
संसद में सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) का निजीकरण (Privatization) नहीं किया जाएगा। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में कहा, “BSNL भारत की जनता की है और भारत की जनता के लिए ही रहेगी।” इस बयान के साथ ही उन सभी अफवाहों पर विराम लग गया जो पिछले कई महीनों से बीएसएनएल के निजी हाथों में जाने को लेकर फैली हुई थीं।
₹3.22 लाख करोड़ का ऐतिहासिक निवेश
सरकार ने अब तक के सबसे बड़े रिवाइवल प्लान के तहत बीएसएनएल को मजबूत करने के लिए ₹1.64 लाख करोड़ के पैकेज को मंजूरी दी है। इसमें स्पेक्ट्रम आवंटन, बैलेंस शीट सुधार और नेटवर्क विस्तार शामिल है। ध्यान देने वाली बात यह है कि 2019, 2022 और 2023 में दिए गए पैकेजों को मिलाकर बीएसएनएल के लिए कुल सरकारी सहायता अब ₹3.22 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह भारत के इतिहास में किसी सार्वजनिक दूरसंचार कंपनी के लिए अब तक का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है।
‘मेक इन इंडिया’ तकनीक पर पूरा भरोसा
इस पुनरुद्धार योजना की सबसे खास बात यह है कि बीएसएनएल विदेशी उपकरणों के बजाय पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ तकनीक पर भरोसा कर रहा है। देश की दिग्गज कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), तेजस नेटवर्क्स और सी-डॉट (C-DOT) द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके बीएसएनएल अपना 4G नेटवर्क बिछा रहा है। यह कदम न केवल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत रणनीतिक माना जा रहा है।
4G टावरों का जाल और 5G की तैयारी
फरवरी 2026 तक देश भर में लगभग 97,906 4G साइटें लगाई जा चुकी हैं, जिनमें से 96,103 पहले से ही सक्रिय हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य जल्द ही 1 लाख 4G साइटों का आंकड़ा पार करने का है। एक और बड़ी खुशखबरी यह है कि वर्तमान में लगाए जा रहे 4G उपकरण सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए सीधे 5G में अपग्रेड किए जा सकेंगे। इससे भविष्य में अलग से भारी निवेश की जरूरत नहीं पड़ेगी। कुछ क्षेत्रों में दिसंबर 2025 से ही 5G के पायलट टेस्ट शुरू करने की योजना है, और 4G नेटवर्क के स्थिर होते ही पूरे देश में 5G सेवाएं लॉन्च कर दी जाएंगी।
18 साल बाद मुनाफे में लौटी कंपनी
इस भारी निवेश के सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगे हैं। बीएसएनएल ने पिछले 18 वर्षों में पहली बार लगातार दो तिमाहियों में परिचालन लाभ (Operating Profit) दर्ज किया है। कंपनी के ग्राहकों की संख्या बढ़कर अब 9.27 करोड़ हो गई है, जो बीएसएनएल के पुनरुत्थान की ओर एक महत्वपूर्ण संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बीएसएनएल की मौजूदगी निजी कंपनियों के लिए एक ‘बाजार संतुलक’ (Market Balancer) का काम करती है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर दरें और सेवाएं मिलती हैं।
आगे की राह
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बीएसएनएल को कमजोर कर बेचने के बजाय उसे आधुनिक तकनीक से लैस कर एक मजबूत सार्वजनिक ऑपरेटर बनाया जाएगा। आने वाले दिनों में बीएसएनएल के सिम पोर्टिंग (MNP) की प्रक्रिया को और सरल बनाए जाने की भी उम्मीद है, ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ता इसके सस्ते और भरोसेमंद प्लान्स का फायदा उठा सकें।









