
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 27 मार्च को संसद में मेट्रो शहरों के ट्रैफिक जाम को राष्ट्रीय आपदा करार देते हुए केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेताया कि दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहर “चलते-फिरते पार्किंग लॉट” बन चुके हैं, जहां लोग सालाना 100-168 घंटे जाम में फंसे बिताते हैं।
ट्रैफिक की भयावह तस्वीर
चड्ढा ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि दिल्लीवासी हर साल 104 घंटे, बेंगलुरु के यात्री 168 घंटे (7 दिन), मुंबई 126 घंटे, कोलकाता 110 घंटे, पुणे 152 घंटे और चेन्नई 100 घंटे ट्रैफिक में खो देते हैं। दिल्ली की रिंग रोड, आउला कुआं, NH-8; बेंगलुरु का सिल्क बोर्ड; मुंबई की अंधेरी-फोर्ट रूट जैसी मुख्य सड़कें रोजाना जाम की भेंट चढ़ती हैं। सोशल मीडिया पर कार में जूम मीटिंग वाली वायरल क्लिप्स समय की बर्बादी का प्रतीक बन गई हैं।
आर्थिक-पर्यावरणीय नुकसान
यह महज असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर संकट है। चड्ढा के अनुसार, ट्रैफिक से उत्पादकता घटी, ईंधन बर्बाद हुआ, वायु प्रदूषण बढ़ा और जीवन गुणवत्ता बिगड़ी। पिछले साल 2.5 करोड़ नई कारें रजिस्टर हुईं, जिससे भविष्य में जाम और भयानक होगा। मेट्रो शहरों की आबादी वृद्धि के साथ सड़कें बोझ तले दब रही हैं।
‘नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन’ का प्रस्ताव
समाधान के लिए चड्ढा ने “नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन” की मांग की, जिसमें शामिल होंगे:
- मेट्रो विस्तार जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना।
- स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम।
- वैज्ञानिक पार्किंग नीति।
उन्होंने कहा कि फोकस्ड प्लान से आर्थिक नुकसान रोका जा सकेगा। भारत का मेट्रो नेटवर्क 1000 किमी पार कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा है, NCR में नमो भारत RRTS (मेरठ सहित) सक्रिय है, लेकिन व्यापक मिशन जरूरी।
उत्तर प्रदेश और मेरठ कनेक्शन
मेरठ जैसे शहरों में दिल्ली से RRTS कनेक्टिविटी पहले से है, यूपी में 850 किमी मेट्रो प्लान 2047 तक तैयार। छोटे बिजनेस और जर्नलिस्ट्स जैसे यूजर्स के लिए यह राहत बनेगा। चड्ढा की मांग सरकार के गतिशक्ति मिशन से जुड़ सकती है। कुल मिलाकर, ट्रैफिक जाम मेट्रो शहरों की विकास यात्रा में सबसे बड़ा रोड़ा है। समय रहते चड्ढा का प्रस्ताव लागू हुआ तो करोड़ों घंटे बच सकेंगे। संसद में चर्चा तेज, सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार।









