Tags

फेल होने पर सरकारी नौकरी! अजीबोगरीब है ईरान का ‘Konkur Exam’, जानें क्या है ये अनोखा सिस्टम जो भारत में होता तो मच जाती खलबली

ईरान का 'कोंकूर' एग्जाम युवाओं के जीवन का टर्निंग पॉइंट: फेलियर मतलब लड़कों के लिए 2 साल की अनिवार्य आर्मी सर्विस। 4.5 घंटे का कठिन टेस्ट, बिना प्राइवेट कॉलेज ऑप्शन। ईरान-इजरायल युद्ध में बंकरों में पढ़ाई। भारत में लागू होता तो खलबली! लाखों छात्र डरे हुए।

By Pinki Negi

फेल होने पर सरकारी नौकरी! अजीबोगरीब है ईरान का 'Konkur Exam', जानें क्या है ये अनोखा सिस्टम जो भारत में होता तो मच जाती खलबली

ईरान का ‘कोंकूर’ (Konkur) एग्जाम केवल एक कॉलेज प्रवेश परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के जीवन का टर्निंग पॉइंट है। यहां फेल होने का मतलब साल बर्बाद होना नहीं, बल्कि लड़कों के लिए सीधे अनिवार्य सैन्य सेवा में कूद पड़ना है। भारत जैसे देशों में जहां JEE या NEET फेल होने पर प्राइवेट कॉलेज या ड्रॉप ईयर का ऑप्शन रहता है, वहां ईरान का यह सिस्टम अगर लागू होता तो खलबली मच जाती। वर्तमान ईरान-इजरायल युद्ध के बीच बंकरों में पढ़ाई कर रहे छात्रों की कहानी और डरावनी हो चुकी है।

कोंकूर: नेशनल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस का एकमात्र द्वार

ईरान में हायर एजुकेशन सरकारी विश्वविद्यालयों पर निर्भर है, और कोंकूर ही इसका एकल प्रवेश द्वार है। सनजेश संगठन द्वारा आयोजित यह परीक्षा हर साल लाखों छात्रों को आकर्षित करती है। सिलेबस बेहद व्यापक है- गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान के साथ फारसी साहित्य, अरबी भाषा और इस्लामी स्टडीज शामिल हैं। परीक्षा की लंबाई 4.5 घंटे बिना किसी ब्रेक के है, जो भारत की 3 घंटे वाली JEE या NEET से कहीं अधिक कठिनाई भरी है। रैंकिंग सिस्टम सख्त है; टॉप रैंकर्स को टॉप यूनिवर्सिटी जैसे तेहरान यूनिवर्सिटी मिलती हैं, बाकी नीचे के कोर्स। प्राइवेट कॉलेजों का अभाव इसे और चुनौतीपूर्ण बनाता है।

फेल होने का काला सच क्या?

क्वेरी में उल्लिखित ‘सरकारी नौकरी’ कोई चाय-पानी वाली नौकरी नहीं, बल्कि अनिवार्य सैन्य सेवा है। ईरान कानून के तहत 18 साल के हर पुरुष को 18-24 महीने (1.5-2 साल) की सर्विस देनी पड़ती है। यूनिवर्सिटी एडमिशन ही इससे बचाव का रास्ता है- पढ़ाई पूरी होने तक छूट। कोंकूर में अच्छी रैंक न मिले तो सीधे आर्मी में भर्ती, बॉर्डर पर ड्यूटी या युद्ध क्षेत्र में। लड़कियों को यह दबाव नहीं, लेकिन सामाजिक दबाव सबको घेरता है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल लाखों में से सिर्फ 10-15% को टॉप कोर्स मिलते हैं, बाकी संघर्ष।

युद्धग्रस्त ईरान: बंकरों में तैयारी

मार्च 2026 में ईरान-इजरायल तनाव चरम पर है। स्कूल बंद, इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद छात्र बंकरों में कोचिंग अटेंड कर रहे। परीक्षा शेड्यूल में देरी, सेंटर्स बंकरों के पास शिफ्ट होने की खबरें हैं। आजतक रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवा डर से कांप रहे- एक तरफ पढ़ाई, दूसरी तरफ मिसाइल हमलों का साया। यह सिस्टम 1979 की इस्लामी क्रांति से चला आ रहा, जो राष्ट्रवादी भावना को मजबूत करता है लेकिन मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ता।

भारत में होता तो क्या?

भारत में JEE फेल होने पर कोटा, प्राइवेट इंजीनियरिंग या विदेश का रास्ता खुला है। कोंकूर जैसा सिस्टम आता तो लाखों परिवार टूट जाते- ड्रॉप ईयर की बजाय आर्मी सर्विस। विशेषज्ञ मानते हैं, यह प्रोडक्टिविटी घटाएगा, सुसाइड रेट बढ़ाएगा। ईरान में सुधार की मांग उठ रही, लेकिन युद्ध ने मुद्दा दबा दिया। यह अनोखा सिस्टम शिक्षा और राष्ट्रसेवा का घालमेल है, जो प्रशंसा और आलोचना दोनों बटोरता। ईरानी युवा मजबूत बनते हैं, लेकिन कीमत भारी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें