
एलपीजी सिलिंडरों की बढ़ती किल्लत के बीच भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने रविवार से एक नई प्रक्रिया लागू कर दी है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं में भारी भ्रम और परेशानी फैल गई है। अब जिन उपभोक्ताओं ने एक वित्त वर्ष में अपने निर्धारित कोटे के 12 सिलिंडर रिफिल करा लिए हैं, उन्हें अतिरिक्त सिलिंडर बुक कराने के लिए ‘हेलो बीपीसीएल’ मोबाइल एप्लिकेशन पर जाकर कई सवालों के जवाब देने होंगे। इसके बिना बुकिंग संभव नहीं होगी।
क्या पूछे जाएंगे सवाल?
नए नियम के तहत उपभोक्ताओं से परिवार के सदस्यों की संख्या, घर में आने वाले मेहमानों का विवरण, और कोई विशेष आयोजन जैसे शादी, भंडारा या अन्य कार्यक्रम होने की जानकारी मांगी जा रही है। कंपनी का कहना है कि यह कदम जमाखोरी रोकने और वास्तविक जरूरतमंदों तक गैस पहुंचाने के लिए उठाया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी अचानक लागू ने उपभोक्ताओं और गैस एजेंसी संचालकों दोनों को हैरान कर दिया है।
एजेंसियों को भी नहीं थी जानकारी
रविवार सुबह से ही सैकड़ों उपभोक्ताओं ने मोबाइल फोन से सिलिंडर बुक करने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। जब वे सीधे गैस एजेंसियों पहुंचे, तो वहां मौजूद स्टाफ को भी इस नई प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी। कई एजेंसी संचालकों ने कंपनी के क्षेत्रीय अधिकारियों को कॉल करने के बाद इस बदलाव के बारे में पता चला। इस अचानक आए नियम ने न केवल उपभोक्ताओं बल्कि वितरण प्रणाली को भी अप्रभावी कर दिया है।
कोटा पूरा होने पर लागू होगा नया नियम
ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव आदर्श गुप्ता ने बताया कि एक वित्त वर्ष में एक घरेलू उपभोक्ता अधिकतम 12 सिलिंडर ले सकता है। कई उपभोक्ताओं का कोटा पहले ही पूरा हो चुका है, खासकर त्योहारी सीजन और शादियों के चलते। ऐसे में अतिरिक्त सिलिंडर की जरूरत होना स्वाभाविक है, लेकिन नई प्रक्रिया ने इसे जटिल बना दिया है।
बीपीसीएल के नए दिशा-निर्देश
बीपीसीएल के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब उपभोक्ताओं को ‘हेलो बीपीसीएल’ एप डाउनलोड करना होगा, जहां क्रमवार सवालों के जवाब देने के बाद ही बुकिंग आगे बढ़ेगी। इसमें परिवार का आकार, अतिथियों की संख्या, आयोजन की प्रकृति और अवधि जैसे विवरण देने होंगे। कंपनी का दावा है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता लाएगी, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह आम आदमी के लिए बोझ साबित होगी।
ग्रामीण और गरीब उपभोक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि स्मार्टफोन के इस दौर में भी हजारों शहरी और ग्रामीण उपभोक्ता कीपैड वाले साधारण फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। कई गरीब परिवार स्मार्टफोन खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए एप डाउनलोड करना, इंटरनेट चलाना और ऑनलाइन फॉर्म भरना मुश्किल काम साबित होगा। नतीजतन, घर बैठे बुकिंग की सुविधा का लाभ उन्हें नहीं मिल पाएगा और उन्हें बार-बार एजेंसियों के चक्कर काटने पड़ेंगे, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होगी।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में जमाखोरी रोकना चाहती है, तो उसे तकनीक के साथ-साथ जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखना चाहिए। ग्रामीण और वृद्ध उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, जैसे कॉल सेंटर या एजेंसी स्तर पर सत्यापन, जरूरी है। फिलहाल, बीपीसीएल के इस नए नियम ने उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ा दी हैं, और कंपनी से स्पष्टीकरण और राहत की मांग तेज हो गई है









