
जनवरी और फरवरी का समय किसानों के लिए कमाई का शानदार मौका होता है। इस मौसम में घिया, कद्दू, तोरी, करेला और खीरा जैसी बेल वाली सब्जियों की खेती करना बेहद फायदेमंद रहता है। इन फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बुवाई के मात्र 60 से 65 दिनों के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं। कम समय में तैयार होने वाली इन सब्जियों को बाजार में बेचकर किसान भाई अपनी आमदनी को तेजी से बढ़ा सकते हैं।
हाइब्रिड बीजों से मिलेगी बंपर पैदावार
सब्जी की खेती में मोटा मुनाफा कमाने के लिए बीजों की सही किस्म का चुनाव सबसे जरूरी है। पिछले अनुभवों से पता चला है कि हाइब्रिड बीजों के इस्तेमाल से पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीजन में घीया के लिए बलवंत और मल्लिका, जबकि करेले के लिए नगेश और प्राची जैसी किस्में सबसे अच्छी हैं। यदि आप खरबूज की खेती कर रहे हैं, तो बॉबी और मधु राजा जैसी किस्मों को चुनें, और तरबूज के लिए मिश्री व आरोही किस्में बेहतर उत्पादन की गारंटी देती हैं। इन आधुनिक किस्मों को अपनाकर किसान कम मेहनत में अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
कड़ाके की ठंड से फसल को बचाएगी ‘प्लास्टिक लो टनल’ विधि
सर्दियों के मौसम में पाला (ठंड), हानिकारक कीट और बीमारियाँ फसलों की सबसे बड़ी दुश्मन होती हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए किसान “प्लास्टिक लो टनल विधि” (प्लास्टिक सुरंग) का उपयोग कर सकते हैं। यह तकनीक एक छोटे ग्रीनहाउस की तरह काम करती है, जो पौधों के ऊपर एक पारदर्शी सुरक्षा कवच बना देती है।
इसके अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले नियंत्रित और गर्म रहता है, जिससे भीषण ठंड में भी फसल सुरक्षित रहती है और उसकी ग्रोथ तेजी से होती है। यह विधि न केवल फसल को पाले से बचाती है, बल्कि कीटों के संक्रमण को भी काफी हद तक कम कर देती है।
बेल वाली सब्जियों की बुवाई का वैज्ञानिक तरीका
सब्जियों की बंपर पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करना बेहद जरूरी है। बेल वाली फसलों के लिए हमेशा ऊपर उठी हुई क्यारियां (मेड़) ही बनाएं। दो क्यारियों के बीच कम से कम 2 मीटर की दूरी और पौधों के बीच 60 सेंटीमीटर का फासला रखें। बुवाई के समय खेत में अच्छी नमी होनी चाहिए। विशेषकर खीरे के लिए, मिट्टी तैयार करते समय गोबर की खाद के साथ सुपर फास्फेट, यूरिया और पोटाश का सही मिश्रण मिलाएं। ध्यान रखें, बुवाई के एक महीने बाद और पौधों में फूल आने के समय यूरिया का छिड़काव करने से फलों की संख्या और गुणवत्ता दोनों बढ़ जाती है।









