
हरियाणा जैसे राज्यों में श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी एक नई कल्याणकारी स्कीम ने आम जनता के बीच खास रुचि पैदा की है, जिसमें मेधावी छात्रों को कक्षा 10वीं की परीक्षा में उम्दा प्रदर्शन पर लगभग ₹51,000 तक की एकमुश्त नकद सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत श्रमिक कार्ड (Labour Card) धारक परिवारों के बच्चों को न सिर्फ हर साल वित्तीय सहायता मिलती है, बल्कि टॉप मार्क्स लाने पर उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी प्रोवाइड की जाती है, जिसे आम तौर पर “₹51,000 स्कीम” के नाम से सोशल मीडिया और न्यूज कंटेंट में प्रचारित किया जा रहा है।
हरियाणा में ₹21,000-₹51,000 तक मेधावी पुरस्कार
हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड (HBOCWWB) की ‘फाइनेंशियल असिस्टेंस फॉर एजुकेशन ऑफ़ चिल्ड्रन ऑफ़ रजिस्टर्ड वर्कर’ जैसी योजना के तहत श्रमिक कार्डधारी मजदूरों के बच्चों को कक्षा 1 से स्नातकोत्तर तक वार्षिक छात्रवृत्ति के रूप में ₹8,000 से ₹20,000 तक की राशि दी जाती है।
इसके अलावा, जो छात्र कक्षा 10वीं में कम से कम 60% से अधिक अंक लाते हैं, उन्हें मेधावी इनसेंटिव के रूप में अतिरिक्त ₹21,000 से ₹51,000 तक की मदद मिलती है; जहां 90% से अधिक मार्क्स लाने पर ₹51,000, 80% पर ₹41,000, 70% पर ₹31,000 और 60% पर ₹21,000 की राशि एकमुश्त दी जाती है।
UP, राजस्थान और बिहार में श्रमिक बच्चों के लिए अलग‑अलग पैकेज
अन्य राज्यों में भी श्रमिक वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा‑सहायता और मेधावी इनसेंटिव की अलग‑अलग योजनाएँ चल रही हैं। उत्तर प्रदेश में ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ के तहत श्रमिक परिवार के बच्चों को लगभग ₹1,000–₹1,200 प्रति माह की स्टाइपेंड दी जाती है, जबकि 8वीं, 9वीं और 10वीं की परीक्षा में पास होने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलती है।
राजस्थान की ‘निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना’ के तहत कक्षा 6 से स्नातकोत्तर तक ₹8,000 से ₹60,000 तक की छात्रवृत्ति और टॉप‑10 में आने वाले छात्रों को तकरीबन ₹1 लाख का बड़ा पुरस्कार भी घोषित किया गया है। वहीं बिहार में 10वीं और 12वीं की परीक्षा में 60% से अधिक अंक लाने पर ₹10,000 से ₹25,000 तक का “मजदूर नकद पुरस्कार” दिया जाता है, जो श्रमिक कार्डधारियों के मेधावी बच्चों के लिए एक अतिरिक्त उत्साहवर्धक इंसेंटिव है।
पात्रता: लेबर कार्ड, एक साल पुराना और नियमित अध्ययन
इन योजनाओं के तहत आवेदक को कम से कम माता या पिता में से एक श्रमिक के पास वैध लेबर कार्ड (BOCW कार्ड) होना अनिवार्य है। कई राज्यों में यह शर्त भी जोड़ी गई है कि यह कार्ड कम से कम एक वर्ष पुराना और समय‑पर नवीकृत होना चाहिए, ताकि लाभार्थी वास्तविक रूप से रजिस्टर्ड श्रमिक परिवार से संबंधित हो। बच्चा किसी मान्यता प्राप्त सरकारी या पहचाने गए निजी विद्यालय/कॉलेज में नियमित रूप से पढ़ रहा हो और कई राज्यों में कम से कम 70–75% की उपस्थिति का भी नियम रखा गया है, ताकि सहायता वास्तविक रूप से शिक्षा पर ही खर्च हो।
जरुरी दस्तावेज
इन योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेजों में माता‑पिता का वैध लेबर कार्ड, छात्र और अभिभावक का आधार कार्ड, पिछली कक्षा की मार्कशीट, वर्तमान संस्थान का बोनाफाइड प्रमाण पत्र, आधार‑लिंक बैंक पासबुक की कॉपी, परिवार का आय प्रमाण पत्र और पासपोर्ट‑साइज फोटो जैसे मुख्य प्रमाणपत्र शामिल हैं।
श्रमिक कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
आवेदन के लिए श्रमिक कार्डधारी को अपने राज्य के श्रम विभाग या BOCW कल्याण बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है, जैसे हरियाणा में hrylabour.gov.in, राजस्थान में rajssup.rajasthan.gov.in या जनसूचना पोर्टल, उत्तर प्रदेश में upbocw.in और बिहार में bocw.bihar.gov.in। वहाँ ‘Apply for Scheme’ या ‘Scholarship’ लिंक पर क्लिक करके लेबर कार्ड नंबर डालकर पात्रता वेरिफाई करने के बाद ऑनलाइन फॉर्म भरा जा सकता है और सभी जरूरी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड कर सबमिट किया जा सकता है, जिसके बाद अनुमोदन पर सहायता राशि सीधे बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।
इस तरह श्रमिक कार्ड धारक परिवारों के लिए यह योजना न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई का बोझ हल्का करने, बल्कि मेधावी बच्चों को आगे बढ़ने के लिए मजबूत आर्थिक प्रोत्साहन देने का काम कर रही है, बशर्ते आवेदक अपने राज्य की ऑफिशियल गाइडलाइन और लास्ट डेट को ध्यान में रखे।









