
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में खेती केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। अक्सर खाद, बीज और नई मशीनों के लिए किसानों को पैसों की जरूरत पड़ती है, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण वे बैंक के बजाय साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज ले लेते हैं और कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। असल में, सरकार और बैंक मिलकर किसानों को बहुत ही कम ब्याज दरों पर ‘एग्रीकल्चर लोन’ (Agri Loan) उपलब्ध करा रहे हैं। बस जरूरत है सही प्रक्रिया और दस्तावेजों को समझने की। इस लेख में हम आपको बहुत ही आसान तरीके से बताएंगे कि आप खेती के लिए सरकारी लोन कैसे ले सकते हैं और भारी ब्याज से खुद को कैसे बचा सकते हैं।
आपकी हर जरूरत के लिए अलग है खेती लोन
खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक मुख्य रूप से तीन तरह के लोन देते हैं। सबसे पहले आता है शॉर्ट टर्म लोन (KCC), जिसे ‘फसल ऋण’ भी कहते हैं; यह बीज और खाद जैसी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए होता है। दूसरा है इन्वेस्टमेंट लोन, जो ट्रैक्टर खरीदने या बोरवेल लगवाने जैसे बड़े कामों के लिए 3 से 7 साल तक के लिए मिलता है। इसके अलावा, यदि आप खेती के साथ-साथ अपना छोटा व्यवसाय जैसे आटा चक्की या तेल मिल शुरू करना चाहते हैं, तो आप एग्रो-प्रोसेसिंग लोन का लाभ उठा सकते हैं। अपनी जरूरत पहचानकर सही लोन चुनना ही समझदारी है।
मात्र 4% ब्याज पर दुनिया का सबसे सस्ता लोन
खेती के लिए सबसे प्रसिद्ध और फायदेमंद योजना किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) है। वैसे तो बैंक इस पर लगभग 9% ब्याज लेते हैं, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाली 2% की सब्सिडी के कारण यह घटकर 7% रह जाता है। KCC की सबसे खास बात यह है कि यदि किसान अपना कर्ज समय पर चुका देता है, तो उसे 3% की अतिरिक्त छूट और मिलती है। इस तरह, ईमानदार किसानों को प्रभावी रूप से केवल 4% वार्षिक ब्याज ही देना पड़ता है। साहूकारों के ऊंचे ब्याज के मुकाबले खेती के लिए इससे सस्ता और सुलभ लोन कोई दूसरा नहीं है।
खेती पर लोन के लिए जरूरी दस्तावेज
खेती के लिए बैंक से लोन (Agri Loan) या किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने के लिए आपको इन प्रमुख दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:
- पहचान का प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई भी एक।
- निवास का प्रमाण: राशन कार्ड, आधार कार्ड या हाल ही का बिजली/पानी का बिल।
- जमीन के दस्तावेज: जमीन की ताजा खतौनी (Land Records), जमाबंदी और खेत का आधिकारिक नक्शा।
- फसल का ब्यौरा: पटवारी या लेखपाल द्वारा प्रमाणित किया गया दस्तावेज, जिसमें यह लिखा हो कि आप खेत के कितने हिस्से में कौन सी फसल बोने जा रहे हैं।
- बैंक रिकॉर्ड: आपके बैंक खाते का पिछले 6 महीने का स्टेटमेंट या पासबुक की फोटोकॉपी।
- फोटोग्राफ: हाल ही में खिंचवाई गई 2-4 पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो।
- शपथ पत्र (Affidavit): कई बार बैंक यह लिखित में मांगते हैं कि आपने किसी दूसरे बैंक से पहले से कोई लोन नहीं लिया है।
एग्रीकल्चर लोन का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
खेती के लिए बैंक से लोन (Agri Loan) या किसान क्रेडिट कार्ड लेने की पूरी प्रक्रिया यहाँ आसान पॉइंट्स में दी गई है:
- स्टेप 1 (बैंक चयन): अपने नजदीकी किसी भी सरकारी बैंक (जैसे SBI, PNB), ग्रामीण बैंक या को-ऑपरेटिव बैंक की शाखा में जाएँ।
- स्टेप 2 (फॉर्म भरना): बैंक काउंटर से ‘एग्रीकल्चर लोन’ या ‘KCC’ का आवेदन फॉर्म लें और उसमें अपनी व्यक्तिगत व खेती की जानकारी सही-सही भरें।
- स्टेप 3 (दस्तावेज जमा करना): भरे हुए फॉर्म के साथ पहचान पत्र और जमीन के कागजात (खतौनी/नक्शा) बैंक अधिकारी को सौंपें।
