
वैश्विक राजनीति के गलियारों में भारत ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि उसकी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) किसी भी महाशक्ति के दावों से ऊपर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में किए गए उस दावे को भारत ने आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गए हैं।
विदेश मंत्रालय (MEA) के इस रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि नई दिल्ली अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वाशिंगटन या मॉस्को के दबाव में नहीं, बल्कि अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों के आधार पर फैसले लेती है।
ट्रंप के दावे पर भारत की दोटूक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रेस वार्ता में कहा, “1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है और यह फैसला पूरी तरह से बाजार की स्थितियों और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाता है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने भी इस स्टैंड का समर्थन करते हुए कहा है कि रूस और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग एक ‘सदाबहार साझेदारी’ है जो दोनों देशों के आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य है।
विदेश मंत्रालय ने कहा—हमारे लिए देश का हित सबसे पहले
वेनेजुएला से तेल खरीद पर भारत का रुख संतुलित रहा है। प्रवक्ता ने बताया कि भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा संबंध दशकों पुराने हैं। 2023-24 में खरीद शुरू करने के बाद, प्रतिबंधों के कारण इसे फिलहाल रोकना पड़ा है। यह भारत की उस रणनीति को दर्शाता है जहाँ वह वैश्विक नियमों का सम्मान भी करता है, लेकिन अपने विकल्पों को कभी बंद नहीं करता।
अब अमेरिका को सामान बेचना होगा सस्ता, बढ़ेंगे देश में रोजगार
जहाँ एक ओर ऊर्जा पर मतभेद दिखे, वहीं व्यापार के मोर्चे पर भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक प्रगति हुई है।
- 18% टैरिफ कटौती: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की वार्ता के बाद अमेरिकी बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर लगने वाले टैक्स में 18% की भारी कमी की गई है।
- रोजगार के अवसर: इस समझौते से भारत के कपड़ा, चमड़ा और रत्न जैसे श्रम-प्रधान (Labour-Intensive) उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
ईरान की कैद से छूटे 8 भारतीय नाविक, जल्द लौटेंगे अपने घर।
भारत की सॉफ्ट पावर का एक और उदाहरण ईरान में देखने को मिला। ईरान में बंदी बनाए गए 16 भारतीय नाविकों में से 8 की रिहाई भारत की सफल कूटनीति का परिणाम है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि शेष 8 नाविकों की सुरक्षा और वापसी के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बातचीत जारी है।









