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LPG गैस सिलेंडर के टेंशन खत्म! घर के कचरे से खुद बनाएं खाना पकाने वाली गैस; जानें बायोगैस प्लांट का खर्च और सेटअप की पूरी विधि

LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं? घर के गीले कचरे से बायोगैस प्लांट लगाकर मासिक ₹800-1000 बचाएं। 1 m³ पोर्टेबल प्लांट मात्र ₹15-25 हजार में छत पर लगाएं, MNRE सब्सिडी से 50-75% छूट। गोबर-कचरा डालें, 7-15 दिन में गैस तैयार- LPG जैसा चूल्हा, प्लस जैविक खाद! पर्यावरण सुरक्षित, 2-3 साल में निवेश वसूल।

By Pinki Negi

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LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और कमी की खबरों ने लोगों को वैकल्पिक ईंधन की तलाश में झोंक दिया है। ऐसे में बायोगैस टेक्नोलॉजी उभरकर सामने आ रही है, जो घर के गीले कचरे से मुफ्त खाना पकाने की गैस पैदा करती है। इसे छत या बालकनी में आसानी से लगाया जा सकता है, जो पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

क्या है बायोगैस प्लांट टेक्नोलॉजी?

बायोगैस प्लांट जैविक कचरे जैसे गोबर, फल-सब्जी के छिलके और बचे खाने को बैक्टीरिया से सड़ाकर मीथेन गैस (60-70%) और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है। यह गैस LPG की तरह चूल्हे पर इस्तेमाल होती है, बिना धुएं के। भारत में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) इसे बढ़ावा दे रहा है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। छोटे परिवारों के लिए 1-2 m³ का पोर्टेबल प्लांट उपलब्ध है, जो रोज 2-3 घंटे गैस देता है।

घर में सेटअप और इस्तेमाल की विधि

सेटअप सरल है: 1000 लीटर बड़ा प्लास्टिक ड्रम लें, उसमें इनलेट पाइप लगाएं। छोटा ड्रम (750 लीटर) ऊपर रखकर गैस आउटलेट जोड़ें। गोबर या कचरे को 1:1 पानी के अनुपात में मिलाकर डालें, 7-15 दिनों में फर्मेंटेशन शुरू हो जाता है। गैस पाइप से सीधे बायोगैस चूल्हे तक पहुंचती है। शहरी अपार्टमेंट्स के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल बाजार में हैं, जिन्हें छत पर रखकर 1-2 घंटे में चालू किया जा सकता है। रखरखाव आसान – रोज कचरा डालें, प्लास्टिक न मिलाएं, और अवशेष को खाद बनाएं।

बायोगैस प्लांट की लागत और सब्सिडी

3-4 सदस्यों के परिवार के लिए 1 m³ पोर्टेबल प्लांट की कीमत ₹15,000-₹25,000 है, जबकि पक्का प्लांट ₹20,000-₹50,000 तक। बड़ा प्लांट (4-6 m³) ₹1-2 लाख का पड़ता है, लेकिन 8-10 LPG सिलेंडर सालाना बचत करता है। MNRE की योजना से 50-75% सब्सिडी मिलती है – दिल्ली जैसे शहरों में ₹10,000-₹30,000 तक। स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी सहायता उपलब्ध है। 13 साल से सिलेंडर न खरीदने वाले किसान उदाहरण हैं कि निवेश 2-3 साल में वसूल हो जाता है।

फायदे: आर्थिक, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय

बायोगैस से मासिक ₹800-₹1000 की LPG बचत होती है, साथ ही स्लरी जैविक खाद पैदावार 20-30% बढ़ाती है। धुएं से मुक्ति मिलने से महिलाओं की आंखों और फेफड़ों की बीमारियां रुकती हैं। पर्यावरण को फायदा- लकड़ी की कटाई रुकती है, GHG उत्सर्जन कम होता है। वडोदरा की सुमित्राबेन जैसे मामले में 5 सदस्यों का खाना दो बार बनता है, तीन भैंसों के गोबर से। यह नारी सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार भी बढ़ाता है।​

ध्यान रखने योग्य बातें

प्लांट धूप वाली जगह पर लगाएं, रसोई के पास रखें ताकि प्रेशर बरकरार रहे। प्रेशर गेज जरूर लगवाएं। कम कचरा होने पर छोटा मॉडल चुनें। अवशेष को पौधों में डालें। रखरखाव नजरअंदाज करने से गैस उत्पादन रुक सकता है। दिल्ली जैसे शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह आदर्श है।​​बायोगैस टेक्नोलॉजी LPG निर्भरता खत्म कर आत्मनिर्भरता सिखाती है। सरकारी सहायता से लाखों परिवार अपनाएं, स्वच्छ भारत का सपना साकार होगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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