
ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया में मचे घमासान ने वैश्विक सप्लाई चेन को चरमरा दिया है। सिर्फ तेल-गैस का संकट ही नहीं, अब भारत के फार्मा सेक्टर पर भी इसका काला साया मंडरा रहा है। गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की कई दवा कंपनियों के पास प्रोपेन गैस का स्टॉक मात्र 10 दिन का बचा है, जिससे पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन जैसी जरूरी दवाओं का उत्पादन ठप होने का खतरा मंडरा रहा है।
हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से LNG आयात प्रभावित हुआ है, जो फार्मा उद्योग के बॉयलरों में प्रोपेन गैस के रूप में ईंधन का काम करता है। दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष ग्रोवर ने चेतावनी दी है कि कच्चे माल (API) की कमी, शिपिंग लागत में उछाल और पैकेजिंग महंगाई से दवाओं के दाम 10-20% तक बढ़ सकते हैं। फार्माएक्ससिल के पूर्व चेयरमैन दिनेश दुआ के अनुसार, 200 से अधिक मैन्युफैक्चरर्स के पास 7-10 दिन का स्टॉक शेष है; उसके बाद प्लांट बंद हो जाएंगे।
प्रभावित दवाएं और रोग
बुखार की पैरासिटामोल, डायबिटीज की मेटफॉर्मिन, इंफेक्शन रोधी मेट्रोनिडाजोल, दर्द निवारक डाइक्लोफेनक, फॉलिक एसिड और विटामिन सी जैसी दवाओं का उत्पादन सबसे ज्यादा खतरे में है। ये सामान्य बीमारियों- शुगर, बुखार, सांस की तकलीफ- में लाखों मरीजों की जान बचाती हैं। भारत जेनेरिक दवाओं का वैश्विक हब है, जहां 20% हिस्सेदारी है और अमेरिका बड़ा आयातक। लेकिन आयात-निर्भरता ने इसे संकट में डाल दिया। सहारनपुर जैसे इलाकों में पहले से सरकारी अस्पतालों में इंसुलिन 30/70 और पैरासिटामॉल IV की किल्लत थी।
गैस संकट की जड़ें गहरी
ईरान द्वारा स्ट्रेट बंद करने से ग्लोबल गैस सप्लाई चेन टूट गई। भारत में LPG संकट के साथ फार्मा उत्पादन प्रभावित हो रहा है। फार्मा संगठनों ने सरकार को इमरजेंसी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कच्चे माल की आपूर्ति और सीमित मूल्य वृद्धि की मांग की गई। हालांकि, ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के प्रेसिडेंट कैलाश गुप्ता का कहना है कि रिटेल में 3-4 महीने का स्टॉक है, लेकिन उत्पादन रुकने से लंबा संकट अपरिहार्य। डेयरी सेक्टर भी पैकेजिंग संकट से जूझ रहा है; महाराष्ट्र के मालिकों को उत्पादन रोकना पड़ सकता है।
सरकार और समाधान
सरकार ने फार्मा को प्राथमिकता दी है, लेकिन बजट 2026 में शुगर-कैंसर दवाओं को सस्ता करने के ऐलान के बावजूद स्टॉक संकट नया है। जनऔषधि केंद्रों का विस्तार चल रहा है, पर युद्ध प्रभाव से निपटना चुनौती। मरीज निजी फार्मेसी चेक करें, डॉक्टर से वैकल्पिक ब्रांड लें और हेल्पलाइन 104 पर अपडेट लें। यह संकट चेतावनी है- वैश्विक अस्थिरता घरेलू स्वास्थ्य को खतरे में डाल रही। अगर गैस सप्लाई बहाल न हुई, तो दवा किल्लत महंगाई में बदल जाएगी।









