
सर्दियों के मौसम में अक्सर हम दिल्ली की कड़ाके की ठंड या शिमला और श्रीनगर की बर्फबारी की चर्चा करते हैं। जब दिल्ली का पारा 5 डिग्री तक गिरता है या पहाड़ों में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, तो हमें लगता है कि यही सबसे ज्यादा ठंड है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तर भारत के ये मैदानी इलाके और मशहूर हिल स्टेशन देश के सबसे ठंडे स्थान नहीं हैं। भारत में एक ऐसी जगह भी है जहाँ की ठंड इन सबको पीछे छोड़ देती है। आइए जानते हैं आखिर कहाँ पड़ती है भारत में सबसे भीषण ठंड।
भारत का सबसे ठंडा इलाका जहाँ जम जाता है सब कुछ
लद्दाख में स्थित द्रास भारत की सबसे ठंडी जगह मानी जाती है, जो कारगिल से लगभग 64 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ की सर्दी इतनी भयानक होती है कि तापमान उस स्तर से भी नीचे गिर जाता है जिस पर हम घरों में डीप फ्रीजर का इस्तेमाल करते हैं। अपनी इसी जमा देने वाली ठंड की वजह से द्रास को दुनिया के दूसरे सबसे ठंडे बसे हुए स्थान के रूप में भी जाना जाता है।
जब द्रास में तापमान पहुँच जाता है -40°C
द्रास में सर्दियों का मौसम बेहद खतरनाक होता है, जहाँ पारा अक्सर -20°C से -25°C के बीच बना रहता है। कई बार तो यहाँ इतनी भीषण ठंड पड़ती है कि तापमान गिरकर -40°C तक पहुँच जाता है। यहाँ स्थिति ऐसी हो जाती है कि बाहर निकलने पर लोगों की दाढ़ी और बालों पर भी बर्फ की परत जम जाती है। यह जगह इंसान के रहने के लिहाज से दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण ठंडे इलाकों में से एक है।
बर्फ की सफेद चादर में ढका द्रास
सोशल मीडिया पर कनिष्क गुप्ता नामक एक ट्रैवल इंफ्लुएंसर ने द्रास का एक ताजा वीडियो साझा किया है, जिसमें पूरा गाँव बर्फ से ढका हुआ किसी जन्नत जैसा दिख रहा है। हालांकि, उन्होंने यहाँ आने वाले पर्यटकों को एक सख्त चेतावनी भी दी है। कनिष्क के अनुसार, यहाँ का मौसम इतना अधिक ठंडा है कि अगर आप गीले कपड़े बाहर रखें, तो वे देखते ही देखते पत्थर की तरह जम जाते हैं। यह वीडियो यहाँ की बेहद चुनौतीपूर्ण स्थितियों को बयां करता है।
भीषण ठंड के बीच द्रास की अनूठी संस्कृति और आबादी
हड्डियाँ जमा देने वाली ठंड और बेहद खराब मौसम के बावजूद, द्रास का जनजीवन थमा नहीं है। लगभग 22 हजार की आबादी वाला यह क्षेत्र पूरी तरह आबाद है। यहाँ मुख्य रूप से बाल्टिक और नार्डिक जनजातियों के लोग रहते हैं, जो सदियों से इस कठिन वातावरण में रहने के अभ्यस्त हो चुके हैं। इन समुदायों की मौजूदगी द्रास को न केवल भौगोलिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बेहद खास बनाती है।
द्रास की यात्रा कैसे पहुँचें और कब है चुनौतियां
द्रास पहुँचने के लिए मुख्य रास्ता नेशनल हाईवे-1 है, जो इसे कारगिल और श्रीनगर से जोड़ता है। हालाँकि, सर्दियों के महीनों में भारी बर्फबारी की वजह से यह सड़क मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है। यदि आप यहाँ की सैर करना चाहते हैं, तो सबसे अच्छा तरीका श्रीनगर या लेह तक हवाई जहाज से जाना और फिर वहाँ से टैक्सी लेना है। रेल मार्ग की बात करें तो सबसे पास का रेलवे स्टेशन जम्मू तवी है, जो द्रास से लगभग 386 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
ठहरने के विकल्प और शानदार घूमने की जगहें
द्रास भारत का सबसे ठंडा इलाका होने के बावजूद पर्यटकों के लिए ठहरने की अच्छी सुविधाएं प्रदान करता है। बहुत से यात्री कारगिल में रुककर एक दिन के लिए द्रास की सैर पर आते हैं। यहाँ की सबसे खास बात यह है कि गर्मियों और मानसून में भी पारा 25°C से ऊपर नहीं जाता, जो इसे गर्मी से बचने का बेहतरीन विकल्प बनाता है। घूमने के शौकीन लोग यहाँ जोजिला पास, द्रास वॉर मेमोरियल, द्रौपदी कुंड और मुश्को वैली जैसी खूबसूरत जगहों का आनंद ले सकते हैं। साथ ही, कारगिल युद्ध की यादों को करीब से देखने के लिए ब्रिगेड वॉर गैलरी जाना एक यादगार अनुभव हो सकता है।









