
हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ बनाए गए नए कानून, ‘ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम-2025’ पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. कुछ याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को चुनौती देते हुए कहा है कि नए कानून से लाखों लोगों की रोजी-रोटी छीन जाएगी, जिससे उन पर बुरा असर होगा. जस्टिस बी एम श्याम प्रसाद ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय दिया है. साथ ही याचिकाकर्ताओं को भी यह साबित करने का मौका दिया गया है कि इस कानून को अभी लागू नहीं करना चाहिए.
याचिका में कहा गया…
वकीलों का कहना है कि इस नए कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है पर अभी तक यह लागू नही हुआ है. उन्होंने दलील दी कि अगर कोई कानून अचानक लागू हो जाएं तो उद्योगों का बहुत बड़ा नुकसान होता है. उनका कहना है कि अगर उद्योग रातोंरात बंद हो गए, तो उसका रिजल्ट सही नही होगा. इसलिए उनकी मांग है कि सरकार इस कानून को तब तक लागू न करे, जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाती, या फिर इसे लागू करने से कम से कम एक हफ्ता पहले नोटिस दे, ताकि वे कोर्ट जा सकें.
केंद्र सरकार के वकील ने कहा
केंद्र सरकार के वकील तुषार मेहता का कहना है कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई अदालत ऐसे कानून की जाँच कर रही है, जिसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है.उन्होंने बताया कि जब संसद कोई कानून बना देती है और राष्ट्रपति उसे मंजूरी दे देते हैं, तो वह कानून लागू हो जाता है. उन्होंने यह भी दलील दी कि इस स्तर पर अदालतों को दखल नहीं देना चाहिए. सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति परेशान महसूस करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार को कानून लागू करने से पहले लोगों को पहले से सूचना देनी होगी.
अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा
अदालत ने केंद्र सरकार से पूछते हुए कहा कि क्या वह इस कानून को जल्द ही लागू करेंगे. इस पर केंद्र के वकील ने जवाब दिया कि वह सरकार से बात करके बताएंगे. इसके बाद अदालत ने सुनवाई टाल दी और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की अंतरिम राहत की मांग पर अपना जवाब भी पेश करे.
