
चुनाव आयोग ने विदेश में पैदा हुए भारतीय नागरिकों के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब Form-6 और Form-6A में जन्मस्थान के रूप में ‘Outside India’ का विकल्प जोड़ा गया है, जिससे NRIs बिना किसी रुकावट के मतदाता बन सकेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि पहले विदेश-जन्म NRIs फॉर्म भर ही नहीं पाते थे, क्योंकि जन्म स्थान दर्ज करने की सुविधा नहीं थी। यह कदम करोड़ों प्रवासी भारतीयों को वोट का अधिकार दिलाएगा।
नई व्यवस्था का विवरण
पहले NRIs को केवल पासपोर्ट पर निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकरण करना पड़ता था, लेकिन विदेश-जन्म वाले अटक जाते थे। अब ERO-Net और BLO ऐप में ‘Outside India’ चुनने का ऑप्शन है, साथ ही दूसरे देश का नाम टेक्स्ट बॉक्स में दर्ज कर सकेंगे। ऑफलाइन फॉर्म सबमिशन को प्राथमिकता दी गई है, ताकि तकनीकी बाधा न हो। यह सुधार 2026 के राष्ट्रीय मतदाता दिवस और SIR अभियान से जुड़ा है, जहां 51 करोड़ मतदाताओं का पुनरीक्षण हो रहा।
क्यों था यह जरूरी?
भारत में 1.5 करोड़ से अधिक NRIs हैं, जिनमें लाखों विदेश-जन्म हैं। 2011 के संशोधन से NRIs को वोटिंग अधिकार मिला, लेकिन जन्म स्थान की समस्या बाधा बनी रही। अब वे मूल निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकरण कर भारत लौटकर वोट डाल सकेंगे प्रॉक्सी या ई-वोटिंग अभी नहीं। रिणवा ने कहा, “यह समस्या का स्थायी समाधान है; अब कोई NRI वोट से वंचित नहीं रहेगा।”
प्रभाव और आगे की राह
यह बदलाव लोकसभा, विधानसभा चुनावों में NRIs की भागीदारी बढ़ाएगा, जो विदेश नीति और प्रवासी कल्याण को मजबूत करेगा। हालांकि, वोट डालने हेतु भारत आना अनिवार्य रहेगा, ई-वोटिंग पर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित। चुनाव आयोग का यह कदम ‘विकसित भारत 2047’ के तहत समावेशी लोकतंत्र को बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे युवा NRIs की वोटिंग 20% तक उछल सकती है। आने वाले चुनावों में इसका असर दिखेगा।









