
आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करते समय अगर शेयरों, फ्रीलांसिंग या विदेशी आय जैसे छोटे सोर्स की जानकारी छुपा ली जाए, तो यह गलती आजकल बहुत भारी पड़ सकती है। आयकर विभाग के पास अब AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के जरिए बैंक अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड, शेयर ट्रांजैक्शन, TDS, घर का किराया और इक्विटी-डिविडेंड तक की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होती है।
ऐसे में जानबूझकर आय कम दिखाना या फर्जी डिडक्शन दिखाना आयकर अधिनियम की धारा 270A के तहत गंभीर अपराध माना जा रहा है, जिस पर बकाया टैक्स का 200% तक जुर्माना और आगे जेल तक हो सकती है।
आखिर कौन‑सी “छोटी” गलतियां भारी पड़ रही हैं?
कई टैक्सपेयर्स इन बातों को छोटा समझ बैठते हैं, जबकि विभाग इन्हें “मिसरिपोर्टिंग” या टैक्स चोरी की कैटेगरी में फंसाने के लिए तैयार है।
- विदेशी शेयरों से मिलने वाला डिविडेंड, रेमिटेंस या फ्रीलांसिंग आय जैसी अतिरिक्त कमाई को आयकर रिटर्न में अनदेखा करना।
- बिना रसीद या फर्जी दस्तावेज (जैसे घर का किराया, नकली 80C निवेश, झूठे दान) दिखाकर डिडक्शन क्लेम करना या लिमिट से ज्यादा कटौती दाखिल करना।
- आईटीआर में भरी गई आय और बैंक-TDS-AIS डेटा के बीच खुला अंतर छोड़ देना, जैसे फॉर्म 26AS में जमा इंटरेस्ट या शेयर ट्रांजैक्शन दिख रहा हो, लेकिन रिटर्न में वही आय न हो।
- ऑफिस के खर्च के नाम पर निजी यात्रा, परिवार की खरीदारी या अन्य पर्सनल बिल दिखाकर बिजनेस एक्सपेंसेज बढ़ाना ताकि टैक्स कम बने।
200% जुर्माना और जेल तक का खतरा कैसे?
धारा 270A के तहत दो स्थितियां बनती हैं: एक अनजाने में आय कम दिखाने की (Under‑reporting) और दूसरी जानबूझकर गलत जानकारी देने या फर्जी डॉक्यूमेंट के साथ आय छिपाने की (Misreporting)।
- अगर गलती से आय कम दिखाई जाती है, तो बकाया टैक्स पर 50% तक जुर्माना लग सकता है।
- लेकिन जानबूझकर झूठी रेंट रसीद, फर्जी निवेश, बिना प्रूफ डाट या क्रिप्टो-फ्रीलांस इनकम छुपाई गई तो यह मिसरिपोर्टिंग माना जाता है और जुर्माना 200% तक बढ़ जाता है, यानी अगर टैक्स 50,000 बनता है, तो जुर्माना 1,00,000 तक हो सकता है।
- गंभीर टैक्स चोरी के मामलों में धारा 276C के तहत कानूनी कार्रवाई और सात साल तक की सज़ा का खतरा भी है।
आयकर विभाग की “पैनी नज़र” कैसे काम कर रही?
अब विभाग रिटर्न पर सीधे भरोसा नहीं कर रहा; AIS, 26AS, TDS/TCS, GST डेटा और बैंक स्टेटमेंट आदि को AI-सिस्टम से जोड़कर ऑटोमैटिक तरीके से मिसमैच चुनाव कर रहा है। जैसे ही रिटर्न और AIS में आय या ट्रांजैक्शन का डिफरेंस दिखता है, वहां नोटिस या स्क्रूटनी का नंबर आ जाता है।
गलती भी हो गई हो तो क्या करें?
टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अगर आपसे गलती हो गई है, तो इसे भी “फर्जी दावा” बनने से पहले ठीक कर लें। स्रोतों के अनुसार, आप 24 महीने की सीमा के भीतर Updated Return दाखिल करके आय, डिडक्शन या टैक्स गलतियां सुधार सकते हैं, जिससे भारी जुर्माने से बचने की संभावना बढ़ जाती है।
आईटीआर भरने से पहले हमेशा AIS और 26AS को खोलकर देखें, अपने हर आय सोर्स का रिकॉर्ड रखें और बिना प्रूफ वाले दावे या “गारंटीड रिफंड” वाले एजेंटों पर भरोसा न करें- वरना छोटी सी गलती आपको 200% जुर्माने और विभागीय कार्रवाई का शिकार बना सकती है।









