
ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध ने भारत के पड़ोसी क्षेत्र में तांडव मचा दिया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगाने से वैश्विक तेल सप्लाई चेन चरमरा गई है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड $105.15 प्रति बैरल और WTI $100.32 पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों में कच्चा तेल 40% महंगा हो चुका है, जिससे पेट्रोल-डीजल-LPG के दामों पर संकट मंडरा रहा है।
युद्ध का भारत पर सीधा असर
ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण दुनिया के 20% तेल प्रवाह को प्रभावित कर रहा है। भारत अपनी 85% तेल जरूरत आयात करता है, जिसमें मिडिल ईस्ट का बड़ा हिस्सा है। चाबहार पोर्ट पर खतरा भारत के अरबों डॉलर निवेश को दांव पर लगा रहा है। पड़ोसी नेपाल और पाकिस्तान में पहले ही पेट्रोल 31-55 रुपये महंगा हो चुका है – नेपाल में पेट्रोल 188 रुपये/लीटर, डीजल 196 रुपये/लीटर और LPG 2126 रुपये।
पाकिस्तान में पेट्रोल 321 पाकिस्तानी रुपये। भारत अभी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हुए है, लेकिन तेल कंपनियां (MRPL, CPCL, HPCL) को रोजाना भारी नुकसान हो रहा है। $70 से $105 प्रति बैरल की छलांग से आयात बिल हजारों करोड़ बढ़ चुका है।
LPG और तेल कीमतों में उछाल
घरेलू LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा होकर दिल्ली में 913 रुपये पहुंच गया, जबकि कमर्शियल में 115 रुपये की बढ़ोतरी। फारस की खाड़ी से शिवालिक और नंदा देवी जैसे दो LPG टैंकर भारत आ रहे हैं, जो किल्लत कम कर सकते हैं। हालांकि, होटल-रेस्टोरेंट में गैस सप्लाई रुक गई है। दिल्ली सरकार ने 19 किलो कमर्शियल सिलेंडरों पर 20% कैप लगा दिया – रोज 9000 की जगह 1800 सिलेंडर प्राथमिकता आधार पर। पैनिक बुकिंग और कालाबाजारी से संकट गहराया है। भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी जस के तस:
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| मुंबई | 103.54 | 92.05 |
| चेन्नई | 100.84 | 92.48 |
| कोलकाता | 105.45 | 92.36 |
सरकार का दावा है कि पेट्रोल-डीजल महंगे नहीं होंगे, लेकिन बढ़ते बीमा शुल्क और लागत से कंपनियों पर दबाव है।
सरकार के नए नियम और उपाय
गैस संकट के बीच सरकार ने ताबड़तोड़ बदलाव किए:
- LPG कीमत में 60 रुपये वृद्धि।
- रिफिलिंग समयसीमा शहरों में 25 दिन, ग्रामीण में 45 दिन।
- ECA एक्ट लागू कर कालाबाजारी रोकी।
- OTP अनिवार्य, PNG ग्राहकों के लिए सिलेंडर बुकिंग बंद।
- पाइप्ड गैस उपभोक्ताओं से सिलेंडर सरेंडर की अपील।
रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के आदेश हैं। भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन लंबे युद्ध से महंगाई (खाद्य तेल, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स) बढ़ेगी। विशेषज्ञ चेताते हैं – अगर युद्ध लंबा चला तो तेल $120/बैरल तक जा सकता है।
भविष्य की चुनौतियां
नेपाल-पाकिस्तान की तरह भारत में भी कीमतें बढ़ने का खतरा है। चीनी निर्यात प्रभावित होने से घरेलू चीनी सस्ती रह सकती है, लेकिन कुल अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा। सरकार ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और वैकल्पिक स्रोत तलाश रही है। स्थिति गतिशील है – नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत।









