
क्या अब सिबिल स्कोर के बिना भी लोन मिलना आसान हो जाएगा? केंद्र सरकार और RBI मिलकर एक क्रांतिकारी डिजिटल सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जो खराब क्रेडिट हिस्ट्री वालों, महिलाओं, ग्रामीण निवासियों और पहली बार लोन लेने वालों के लिए बैंकिंग के दरवाजे खोलेगा। कैश-फ्लो आधारित लेंडिंग और AI क्रेडिट स्कोरिंग पर फोकस के साथ MSME क्रेडिट गैप को भरने की योजना है। बजट 2026 में इसकी रूपरेखा पेश की गई, जिससे 20-25 लाख करोड़ के लोन बाजार को बूस्ट मिलेगा।
वित्त मंत्री का बयान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हालिया बजट में कहा, “पारंपरिक सिबिल स्कोर छोटे कारोबारियों के लिए बाधा बन गया है। नया सिस्टम बैंक स्टेटमेंट, इनवॉयस और डिजिटल ट्रांजेक्शन पर आधारित होगा, ताकि वास्तविक कैश-फ्लो से क्रेडिट योग्यता तय हो।” RBI की 30वीं सलाहकार समिति ने अक्टूबर 2025 में TReDS प्लेटफॉर्म को मजबूत करने की सिफारिश की। यह व्यवस्था न्यूटू-क्रेडिट वाले लोगों को मुख्यधारा में लाएगी, खासकर ग्रामीण SHGs और महिला उद्यमियों को।
कैश-फ्लो लेंडिंग
पारंपरिक लोन में सिबिल स्कोर (CIBIL, Experian आदि) पुराने डिफॉल्ट और भुगतान इतिहास पर निर्भर करता है। लेकिन कैश-फ्लो मॉडल व्यवसाय या व्यक्ति के दैनिक नकदी प्रवाह- बैंक स्टेटमेंट, GST रिटर्न, इनवॉयस पेमेंट, UPI ट्रांजेक्शन- का विश्लेषण करता है। TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर MSMEs इनवॉयस अपलोड कर 24 घंटे में 80-90% फंडिंग पा सकते हैं।
AI अल्गोरिदम वैकल्पिक डेटा जैसे बिजली बिल, मोबाइल रिचार्ज और जन धन खाते के लेन-देन से ‘वैकल्पिक क्रेडिट स्कोर’ बनाएगा। इससे सिबिल 650 से नीचे वाले भी लोन के हकदार बनेंगे।
योजना में पात्रता और लाभ
- MSMEs (टर्नओवर 250 करोड़ तक), SHGs, पहली बार लोन लेने वाले।
- न्यूनतम 6 महीने के बैंक स्टेटमेंट, सकारात्मक कैश-फ्लो (मासिक इनकम > आउटगोइंग)।
- ब्याज दर 8-12%, लोन राशि 1 लाख से 5 करोड़ तक।
- महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता, क्रेडिट गारंटी स्कीम विस्तार।
यह सिस्टम अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक क्रेडिट से जोड़ेगा। उदाहरणस्वरूप, दिल्ली के एक छोटे दुकानदार ने TReDS से 2 लाख का लोन 48 घंटे में पाया, बिना कोलैटरल। ग्रामीण महिलाएं डिजिटल पेमेंट हिस्ट्री से लाभान्वित होंगी।
आवेदन कैसे करें?
- TReDS पोर्टल (महाजन, रेवडेम, आदि) या बैंक ऐप पर रजिस्टर।
- KYC, GSTIN, बैंक स्टेटमेंट अपलोड करें।
- इनवॉयस सबमिट करें, फाइनेंसर बोली लगाएंगे।
- डिजिटल अप्रूवल के बाद फंड ट्रांसफर। RBI गाइडलाइंस के तहत सभी बैंक 2026 तक इंटीग्रेट करेंगे। हेल्पलाइन: MSME मंत्रालय या बैंक NRI सेल।
चुनौतियां और भविष्य की राह
डेटा प्राइवेसी (PDP एक्ट), साइबर सिक्योरिटी और ग्रामीण डिजिटल लिटरेसी चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि AI बायस से बचाव जरूरी। फिर भी, यह वित्तीय समावेशन को GDP में 15% क्रेडिट हिस्सेदारी तक ले जाएगा। पिछले वर्ष TReDS ने 1 लाख करोड़ के इनवॉयस डिस्काउंट किए। बैंक ग्राहक आधार दोगुना करेंगे। सलाह: स्टेटमेंट सुधारें, डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ाएं। यह ‘न्यू इंडिया’ की फाइनेंशियल क्रांति है।









