
ईरान और इज़राइल के बीच छिड़े तनाव ने भारत के ईंधन बाजार को हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहराने से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो गई, जिसके जवाब में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंप डीलर्स के लिए क्रेडिट सुविधा तत्काल बंद कर दी। यह फैसला देश के 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर लागू हो चुका है, जहां अब प्री-पेमेंट के बिना ईंधन नहीं मिलेगा।
क्रेडिट खत्म, पहले पेमेंट बाद सप्लाई
पहले इंडियन ऑयल (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) डीलर्स को शॉर्ट-टर्म क्रेडिट देते थे। IOCL ने सोमवार से 5-दिन की रिवॉल्विंग क्रेडिट पॉलिसी निलंबित कर दी, जबकि HPCL और BPCL ने पिछले सप्ताह से एडवांस पेमेंट अनिवार्य कर दिया। लाइवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम पश्चिम एशिया संकट के कारण उठाया गया, जहां भारत का 40% तेल आयात रूट प्रभावित है। थोक खरीदारों, ट्रांसपोर्टरों और उद्योगों पर भी यही नियम लागू है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन पंप मालिकों ने बदलाव की पुष्टि की है। एजेंसियों का अनुमान है कि FY27 में भारत की तेल खपत 26 करोड़ टन तक पहुंचेगी, जो दबाव को और बढ़ाएगा।
पेट्रोल पंप मालिकों की मुसीबतें बढ़ीं
छोटे-मध्यम डीलर्स के लिए यह बड़ा झटका है। कार्यशील पूंजी जुटाना मुश्किल हो गया, क्योंकि ईंधन स्टॉक बनाए रखने के लिए अब लाखों रुपये पहले चुकाने पड़ेंगे। देरी से सप्लाई रुक सकती है, जिससे बिक्री घाटा होगा। भारतीय पेट्रोलियम डीलर्स संगठन (30,000+ पंपों का प्रतिनिधित्व) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय लोध ने कहा, “तीनों कंपनियां क्रेडिट लाइन बंद कर चुकी हैं। पहले कुछ दिनों की मोहलत मिलती थी, अब नहीं।”
एलपीजी सप्लाई पर पहले से संकट है, जो अब पेट्रोल-डीजल तक फैल रहा। डीलर्स आर्थिक दबाव में हैं, लेकिन संगठन ने अभी विरोध नहीं दर्ज किया।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
तात्कालिक रूप से पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर हैं, लेकिन सप्लाई चेन बाधा से पंपों पर ईंधन की कमी हो सकती है। लंबे समय में वैश्विक तेल संकट से कीमतें चढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खपतकर्ता है। ग्रामीण क्षेत्रों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में महंगाई का डर है।
भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं
तेल कंपनियां जोखिम कम करने के लिए सतर्क हैं, लेकिन डीलर्स राहत की मांग कर रहे। सरकार को हस्तक्षेप की जरूरत, जैसे वैकल्पिक फंडिंग या स्टॉक बफर। अगले वित्त वर्ष में खपत बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो सकती। ईरान को भारत के 345 करोड़ के निर्यात अटके हैं, जो व्यापक प्रभाव दर्शाता।









