 45 दिन बचे हैं, तो 15 का एनकैशमेंट और 30 कैरी फॉरवर्ड। नौकरी बदलने पर पुरानी कंपनी को दो दिनों में पूरा हिसाब देना होगा। यह त्योहारों या इमरजेंसी में अतिरिक्त नकदी देगा।
सैलरी संरचना पर असर
वेज कोड के तहत बेसिक सैलरी CTC का कम से कम 50% होनी चाहिए, जिससे प्रति दिन छुट्टी की कीमत बढ़ेगी। मान लीजिए, बेसिक 50,000 रुपये मासिक है, तो एक दिन का एनकैशमेंट लगभग 1,667 रुपये (बेसिक/30) होगा। पहले कम बेसिक से यह रकम सीमित रहती थी, लेकिन अब ओवरटाइम और ग्रेच्युटी पर भी फायदा। 4-दिन वर्कवीक का विकल्प वर्क-लाइफ बैलेंस सुधारेगा।
कार्यान्वयन और चुनौतियां
ड्राफ्ट नियम 31 दिसंबर 2025 को जारी हुए, जो 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण रूप से लागू हो चुके हैं। 23 राज्य इन्हें अपना चुके हैं। गिग वर्कर्स को PF-बीमा और महिलाओं को रात्रि शिफ्ट की छूट मिलेगी। हालांकि, छोटी कंपनियों पर अनुपालन का बोझ बढ़ सकता है। श्रम मंत्रालय की हैंडबुक से भ्रम दूर होगा। कर्मचारी संगठन इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं।
ये बदलाव कर्मचारियों को वित्तीय स्वतंत्रता देंगे, लेकिन कंपनियों को नई पॉलिसी अपनानी होगी। कुल मिलाकर, नए लेबर लॉ नौकरीपेशा वर्ग की ‘मौज’ बढ़ाने वाले हैं।









