
विदेश यात्रा से लौटने वाले भारतीयों और पर्यटकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। सरकार ने एक दशक पुराने बैगेज नियमों को बदलते हुए ‘बैगेज नियम, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। 2 फरवरी 2026 की आधी रात से शुरू हुए इन नियमों के तहत अब आप विदेश में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा कीमती सामान और आभूषण बिना कस्टम ड्यूटी चुकाए भारत ला सकेंगे।
ड्यूटी-फ्री सीमा में 50% का इजाफा
अब तक के नियमों के अनुसार, हवाई या समुद्री मार्ग से आने वाले यात्रियों को 50,000 रुपये तक के सामान पर कस्टम ड्यूटी से छूट मिलती थी। नई अधिसूचना के अनुसार, इस सीमा को बढ़ाकर अब 75,000 रुपये कर दिया गया है।
यह छूट उन भारतीय मूल के निवासियों और पर्यटकों पर लागू होगी जो सड़क मार्ग (Land Route) के अलावा किसी अन्य माध्यम से भारत लौट रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि एयरपोर्ट्स पर क्लियरेंस की प्रक्रिया भी तेज होगी।
सोने के गहनों के लिए विशेष रियायत
सरकार ने आभूषणों (Jewellery) को लेकर भी नियमों को और अधिक स्पष्ट और उदार बनाया है। यदि कोई भारतीय नागरिक एक वर्ष से अधिक समय से विदेश में रह रहा है, तो वह अपने साथ निम्नलिखित मात्रा में ड्यूटी-फ्री आभूषण ला सकता है:
- पुरुष यात्री: 20 ग्राम तक के सोने/चांदी/प्लेटिनम के आभूषण।
- महिला यात्री: 40 ग्राम तक के आभूषण।
नियमों में साफ किया गया है कि ‘आभूषण’ का अर्थ उन सजावटी सामानों से है जो व्यक्ति आमतौर पर पहनता है, चाहे उनमें कीमती रत्न जड़े हों या नहीं।
पुराने नियमों की छुट्टी, नया युग शुरू
यह नया बदलाव एक दशक पुराने बैगेज नियमों का स्थान लेगा। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक मुद्रास्फीति और सामानों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए यात्री लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाने की मांग कर रहे थे। 2 फरवरी से प्रभावी होने के कारण, आज से लैंड करने वाले सभी यात्रियों को इसका लाभ मिलना शुरू हो गया है।
यात्रियों के लिए मुख्य बातें:
- प्रभावी तिथि: 2 फरवरी 2026 की आधी रात से।
- पुरानी सीमा: ₹50,000 | नई सीमा: ₹75,000
- शर्त: यह लाभ केवल हवाई और समुद्री मार्ग से आने वाले यात्रियों को मिलेगा।
सरकार का यह फैसला मध्यम वर्ग और उन प्रवासियों के लिए बड़ी राहत है जो अक्सर विदेश से उपहार या इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर आते हैं। इससे कस्टम विभाग और यात्रियों के बीच होने वाले विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।