- स्टेप 4 (खेत का मुआयना): बैंक का एक प्रतिनिधि (Field Officer) आपके खेत पर आकर जमीन और फसल की सच्चाई की जांच कर सकता है।
- स्टेप 5 (लोन लिमिट): आपकी जमीन की बाजार में कीमत और फसल उगाने में आने वाली लागत के आधार पर बैंक लोन की अधिकतम राशि तय करेगा।
- स्टेप 6 (पैसा मिलना): सभी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद, बैंक आपके खाते में पैसे ट्रांसफर कर देगा या आपको KCC कार्ड जारी कर दिया जाएगा।
लोन लेने से पहले समझें पाई-पाई का हिसाब
एग्रीकल्चर लोन लेते समय केवल ब्याज ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य छोटे खर्चों का ध्यान रखना भी जरूरी है। आमतौर पर खेती के लोन की ब्याज दरें 7% से 12% के बीच होती हैं। राहत की बात यह है कि अधिकांश बैंक ₹3 लाख तक के KCC लोन पर कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं लेते हैं। इसके अलावा, लोन की राशि से एक छोटा हिस्सा फसल बीमा (Crop Insurance) के प्रीमियम के रूप में काटा जाता है। यह आपके लिए फायदेमंद है, क्योंकि यदि प्राकृतिक आपदा या बीमारी के कारण फसल खराब होती है, तो बीमा कंपनी आपके लोन की भरपाई कर देती है और आपका कर्ज माफ या एडजस्ट हो जाता है।
इन सरकारी योजनाओं का उठाएं फायदा
सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। यहाँ इन प्रमुख योजनाओं के फायदों को आसान पॉइंट्स में समझाया गया है:
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): यह खेती के लिए सबसे सस्ता लोन है। ₹3 लाख (अब बजट 2025-26 के अनुसार ₹5 लाख तक की चर्चा) के लोन पर प्रभावी ब्याज दर केवल 4% रह जाती है, बशर्ते आप लोन का भुगतान समय पर करें।
- पीएम किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): इसके तहत छोटे और सीमांत किसानों को साल भर में ₹6,000 की नकद सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। यह खेती के छोटे-मोटे खर्चों के लिए एक मजबूत इनकम सपोर्ट है।
- ब्याज सहायता योजना (MISS): सरकार किसानों को ₹3 लाख तक के अल्पकालिक फसल ऋण पर 2% की वार्षिक ब्याज छूट प्रदान करती है, जिससे किसानों पर ब्याज का बोझ काफी कम हो जाता है।
- प्रधानमंत्री कुसुम योजना (PM-KUSUM): सिंचाई के लिए सोलर पंप लगवाने पर सरकार 90% तक की सब्सिडी दे रही है। इसमें किसान को केवल 10% लागत देनी होती है, जिससे बिजली और डीजल का खर्च शून्य हो जाता है।
- प्राकृतिक आपदा राहत: यदि सूखे या बाढ़ जैसी आपदा से फसल खराब होती है, तो इन योजनाओं के तहत लोन की किश्तों को आगे बढ़ाया जाता है (Restructuring) और ब्याज में अतिरिक्त राहत दी जाती है।
किसानों के लिए खास टिप्स
खेती के लिए लोन लेते समय ये 3 बातें आपको कर्ज के जाल से बचा सकती हैं:
- साहूकारों से बचें: गांव के साहूकार आपसे 24% से 36% तक भारी ब्याज वसूलते हैं, जबकि बैंक से यही लोन आपको मात्र 4% से 7% ब्याज पर मिल सकता है।
- समय पर भुगतान: यदि आप बैंक की किस्तें समय पर भरते हैं, तो आपको ब्याज में एक्स्ट्रा छूट मिलती है और अगली बार बैंक आपकी लोन लिमिट भी बढ़ा देता है।
- पैसे का सही उपयोग: खेती के लिए लिए गए पैसे को कभी भी घर के खर्च या शादी-ब्याह में न लगाएं। लोन का पैसा खेती में लगाने से ही अच्छी पैदावार होगी और आप आसानी से कर्ज चुका पाएंगे।
खेती पर लोन मिलना है अब आसान
डिजिटल इंडिया ने खेती के लिए लोन लेने की राह को बेहद आसान बना दिया है। अब आपको बैंक के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं, बल्कि आप घर बैठे ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं। बस अपने दस्तावेज़ (Documents) दुरुस्त रखिए और सरकार द्वारा दी जा रही ब्याज छूट और सब्सिडी का पूरा लाभ उठाइए। सही जानकारी ही आपको साहूकारों के चंगुल से बचाकर एक सफल और कर्ज-मुक्त किसान बना सकती है।









