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Yoga For Eyesight: क्या वाकई योग से उतर सकता है आंखों का चश्मा? जान लीजिए इसके पीछे का विज्ञान और सच

चश्मा हटाने के लिए योग कितना असरदार है? इस विस्तृत रिपोर्ट में जानें त्राटक और पाल्मिंग जैसी क्रियाओं का विज्ञान और यह भी कि क्या वाकई योग से रिफ्रैक्टिव एरर ठीक हो सकता है। अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों की ये बातें जरूर जान लें।

By Pinki Negi

Yoga For Eyesight: क्या वाकई योग से उतर सकता है आंखों का चश्मा? जान लीजिए इसके पीछे का विज्ञान और सच!
Yoga For Eyesight

आज के समय में ‘स्क्रीन टाइम’ हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गया है। घंटों लैपटॉप, स्मार्टफोन और टीवी के सामने बिताने के कारण आंखों पर तनाव (Eye Strain) बढ़ना और कम उम्र में चश्मा लगना एक बड़ी समस्या बन चुकी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि योग और प्राणायाम के जरिए आंखों की रोशनी बढ़ाकर चश्मा पूरी तरह हटाया जा सकता है। लेकिन क्या विज्ञान इन दावों का समर्थन करता है? आइए समझते हैं योग और आंखों की सेहत का असली सच।

आंखों के लिए योग के वैज्ञानिक फायदे

नेत्र विशेषज्ञ मानते हैं कि योग सीधे तौर पर चश्मा नहीं हटाता, लेकिन यह आंखों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद जरूर करता है। योग के मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:

  • तनाव में कमी: लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की ‘सिलियरी मसल्स’ थक जाती हैं। योग इन मांसपेशियों को रिलैक्स कर आंखों की थकान (Digital Eye Strain) कम करता है।
  • रक्त संचार और ऑक्सीजन: प्राणायाम के जरिए शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, जिससे आंखों की रेटिना और ऑप्टिक नर्व को पोषण मिलता है।
  • सूखापन (Dry Eyes) से राहत: योग की कुछ क्रियाएं आंखों में नमी बनाए रखने में मदद करती हैं, जिससे जलन और खुजली की समस्या कम होती है।

प्रभावशाली योग क्रियाएं और उनके लाभ

आंखों की सेहत के लिए विशेषज्ञों ने इन तीन क्रियाओं को सबसे अधिक उपयोगी बताया है:

  1. पाल्मिंग (Palming): अपनी हथेलियों को रगड़कर गर्म करें और फिर आंखों को हल्के से ढक लें। यह अंधकार और गर्मी आंखों की नसों को तुरंत आराम पहुँचाती है।
  2. त्राटक (Trataka): किसी मोमबत्ती की लौ या एक बिंदु पर बिना पलक झपकाए ध्यान केंद्रित करना। इससे आंखों की फोकस करने की शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
  3. भ्रामरी और अनुलोम-विलोम: ये प्राणायाम मस्तिष्क और आंखों के बीच के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करते हैं, जिससे नजर का धुंधलापन कम करने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

नेत्र विज्ञान (Ophthalmology) के अनुसार, अधिकांश लोगों को चश्मा ‘रिफ्रैक्टिव एरर’ (जैसे मायोपिया या दूर-दृष्टि दोष) की वजह से लगता है।

  • बनावट का सच: चश्मा तब लगता है जब आंख की पुतली (Eyeball) का आकार बढ़ जाता है या लेंस की बनावट में बदलाव आता है। योग शरीर की मांसपेशियों को तो लचीला बना सकता है, लेकिन यह आंख की फिजिकल बनावट (Structural Shape) को नहीं बदल सकता।
  • क्या चश्मा हटेगा?: विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि योग आंखों की हेल्थ को ‘सपोर्ट’ करता है और नंबर को तेजी से बढ़ने से रोक सकता है, लेकिन इसे चश्मा हटाने का ‘विकल्प’ मानना गलत है। चश्मा हटाने के लिए आज भी लेजर सर्जरी (LASIK) ही सबसे प्रभावी वैज्ञानिक तरीका है।

योग को जीवनशैली बनाएं, इलाज नहीं

अगर आप नियमित योग करते हैं, तो आपकी आंखें लंबे समय तक स्वस्थ रह सकती हैं और आप डिजिटल थकान से बच सकते हैं। लेकिन अगर आपकी नजर कमजोर है, तो केवल योग के भरोसे रहना जोखिम भरा हो सकता है।

सही सलाह: समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं, संतुलित आहार (विटामिन-ए युक्त) लें और स्क्रीन से ब्रेक लेते रहें। योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं, क्योंकि यह आंखों की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में बहुत मददगार है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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