
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद भारत में एलपीजी (LPG) गैस संकट तेजी से गहराता जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फंसे दर्जनों टैंकरों और खाड़ी देशों से ऊर्जा बाधित होने के कारण सरकार को मजबूरी में गैस सिलेंडर से जुड़े नियमों में इतिहास में सबसे बड़े बदलाव करने पड़ रहे हैं। तीन दिन पहले सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, वहीं सरकार ने आपूर्ति प्रबंधन के लिए ‘एम्रजेंसी कंट्रोल एक्ट’ (ECA) भी लागू कर दिया है। अब 23 मार्च, सोमवार से नए नियमों का आгноз शुरू हो गया है, जिसका सीधा असर रेस्टोरेंट, ढाबा, होटल और प्रवासी मजदूरों पर पड़ेगा।
कमर्शियल कोटे में 50% तक विशेष छूट
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि 23 मार्च से अगले आदेश तक कमर्शियल एलपीजी का कोटा 30% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब कमर्शियल सिलेंडरों की कुल सप्लाई प्री-क्राइसिस स्तर के आधे हिस्से तक पहुंच गई है। इस कदम से होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, ढाबे, औद्योगिक कैंटीन, सब्सिडी वाली कैंटीन, डेयरी यूनिट्स और कम्युनिटी किचन को व्यापार दोबारा ट्रैक पर लाने में बड़ी मदद मिलेगी। सरकारी तेल कंपनियों ने पहले ही 20% अतिरिक्त आवंटन कर दिया था, जो अब 50% की कुल सप्लाई में बदल गया है।
प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो का सुपर-सिलेंडर
संकट की इस घड़ी में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आज (23 मार्च) से प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर की रिफिलिंग सुविधा शुरू कर दी गई है। इस लाभ को लेने के लिए उपभोक्ताओं को सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL) के साथ विशेष रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। यह कदम उन परिवारों के लिए राहत है जिनके पास पूरे 14.2 किलो सिलेंडर खरीदने की आर्थिक क्षमता नहीं है या जो कम खपत वाले हैं।
14.2 किलो की जगह सिर्फ 10 किलो गैस
घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियां एक बोल्ड योजना पर अंतिम चरण की तैयारी कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जल्द ही घरों को मिलने वाले पारंपरिक 14.2 किलो सिलेंडर में सिर्फ 10 किलो LPG भरी जाएगी। इसका मकसद सीमित स्टॉक के बीच अधिक से अधिक घरों तक गैस पहुंचाना है। गणित सरल है: 14.2 किलो गैस एक परिवार को 35-40 दिन चलती है, जबकि 10 किलो गैस करीब एक महीने का काम चलाएगी। इससे सरकार को बफर स्टॉक बनाने और नए आयात विकल्प ढूंढने का समय मिल जाएगा।
रेटिंग और तकनीकी बदलाव कैसे होंगे?
अगर यह योजना अमल में आती है, तो सिलेंडर पर नया स्टिकर लगाया जाएगा जिस पर स्पष्ट लखेगा- “इसमें 10 किलो गैस है”। सिलेंडर की कीमत 14.2 किलो के हिसाब से नहीं, बल्कि प्रति किलो गैस के अनुपात में कम होगी। हालांकि, इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स को वजन मापने के सिस्टम में तकनीकी बदलाव करने होंगे और नियामक मंजूरी लेनी होगी।
अन्य कड़े नियम
गैस संकट से निपटने के लिए सरकार ने अन्य कदम भी उठाए हैं:
- ECA एक्ट: गैस सिलेंडर पर एम्रजेंसी कंट्रोल एक्ट लागू, जिससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी।
- PNG बंदी: जिन घरों में पीएनजी (PNG) कनेक्शन है, उन्हें अब एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलेगा। ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा।
- रिफिलिंग समयसीमा: शहरों में रिफिलिंग की अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन कर दिया गया है।
- OTP अनिवार्य: बिना OTP वेरिफिकेशन के किसी भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं की जाएगी।
भारत को रोजाना 93,500 टन एलपीजी की जरूरत है, जिसका 86% घरेलू खपत है। युद्ध की वजह से होर्मुज में फंसे 22 जहाजों में से 6 भारतीय हैं। आने वाले हफ्तों में स्थिति और खराब हो सकती है, इसलिए ये नियम अस्थायी आपातकालीन उपाय हैं, जो जल्द ही युद्ध समाप्ति के बाद पुनः सामान्य हो सकते हैं।









