Tags

टैक्स कलेक्शन में भारत ने गाड़े झंडे! ग्लोबल रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, दुनिया के दिग्गज देश भी पीछे

भारत का संयुक्त टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात 19.6% पहुंचा! केंद्र-राज्य मिलाकर ये हांगकांग, मलेशिया से बेहतर, लेकिन जर्मनी-अमेरिका से पीछे। नया आयकर कानून 2025 अनौपचारिक सेक्टर को फॉर्मल करेगा। युवा भारत से उम्मीदें बुलंद – टैक्स कलेक्शन में नई ऊंचाइयां!

By Pinki Negi

टैक्स कलेक्शन में भारत ने गाड़े झंडे! ग्लोबल रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, दुनिया के दिग्गज देश भी पीछे

भारत के टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात में आई शानदार बढ़ोतरी से हर कोई हैरान है। सोचिए, केंद्र और राज्यों को मिलाकर ये अनुपात अब 19.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ये वो स्तर है जो कई बड़े उभरते बाजारों को पीछे छोड़ देता है। लेकिन सवाल ये है कि ये आंकड़ा क्या बताता है? आइए, इसकी गहराई में उतरते हैं और समझते हैं कि ये भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत है।

टैक्स-टू-जीडीपी

सबसे पहले ये समझ लीजिए कि टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात आखिर है क्या। ये बस इतना बताता है कि देश की कुल अर्थव्यवस्था, यानी जीडीपी के मुकाबले सरकार कितना टैक्स इकट्ठा कर पा रही है। मान लीजिए आपकी सालाना कमाई 1 लाख है और आप 20 हजार टैक्स देते हैं, तो आपका रेशियो 20 प्रतिशत होगा। भारत का संयुक्त अनुपात 19.6 प्रतिशत हो गया है, जो हांगकांग, मलेशिया या इंडोनेशिया जैसे देशों से बेहतर है।

लेकिन जर्मनी के 38 प्रतिशत या अमेरिका के 25.6 प्रतिशत से अभी दूर हैं। केंद्र का हिस्सा 11.7 प्रतिशत पर स्थिर है, जो राज्यों की मेहनत को हाइलाइट करता है। ये आंकड़े बताते हैं कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं, बस रफ्तार और तेज करने की जरूरत है।

अनुकूल हालात से उम्मीदें बुलंद

भारत की जनसंख्या ज्यादातर युवा है और अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में टैक्स कलेक्शन बढ़ाने की ताकत हममें कूट-कूटकर भरी है। बैंक ऑफ बड़ौदा की ताजा रिपोर्ट कहती है कि ये एक सुनहरा मौका है। सरकार टैक्स सिस्टम को सरल बना रही है, डिजिटल टूल्स से इसे पारदर्शी कर रही है। कल्पना कीजिए, पहले टैक्स भरना कितना जटिल था, अब ऐप पर क्लिक करके हो जाता है।

आयकर कानून 2025 और कॉर्पोरेट टैक्स में बदलाव इसी दिशा में कदम हैं। इनसे अनौपचारिक सेक्टर को फॉर्मल इकोनॉमी में लाने का लक्ष्य है। नतीजा? ज्यादा लोग टैक्स नेट में आएंगे, बिना बोझ बढ़ाए।

पुरानी कमजोरियां अब ताकत

पिछले दशकों को देखें तो कहानी दिलचस्प है। 1990 के दशक में टैक्स बेस छोटा था, इसलिए कलेक्शन में उतार-चढ़ाव रहता था। लेकिन 2014 के बाद चीजें बदलीं। नाममात्र जीडीपी और टैक्स रेवेन्यू के बीच कनेक्शन मजबूत हो गया। खासकर 2023 के बाद ये ट्रेंड और साफ दिखा। अभी टैक्स इलास्टिसिटी 1.1 है, जो लंबे समय के औसत से ऊपर है। मतलब, जीडीपी थोड़ी बढ़ेगी तो टैक्स भी वैसा ही उछाल लेगा। आयकर का कलेक्शन प्रति व्यक्ति आय से सीधा जुड़ा है, जबकि कॉर्पोरेट टैक्स कंपनियों के मुनाफे पर निर्भर। दोनों ही इंडिकेटर्स मजबूत हैं, जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत है।

नया आयकर कानून

सबसे रोमांचक हिस्सा तो ये है कि 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा। ये कानून अनौपचारिक इकोनॉमी पर फोकस करेगा। छोटे व्यापारी, फ्रीलांसर जो कैश में ट्रांजेक्शन करते हैं, उन्हें आसानी से सिस्टम में लाएगा। दक्षता बढ़ेगी, टैक्स बेस फैलेगा। रिपोर्ट मानती है कि इससे टैक्स-टू-जीडीपी रेशियो और ऊपर जाएगा। सोचिए, अगर हम विकसित देशों के क्लोज पहुंचें, तो इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ, एजुकेशन पर कितना ज्यादा खर्च हो सकेगा। ये सुधार सिर्फ नंबर्स नहीं, आम आदमी की जिंदगी सुधारने वाले हैं।

आगे की राह

फिर भी रास्ता आसान नहीं। विकसित देशों से पीछे रहने का मतलब है हमें और मेहनत करनी होगी। टैक्स चोरी रोकनी है, डिजिटलीकरण को गांव तक ले जाना है। लेकिन भारत की डेमोग्राफी और ग्रोथ स्टोरी हमें फायदा देगी। अगर सुधार जारी रहे, तो अगले कुछ सालों में 22-23 प्रतिशत तक पहुंचना मुश्किल नहीं।

ये न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि सामाजिक कल्याण योजनाओं को पंख भी लगाएगा। कुल मिलाकर, ये आंकड़े उम्मीद जगाते हैं – भारत टैक्स कलेक्शन में ग्लोबल प्लेयर बनने को तैयार है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें