
देशभर में एलपीजी गैस की बढ़ती मांग और शॉर्टेज की आशंकाओं के बीच लाखों घरों की महिलाओं को एक नया डर सता रहा है। क्या आपका गैस कनेक्शन कट जाएगा? ई-केवाईसी न करने पर सब्सिडी बंद हो जाएगी? सोशल मीडिया और वॉट्सऐप पर वायरल हो रहे इन संदेशों ने आम आदमी को भ्रमित कर दिया है। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने साफ शब्दों में चेतावनी जारी की है कि ई-केवाईसी सभी के लिए अनिवार्य नहीं है। यह केवल फर्जी लाभार्थियों को चिह्नित करने के लिए है, सामान्य उपभोक्ताओं का कनेक्शन कटने का कोई खतरा नहीं।
उत्तर भारत में बढ़ते साइबर ठगी के मामले
पिछले कुछ दिनों में पटना, हाथरस और मेरठ जैसे उत्तर भारत के शहरों में ई-केवाईसी के नाम पर साइबर ठगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ठग गैस एजेंसी या सरकारी अधिकारी बनकर फोन करते हैं। वे कहते हैं, “आपका आधार लिंक नहीं है, आज शाम तक सब्सिडी बंद और सिलेंडर बुकिंग रुक जाएगी।” फिर OTP मांगते हैं या फिशिंग लिंक भेजते हैं।
जैसे ही पीड़ित लिंक पर क्लिक करता है, बैंक खाता खाली। पटना पुलिस ने हाल ही में ऐसा अलर्ट जारी किया, जहां कई परिवारों के लाखों रुपये उड़ गए। मेरठ में भी घरेलू गैस के अवैध उपयोग पर प्रशासन सख्त है, लेकिन यह ई-केवाईसी से अलग मुद्दा है।
ई-केवाईसी का असली मकसद समझें
ई-केवाईसी यानी इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर, सब्सिडी में पारदर्शिता लाने का सरकारी प्रयास है। इसका मकसद सुनिश्चित करना है कि DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) का पैसा सही PM उज्ज्वला या सामान्य ग्राहक तक पहुंचे, न कि व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं या फर्जी कनेक्शनों को। अगर आप सब्सिडी नहीं लेते, तो चिंता की कोई बात नहीं – आपका सिलेंडर बुकिंग प्रभावित नहीं होगा।
सब्सिडी लेने वाले भी आधिकारिक mylpg.in पोर्टल या HP Pay, BPCL, Indane ऐप से आधार-OTP से वेरिफाई कर सकते हैं। गैस एजेंसी जाना जरूरी नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया कि फर्जी ग्राहकों को हटाने के लिए यह कदम है, न कि लाखों ईमानदार उपभोक्ताओं को परेशान करने के लिए।
स्कैमर्स के नए हथकंडे और खतरे
स्कैमर्स का नया हथकंडा वॉट्सऐप मैसेज है। वे फेक APK फाइल या लिंक भेजकर फोन हैक कर लेते हैं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अलर्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल ‘सिलेंडर बुकिंग’ मैसेज फ्रॉड हैं। मेरठ जैसे शहरों में जहां गैस एजेंसियां अनियमितताओं के चलते जांच के दायरे में हैं, उपभोक्ता और सतर्क हो जाएं।
बचाव के तीन गोल्डन टिप्स
तीन गोल्डन टिप्स से बचाव संभव पहला, वेरिफिकेशन खुद करें – mylpg.in पर लॉगिन कर आधार से चेक करें। अनजान लिंक न खोलें। दूसरा, कोई एजेंसी या अधिकारी फोन पर OTP, CVV या बैंक डिटेल्स कभी नहीं मांगेगा; ऐसा होने पर 1930 पर साइबर हेल्पलाइन कॉल करें। तीसरा, परिवार के बुजुर्गों को जागरूक करें, क्योंकि स्कैमर्स उन्हें आसानी से फंसाते हैं। 1906 पर गैस हेल्पलाइन भी उपलब्ध है।
अंतिम सलाह: सतर्कता ही सुरक्षा
सरकार ने दोहराया कि ई-केवाईसी न करने से सब्सिडी तभी रुकेगी जब फर्जीवाड़ा साबित हो। LPG शॉर्टेज के दौर में यह जानकारी हर घर तक पहुंचनी चाहिए। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।









