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ITR फॉर्म-1 में हुए 3 बड़े बदलाव! एक छोटी सी गलती और सीधे आएगा आयकर विभाग का नोटिस, फौरन जानें नियम

असेसमेंट ईयर 2026‑27 के आईटीआर‑1 (सहज) में तीन बड़े बदलाव: अब ₹1.25 लाख तक LTCG और दो हाउस प्रॉपर्टी की आय भी दर्शाई जा सकती है, लेकिन छोटी सी गलती या सीमा लांघने पर रिटर्न डिफेक्टिव हो सकता है और आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है। HRA व डिडक्शन दावों में भी ज्यादा डिटेल जरूरी है।

By Pinki Negi

ITR फॉर्म-1 में हुए 3 बड़े बदलाव! एक छोटी सी गलती और सीधे आएगा आयकर विभाग का नोटिस, फौरन जानें नियम

आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026‑27 (वित्त वर्ष 2025‑26 पर लागू) के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं। ज्यादातर सैलरीड और मध्यम वर्गीय टैक्सपेयर्स अब भी आईटीआर‑1 (सहज) के जरिए ही रिटर्न दाखिल करते हैं, लेकिन इस बार फॉर्म में तीन बड़े बदलाव हुए हैं, जिनकी अनदेखी करने पर आपका रिटर्न “डिफेक्टिव” घोषित हो सकता है और सीधे आयकर विभाग का नोटिस आ सकता है।

एलटीसीजी का नया दायरा और नियम

पहले तक यदि आय सिर्फ सैलरी और शेयर/म्यूचुअल फंड से होती थी तो लॉन्ग‑टर्म कैपिटल गेन (LTCG) वाले टैक्सपेयर्स को अनिवार्य रूप से ITR‑2 भरना पड़ता था। लेकिन अब सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है: लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी‑ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से होने वाले LTCG को अधिकतम ₹1.25 लाख तक ITR‑1 में दिखाने की अनुमति दे दी गई है, बशर्ते आपकी और आय ITR‑1 की शर्तों में फिट हो।

इससे मध्यम वर्गीय शेयर‑निवेशकों को राहत जरूर मिली है, लेकिन चूक बहुत खतरनाक हो सकती है। चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों के मुताबिक अगर आपका LTCG इस ₹1.25 लाख की सीमा से सिर्फ एक रुपया भी ऊपर हो और आपने फिर भी ITR‑1 फाइल कर दिया तो यह रिटर्न टेक्निकली अवैध माना जा सकता है, यानी रिटर्न “डिफेक्टिव” घोषित होने और आयकर विभाग की ओर से नोटिस के रूप में नोटिफिकेशन आने का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए अब टैक्सपेयर्स को अपने पोर्टफोलियो का सटीक रिकॉर्ड रखना ज़रूरी है ताकि वास्तविक LTCG गलत‑फॉर्म में रिपोर्ट न हो।

अब दो घरों की आय भी दिखा सकते हैं

अब तक ITR‑1 केवल उन टैक्सपेयर्स के लिए था जिनके पास सिर्फ एक हाउस प्रॉपर्टी (स्वयं रहने या किराए पर देने वाली) थी। दो या दो से अधिक प्रॉपर्टी होने पर सीधे ITR‑2 फॉर्म का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब दो हाउस प्रॉपर्टी से आय वाले करदाताओं को भी ITR‑1 के दायरे में लाया गया है।

इसका सीधा अर्थ यह है कि अब आपको दोनों प्रॉपर्टी की इनकम, लोन पर ब्याज, म्युनिसिपल टैक्स और किराए की जानकारी अलग‑अलग भरनी होगी। आयकर विभाग का AI‑आधारित सिस्टम आपके AIS (Annual Information Statement) और फॉर्म में दर्ज आंकड़ों का मिलान कर रहा है, और अगर दोनों में विसंगति दिखती है (जैसे AIS में दो प्रॉपर्टी की इनकम दिख रही है, लेकिन आपने सिर्फ एक का विवरण दिया), तो यह नोटिस के लिए सीधा आधार बन जाएगा।

एलटीसीजी और टैक्स दरों का नया गणित

बजट 2024‑25 में लागू LTCG दरों का असर अब ITR‑1 (FY 2025‑26 / AY 2026‑27) में साफ दिख रहा है: बिना इंडेक्सेशन के LTCG पर 10% की जगह 12.5% और इंडेक्सेशन के साथ 20% दर लागू हो गई है। अब रिटर्न भरते समय Schedule CG में आपको ट्रांजैक्शन की तारीखों के साथ निवेश और बिक्री की जानकारी देनी होगी, ताकि सही स्लैब और सही दर लागू हो सके।

तारीखों का गलत डेटा या ट्रांजैक्शन की भावना न भरना आपकी टैक्स कैलकुलेशन को गलत कर सकता है, जिसे आयकर विभाग “अंडर‑रिपोर्टिंग” मानकर जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई कर सकता है। इसके साथ ही AIS में अब “कंसोलिडेटेड TDS कोड” के जरिए बैंक ब्याज, डिविडेंड और सैलरी का हर पैसा विभाग के सामने आता है; ऐसे में फॉर्म में अंतर दिखाना और भी आसान हो जाता है।

HRA और डिडक्शन दावों पर ज्यादा कड़ी शर्तें

अब एचआरए क्लेम करने वालों के लिए नियम और सख्त हो गए हैं। पहले केवल रेंट रसीद पर्याप्त थी, लेकिन अब मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य हो गया है। इसके अलावा ड्रॉप‑डाउन से आपको खुद‑से टाइप करने की जगह सही डिडक्शन श्रेणी चुननी होगी, जैसे ELSS, PPF, SSY, आदि। अगर आपने डिडक्शन दावा तो किया, लेकिन उसके लिए PAN या अन्य जरूरी डिटेल देने में चूक की, तो भी नोटिस के रास्ते खुल जाते हैं।

कौन नहीं भर सकता ITR‑1

हर सैलरीड व्यक्ति ITR‑1 नहीं भर सकता। अगर आपकी वार्षिक आय ₹50 लाख से ज्यादा है, या आप किसी कंपनी के डायरेक्टर हैं, या आपके पास अनलिस्टेड शेयर हैं, या LTCG ₹1.25 लाख की सीमा पार कर गया है, या आपकी कृषि आय ₹5,000 से ज्यादा है, या विदेश से आय/संपत्ति है, तो आपको विस्तृत फॉर्म (ITR‑2 या उसके बाद वाले) का ही इस्तेमाल करना होगा, वरना रिटर्न डिफेक्टिव माना जाएगा।

इन बदलावों के बीच टैक्सपेयर्स को चाहिए कि वे AIS, TDS स्टेटमेंट और ब्रोकरेज‑स्टेटमेंट से पहले ही अपना डेटा मैच कर लें और तारीखों, रकमों और डिडक्शन विवरण में कोई गलत‑फील्ड या टाइप‑ओ मिस न करें। वर्ना “छोटी सी गलती” भी आयकर विभाग के नोटिस का कारण बन सकती है और आपको नोटिस का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय और दस्तावेजों की तैयारी करनी पड़ सकती है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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