
भारत के टैक्स इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘प्रारंभ 2026’ (PRARAMBH 2026) नामक राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान की औपचारिक शुरुआत की, जो नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 को आम टैक्सपेयर्स तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। 19-20 मार्च को लॉन्च हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहे नए टैक्स नियमों की बारीकियां सरल भाषा में समझाना है।
पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेने वाले इस कानून से टैक्स सिस्टम को ‘सीधा-सादा’ बनाने का वादा किया गया है, जिसमें जटिल प्रावधानों को हटाकर करदाताओं की हर उलझन दूर होगी।
अभियान के प्रमुख तोहफे
अभियान के तहत सबसे बड़ा तोहफा है इनकम टैक्स पोर्टल 2.0 का लॉन्च। पुराने पोर्टल की तुलना में यह तेज, यूजर-फ्रेंडली और सरल है, जो फाइलिंग प्रक्रिया को मिनटों में पूरा करने की सुविधा देगा। वित्त मंत्री ने कहा, “यह नया सिस्टम टैक्सपेयर्स को सशक्त बनाएगा, जहां कलेक्शन से ज्यादा सर्विस पर फोकस होगा।” इसके साथ ही AI-पावर्ड चैटबॉट ‘कर साथी’ को भी पेश किया गया, जो हिंदी, अंग्रेजी सहित क्षेत्रीय भाषाओं में टैक्स स्लैब, डिडक्शन, फॉर्म और नियमों पर तुरंत जवाब देगा। CBDT के वर्कशॉप, वीडियो ट्यूटोरियल, ब्रोशर और MyGov प्लेटफॉर्म के जरिए जन-भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
नागरिक देवो भव की नई सोच
कार्यक्रम में CBDT चेयरमैन ने ‘नागरिक देवो भव’ का नारा बुलंद किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि विभाग अब टैक्स वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि करदाताओं की सेवा को प्राथमिकता देगा। देशभर में आयोजित होने वाले वर्कशॉप सेशन से ग्रामीण और शहरी टैक्सपेयर्स नए नियमों को आसानी से समझ सकेंगे। भाषाई बाधाओं को दूर करने के लिए 10 क्षेत्रीय भाषाओं में ब्रोशर जारी किए गए हैं, जिससे गैर-अंग्रेजी भाषी करदाता भी लाभान्वित होंगे।
नए कानून की प्रमुख विशेषताएं
नया एक्ट सरलीकरण पर केंद्रित है। छोटी गलतियों पर जेल की सजा खत्म कर सिर्फ जुर्माना लगेगा, जैसे अनएक्सप्लेन्ड इनकम पर 60% अतिरिक्त टैक्स में राहत। अपील के लिए जमा राशि 20% से घटाकर 10% की गई। FY 2026-27 के नए स्लैब- ₹4 लाख तक 0%, उसके बाद 5-30%- मध्यम वर्ग को बड़ी छूट देंगे। CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जो 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा।
टैक्सपेयर्स के लिए फायदे
यह अभियान टैक्स सिस्टम को भविष्योन्मुखी बनाएगा, जहां बार-बार बदलाव की जरूरत न पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कर अनुपालन बढ़ेगा और विवाद कम होंगे। प्रारंभ 2026 न सिर्फ जागरूकता फैलाएगा, बल्कि टैक्सपेयर्स को सशक्त बनाकर ‘आम नागरिक देवो भव’ की भावना को साकार करेगा। सरकार की यह पहल वित्त वर्ष 2026-27 के लिए टैक्स फाइलिंग को उत्सव जैसा बना देगी।









