Tags

LPG Subsidy Update: बड़ी संख्या में लोग छोड़ रहे हैं गैस सब्सिडी! जानें कौन सा राज्य सबसे आगे और क्यों हो रहा है ऐसा

भारत सरकार एलपीजी सब्सिडी का फॉर्मूला बदलने की तैयारी में है। अब तक सब्सिडी की गणना सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस पर होती थी, लेकिन अमेरिकी सप्लाई समझौते के बाद इसमें अमेरिका के बेंचमार्क रेट और फ्रेट कॉस्ट को भी जोड़ा जा सकता है। इससे एलपीजी की कीमतों और सब्सिडी राशि पर प्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।

By Pinki Negi

LPG Subsidy Update: बड़ी संख्या में लोग छोड़ रहे हैं गैस सब्सिडी! जानें कौन सा राज्य सबसे आगे और क्यों हो रहा है ऐसा

एलपीजी गैस सिलेंडर से जुड़ी खबरें हमेशा चर्चा में रहती हैं, क्योंकि यह देश के लगभग हर घर की ज़रूरत बन चुकी है। अब सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है—एलपीजी सब्सिडी की गणना का तरीका यानी सब्सिडी कैलकुलेशन फॉर्मूला बदला जा सकता है। इसका असर सीधे तौर पर एलपीजी के दाम और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

अब तक कैसे तय होती थी सब्सिडी?

अब तक भारत में एलपीजी सब्सिडी की गणना “सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP)” के आधार पर होती है। यह दर वेस्ट एशिया से आने वाली एलपीजी गैस के लिए एक स्टैंडर्ड बेंचमार्क मानी जाती है। इसी के हिसाब से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने सब्सिडी का हिसाब लगाती थीं।

लेकिन अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। सरकारी तेल कंपनियों ने हाल ही में अमेरिका से एलपीजी सप्लाई के लिए नया कॉन्ट्रैक्ट किया है। इसका अर्थ है कि अब ईंधन सप्लाई में एक नया स्रोत जुड़ जाएगा और इसके साथ-साथ सब्सिडी गणना का तरीका भी जटिल हो जाएगा।

अमेरिका के सौदे से बदलेगा फॉर्मूला

सरकार मौजूदा फॉर्मूले में अमेरिका के बेंचमार्क प्राइस को भी शामिल करने पर विचार कर रही है। वेस्ट एशिया से आने वाले जहाजों की तुलना में अटलांटिक महासागर के पार से आने वाली गैस की ट्रांसपोर्ट कॉस्ट काफी अधिक होती है। इससे फ्रेट चार्ज यानी ढुलाई की लागत भी नए कैलकुलेशन का हिस्सा बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह फॉर्मूला बदला गया, तो इससे एलपीजी की औसत लागत में कुछ वृद्धि देखी जा सकती है। यानी उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को तो सरकारी सहायता जारी रहेगी, लेकिन अन्य ग्राहकों के लिए गैस की कीमतें प्रभावी रूप से बढ़ सकती हैं।

लाखों लोगों ने छोड़ी एलपीजी सब्सिडी

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 से 2025 के बीच 5.6 करोड़ उपभोक्ताओं ने एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी। यह एक बड़ी संख्या है और यह बताती है कि देश के आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग ने स्वेच्छा से सब्सिडी का फायदा लेना बंद कर दिया है।

इन आंकड़ों में सबसे आगे है महाराष्ट्र, जहां 94.6 लाख लोगों ने सब्सिडी छोड़ दी। इसके बाद उत्तर प्रदेश (69.2 लाख) और दिल्ली (44.8 लाख) का स्थान है। वहीं कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब और बिहार में भी लाखों उपभोक्ताओं ने सब्सिडी से किनारा किया है।

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत

हालांकि, उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को सरकार अभी भी राहत दे रही है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है। यह सब्सिडी साल में अधिकतम 9 सिलेंडर तक दी जाती है।

वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 853 रुपये है, जो 8 अप्रैल को आखिरी बार संशोधित हुई थी। सरकार हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियों से रिव्यू रिपोर्ट लेती है, जिसके आधार पर आगामी कीमत तय होती है।

नई कीमतों पर क्या असर होगा?

यदि अमेरिका से आने वाली गैस की ढुलाई लागत को भी कैलकुलेशन में शामिल किया गया तो यह देखा जा सकता है कि एलपीजी की बेसिक लागत बढ़ सकती है। इसका मतलब यह है कि सरकार को या तो सब्सिडी का बोझ बढ़ाना पड़ेगा या फिर उपभोक्ताओं को थोड़ा अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि, यह भी संभव है कि सरकार किसी हाइब्रिड फॉर्मूले पर काम करे यानी सऊदी और अमेरिकी दोनों सप्लाई का औसत निकालकर एक संतुलित दर निर्धारित की जाए।

आने वाले महीनों में निर्णय संभव

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोलियम मंत्रालय इस पूरे मामले पर विचार कर रहा है और आने वाले महीनों में एक स्पष्ट दिशा तय की जाएगी। नीति निर्माण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। एलपीजी अब केवल एक घरेलू ज़रूरत नहीं, बल्कि “एनर्जी सिक्योरिटी” का हिस्सा बन गई है। इसलिए, सब्सिडी फॉर्मूला में बदलाव केवल आर्थिक निर्णय नहीं रहेगा, यह देश की ऊर्जा नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें