
इस वित्तीय वर्ष के शुरू होते ही मकान किराया लेकर रहने वाले करदाताओं और मकान मालिकों के लिए नए आयकर नियम काफी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। आज से लागू हो रहे इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत अब वही किरायेदार जो हर महीने 50 हजार रुपये से ज़्यादा किराया देता है, खुद को टीडीएस (TDS) काटने का ज़िम्मेदार माना जाएगा। दरअसल, इसके पीछे सरकार का मकसद यह है कि किराये की आमदनी पर पारदर्शिता बढ़े और जो मकान मालिक बिना टैक्स चुकाए अपनी आय छुपा रहे थे, उन्हें भी व्यवस्था में लाया जा सके।
TDS न काटने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना
नए नियम के तहत सेक्शन 194‑IB के अंतर्गत अगर आप (किरायेदार) 50,000 रुपये से ऊपर महीने का किराया देते हैं, तो आपको 2% TDS काटकर आयकर विभाग में जमा करना अनिवार्य है। इस नियम का उल्लंघन करने पर सिर्फ टैक्स वसूली तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि आप पर ब्याज, लेट फीस और बड़ी–बड़ी रकम का जुर्माना भी लग सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर आप हर महीने 60,000 रुपये किराया दे रहे हैं, तो एक साल में कुल 7.2 लाख रुपये बनते हैं, जिस पर आपको 14,400 रुपये का TDS काटकर मार्च महीने के किराये में से या आखिरी महीने के किराये में से जमा करना होगा। इस रकम को 30 अप्रैल तक जमा करना भी नियम है, नहीं तो आपके ऊपर सेक्शन 271H के तहत 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
फॉर्म 26QC और फॉर्म 16C पर क्या रखना है ध्यान?
TDS काटने के बाद किरायेदार के लिए अगला कदम है ऑनलाइन फॉर्म 26QC भरकर इनकम टैक्स पोर्टल पर जमा करना। इस फॉर्म के ज़रिए मकान मालिक की आय, उस पर काटी गई TDS और आपकी रिटेंशन डिटेल सरकार को जानकारी के तौर पर मिलती है। वहीं, मकान मालिक को किरायेदार को फॉर्म 16C जारी करना होता है, जिससे वह अपने TAN व PAN के आधार पर यह दिखा सके कि उस पर कितना TDS काटा गया। इसके बाद यह पूरी जानकारी मकान मालिक के फॉर्म 26AS में दिखने लगती है, जहाँ से वह इस TDS को अपने टैक्स में एडजस्ट कर के सेटल कर सकता है।
कहां‑कहां लग सकती है सज़ा?
नियम तोड़ने पर आयकर विभाग के पास कई तरह के पेनल्टी के यंत्र हैं। अगर आपने TDS ही नहीं काटा, तो आप पर 1% मासिक ब्याज लग सकता है। अगर TDS काट लिया है लेकिन उसे वक्त पर जमा नहीं किया, तो यह दर बढ़कर 1.5% मासिक हो जाती है। साथ ही, अगर आप फॉर्म 26QC देर से फाइल करते हैं, तो आपको दिनभर 200 रुपये की लेट फीस भी देनी पड़ सकती है। अगर आपने TDS रिटर्न ही नहीं दिया, तो सेक्शन 271H के तहत 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, जो किसी भी करदाता के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है।
नियम किस पर लागू होता है?
यह नया प्रावधान व्यक्तिगत करदाता (Individual) और हिन्दू अवैधसंस्थित समुदाय (HUF) पर लागू है, जो सेक्शन 44AB के तहत टैक्स ऑडिट से छूटे हुए होते हैं, यानी वे व्यक्ति या परिवार जो छोटे या मध्यम व्यवसाय या पेशेवर आय वाले हैं और उन पर अलग से ऑडिट नहीं लगता। इसलिए यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं और आपका महीने का किराया 50,000 रुपये से ऊपर है, तो आपको इन नियमों को गंभीरता से लेना होगा, वरना आपकी HRA की सुविधा और आयकर विवरण‑पत्र दोनों पर असर पड़ सकता है।
संक्षेप में, अब किरायेदार बस चाबी लेकर घर नहीं, बल्कि टैक्स रिटेंशन और फॉर्म‑फाइलिंग की ज़िम्मेदारी भी लेकर चलना होगा। जो इन नए नियमों से अनजान रहेंगे या उन्हें नजरअंदाज करेंगे, उन्हें TDS‑ब्याज, लेट फीस और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक रूप से बड़ा घाटा हो सकता है।









