
आज के डिजिटल दौर में आयकर विभाग की नजर हर वित्तीय गतिविधि पर टिकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स से लैस सिस्टम बैंक खाते से लेकर शेयर बाजार तक सब ट्रैक करता है, जिससे अनजाने में की गई गलतियां भारी जुर्माने का सबब बन रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में हर ट्रांजेक्शन दर्ज होता है, और मिसमैच पाए जाने पर नोटिस तुरंत भेजा जाता है।
नकदी जमा की सख्ती
सबसे पहली गलती है बैंक सेविंग अकाउंट में एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये से ज्यादा नकदी जमा करना। बैंक इसे सीधे आयकर विभाग को रिपोर्ट करते हैं, क्योंकि PAN लिंक्ड सिस्टम से सब एकत्रित हो जाता है। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में भी 10 लाख से अधिक कैश निवेश रेड फ्लैग है। कई लोग अलग-अलग बैंकों में छोटी FD बनाते हैं, लेकिन डेटा एनालिटिक्स सब जोड़ देता है। करेंट अकाउंट में 50 लाख से ज्यादा कैश क्रेडिट/डेबिट पर विभाग सक्रिय हो जाता है।
क्रेडिट कार्ड और खरीदारी पर नजर
क्रेडिट कार्ड बिल का 1 लाख रुपये से अधिक कैश भुगतान तत्काल संदिग्ध माना जाता है। सालाना 10 लाख से ज्यादा भुगतान (चेक/ऑनलाइन भी) पर स्रोत पूछा जाता है। इसी तरह, 30 लाख से ऊपर की प्रॉपर्टी डील रजिस्ट्रार द्वारा रिपोर्ट होती है। अगर वैल्यू घोषित आय से मेल न खाए, तो नोटिस सुनिश्चित। ज्वैलरी या लग्जरी कारों की बड़ी कैश खरीदारी भी AIS में फंस जाती है।
निवेश और विदेशी लेनदेन
शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या बॉन्ड में 10 लाख से अधिक कैश निवेश की जानकारी स्टॉक एक्सचेंज भेजते हैं। विदेशी मुद्रा खरीद 10 लाख से ज्यादा होने पर FEMA नियमों के तहत रिपोर्ट अनिवार्य है। ये ट्रांजेक्शन काले धन पर लगाम के लिए हैं। AI पुराने ITR से तुलना कर असंगतियां पकड़ता है, जिससे पिछले चार सालों में 11,000 करोड़ की रिकवरी हुई।
बचाव के उपाय
इनसे बचने का तरीका सरल है- सभी बड़े लेनदेन चेक, UPI या नेट बैंकिंग से करें। ITR समय पर भरें, AIS/26AS चेक करें और आय-खर्च मैच रखें। बजट 2026 में छोटी गलतियों पर जेल हटी, लेकिन 100-200% पेनल्टी बरकरार है। नोटिस आने पर रेक्टिफिकेशन या अपील करें। सतर्कता से वित्तीय छवि मजबूत रखें।









