
इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी का मानना है कि AI से बनी तस्वीरें और वीडियो भविष्य में सोशल मीडिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं। ये कंटेंट इतने असली दिखते हैं कि आम यूजर्स के लिए असली और नकली के बीच अंतर करना लगभग नामुमकिन होगा। मोसेरी ने चेतावनी दी है कि यदि इंस्टाग्राम ने अपनी तकनीक और नीतियों में तेजी से बदलाव नहीं किया, तो यूजर्स का इस प्लेटफॉर्म से भरोसा उठ सकता है। जहाँ यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पहले ही AI कंटेंट को लेकर कड़े कदम उठा चुके हैं, वहीं इंस्टाग्राम भी अब अपनी विश्वसनीयता बचाने के लिए नए बदलावों की तैयारी कर रहा है।
2026 की बड़ी चेतावनी
एडम मोसेरी ने 31 दिसंबर को अपनी एक पोस्ट में स्वीकार किया कि बदलती तकनीक इंस्टाग्राम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि 2026 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतनी एडवांस हो जाएगी कि किसी भी असली कंटेंट की नकल करना बेहद आसान होगा।
आज Google के Nano Banana और OpenAI के Sora जैसे शक्तिशाली टूल्स की मदद से कोई भी आम व्यक्ति बड़ी आसानी से असली दिखने वाले वीडियो और तस्वीरें बना सकता है। मोसेरी का मानना है कि यदि इंस्टाग्राम ने इन AI टूल्स से निपटने के लिए खुद को नहीं ढाला, तो आने वाले समय में यूजर्स के लिए प्लेटफॉर्म पर भरोसा करना मुश्किल हो जाएगा, जो कंपनी के लिए सबसे बड़ा रिस्क है।
अब आंखों देखा भी सच नहीं
इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है कि वह दौर खत्म हो रहा है जब फोटो या वीडियो को किसी असली पल का पक्का सबूत माना जाता था। अब AI के कारण हम जो कुछ भी स्क्रीन पर देखेंगे, उस पर संदेह करना जरूरी हो जाएगा। मोसेरी ने आगाह किया कि शुरुआत में तो हम AI कंटेंट को पहचान लेंगे, लेकिन भविष्य में यह अंतर करना लगभग असंभव होगा।
इस समस्या के समाधान के रूप में वह डिजिटल सिग्नेचर की तकनीक की ओर इशारा करते हैं। आने वाले समय में कैमरा कंपनियां अपनी तस्वीरों में एक खास ‘सिक्योर कोड’ डाल सकती हैं, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि फोटो वाकई कैमरे से खींची गई है या किसी AI टूल द्वारा बनाई गई है।
अब बनावटी खूबसूरती नहीं, ‘धुंधली और हिलती’ हुई फोटो हो रही हैं हिट
मोसेरी के अनुसार, इंस्टाग्राम पर अब वो दौर खत्म हो चुका है जहाँ लोग केवल ‘परफेक्ट’ और सजी-धजी तस्वीरें देखना पसंद करते थे। अब यूजर्स का व्यवहार बदल गया है; वे बनावटी कंटेंट से बोर होने लगे हैं और ‘असली’ दिखने वाले पलों की तलाश में हैं। इसे उन्होंने “रॉ एस्थेटिक” (Raw Aesthetic) का नाम दिया है।
आज लोग अपनी फीड के बजाय डायरेक्ट मैसेज (DM) में अपने बिना एडिट किए हुए पल—जैसे धुंधली तस्वीरें या साधारण कैंडिड वीडियो—शेयर करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। मोसेरी का मानना है कि AI के दौर में यह ‘अपूर्णता’ ही असलियत का सबूत बनेगी। हालांकि, इंस्टाग्राम भविष्य में AI कंटेंट को पूरी तरह बैन करेगा या नहीं, इस पर अभी सस्पेंस बरकरार है, लेकिन कंपनी का पूरा फोकस अब असली (Authentic) कंटेंट को बढ़ावा देने पर है।
AI की भीड़ में आपकी ‘असली पहचान’ ही होगी सबसे बड़ी ताकत
एडम मोसेरी का स्पष्ट मानना है कि जैसे-जैसे AI कंटेंट बढ़ेगा, ‘ओरिजिनल कंटेंट’ की कीमत और ज्यादा बढ़ जाएगी। अब मुकाबला इस बात का नहीं है कि कौन बेहतर एडिटिंग कर सकता है, बल्कि यह है कि कौन ऐसा कुछ बना सकता है जिसे AI कॉपी न कर सके। इस चुनौती से निपटने के लिए इंस्टाग्राम तीन बड़े कदम उठाने की तैयारी में है:
- AI लेबलिंग: AI से बने हर कंटेंट पर स्पष्ट ‘लेबल’ लगाना ताकि यूजर्स को पता रहे कि क्या असली है और क्या मशीन द्वारा बनाया गया।
- कंटेंट वेरिफिकेशन: असली और मानवीय कंटेंट को प्रमाणित (Verify) करने के लिए नए तकनीकी टूल्स लाना।
- ओरिजिनल को प्राथमिकता: प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम को इस तरह बदलना कि वह AI कंटेंट की भीड़ के बजाय ओरिजिनल क्रिएटर्स के काम को ज्यादा प्रमोट करे।









