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LinkedIn यूजर्स सावधान! क्या ट्रैक हो रहा है आपका पर्सनल डेटा? BrowserGate रिपोर्ट के दावों ने सबको चौंकाया

Fairlinked e.V. की 'BrowserGate' रिपोर्ट ने LinkedIn पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हर विजिट पर 6,222+ Chrome एक्सटेंशंस स्कैन कर डिवाइस डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। GDPR/CCPA उल्लंघन का डर, कॉर्पोरेट जासूसी के शक में म्यूनिख कोर्ट में केस। Firefox सुरक्षित, यूजर्स को डेटा रिक्वेस्ट और शिकायत की सलाह।

By Pinki Negi

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प्रोफेशनल नेटवर्किंग का जाना-माना प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर अब गोपनीयता के गंभीर आरोप लगे हैं। जर्मनी स्थित Fairlinked e.V. संगठन की ‘BrowserGate’ रिपोर्ट ने दावा किया है कि लिंक्डइन हर बार जब कोई यूजर साइट पर विजिट करता है, तो उसके ब्राउजर को गुप्त रूप से स्कैन कर रहा है। यह खुलासा अप्रैल 2026 में सामने आया, जिसकी पुष्टि BleepingComputer जैसी प्रमुख टेक साइट्स ने भी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, लिंक्डइन का 2.7 MB का जावास्क्रिप्ट बंडल Chromium-आधारित ब्राउजरों (जैसे क्रोम, एज) में इंजेक्ट हो जाता है और 6,222 से अधिक ब्राउजर एक्सटेंशंस की जांच करता है।

ब्राउजर स्कैनिंग का तकनीकी तरीका

यह स्कैनिंग chrome-extension:// URL स्कीम के जरिए होती है, जहां स्क्रिप्ट एक्सटेंशंस के यूनिक आईडी से जुड़ी फाइल रिसोर्सेस को एक्सेस करने की कोशिश करती है। अगर फाइल लोड हो जाती है, तो पता चल जाता है कि वह एक्सटेंशन इंस्टॉल है। दिसंबर 2025 में यह संख्या 5,459 थी, जो फरवरी 2026 तक 6,167 और अब 6,236 तक पहुंच गई। इनमें Lusha, ZoomInfo, Apollo जैसे प्रतिस्पर्धी टूल्स शामिल हैं, जो नौकरी बदलने की मंशा, स्वास्थ्य ऐप्स, राजनीतिक एक्सटेंशंस या धार्मिक ट्रैकर्स जैसी संवेदनशील जानकारी उजागर कर सकते हैं।

इतना ही नहीं, स्क्रिप्ट डिवाइस फिंगरप्रिंटिंग भी करती है- CPU कोर, मेमोरी, बैटरी स्टेटस, स्क्रीन रेजोल्यूशन, टाइम जोन, भाषा सेटिंग्स जैसी 48 पॉइंट्स इकट्ठे कर यूजर का डिजिटल प्रोफाइल बनाती है। यह डेटा RSA एन्क्रिप्शन से सुरक्षित होकर लिंक्डइन सर्वर और HUMAN Security (पूर्व PerimeterX) को भेजा जाता है।

कानूनी और नैतिक विवाद

Fairlinked की रिपोर्ट इसे ‘कॉर्पोरेट जासूसी’ करार देती है, क्योंकि लिंक्डइन प्रोफाइल से नाम, कंपनी, पद जुड़ने पर यह व्यक्तिगत डेटा बन जाता है। EU के GDPR और कैलिफोर्निया के CCPA का उल्लंघन होने का आरोप है, चूंकि प्राइवेसी पॉलिसी में इसका जिक्र नहीं। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ट्रैकिंग बॉट डिटेक्शन के बहाने यूजर्स की जासूसी है। Reddit और टेक फोरम्स पर बहस छिड़ गई है, जहां यूजर्स इसे ‘डिजिटल होम इन्वेजन’ बता रहे हैं। म्यूनिख कोर्ट में मुकदमा चल रहा है, और Brave ब्राउजर जैसे टूल्स इसे ब्लॉक करने लगे हैं।

लिंक्डइन का पक्ष और जांच

लिंक्डइन का कहना है कि यह सिक्योरिटी मेजर है, जो स्क्रैपिंग रोकने के लिए है। रिपोर्ट पब्लिश करने वाले का अकाउंट स्क्रैपिंग के लिए बैन हुआ था, जिसकी जर्मन कोर्ट ने पुष्टि की। फिर भी, आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया। Firefox यूजर्स सुरक्षित हैं, क्योंकि उनका URL स्कीम अलग है।

यूजर्स के लिए सुरक्षा उपाय

यूजर्स क्या करें? Browsergate.eu/extensions पर अपने एक्सटेंशंस चेक करें। GDPR/CCPA रिक्वेस्ट भेजें- AedEvent/SpectroscopyEvent डेटा मांगें। एक्सटेंशंस डिसेबल करें, Firefox शिफ्ट करें या डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी में शिकायत दर्ज करें। यह मामला सोशल मीडिया प्राइवेसी पर नई बहस छेड़ रहा है- क्या प्रोफेशनल नेटवर्किंग की कीमत आपकी निजता है?

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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