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शराब का ठेका कैसे लें? जानें आवेदन की शर्तें, लाइसेंस फीस और हर महीने होने वाली मोटी कमाई का पूरा गणित

महीने की लाखों की कमाई और साल का करोड़ों का टर्नओवर! अगर आप भी शराब का ठेका खोलने का सपना देख रहे हैं, तो आवेदन से लेकर मुनाफे तक की पूरी जानकारी यहाँ मिलेगी। जानें लाइसेंस पाने की शर्तें और वो खास गणित जो इस बिजनेस को बनाता है सबसे ज्यादा मुनाफे वाला सौदा।

By Pinki Negi

शराब का ठेका कैसे लें? जानें आवेदन की शर्तें, लाइसेंस फीस और हर महीने होने वाली मोटी कमाई का पूरा गणित
शराब का ठेका

भारत में शराब न केवल उपभोग की वस्तु है, बल्कि यह सरकार की अर्थव्यवस्था का एक मुख्य स्तंभ भी बन गई है। आबकारी शुल्क (Excise Duty) के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें हर साल करोड़ों रुपये का भारी-भरकम राजस्व जुटाती हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश में शराब पीने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जहाँ औसतन प्रति व्यक्ति खपत 5.7 लीटर तक पहुँच गई है। यह राजस्व सरकारों के खजाने को भरने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए फंड जुटाया जाता है।

कैसे मिलता है शराब का ठेका और कितनी आती है शुरुआती लागत

मुनाफे के लिहाज से देखा जाए तो शराब का कारोबार किसी सोने की खान से कम नहीं है, यही वजह है कि लोग शराब का ठेका लेने में खासी दिलचस्पी दिखाते हैं। हालांकि, लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा कमाई देने वाले इस बिजनेस को शुरू करना इतना आसान भी नहीं है। सिर्फ मोटा निवेश ही काफी नहीं, बल्कि आपको सरकार की कड़ी शर्तों और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि शराब की दुकान खोलने के लिए लाइसेंस कैसे मिलता है, कितनी फीस चुकानी होती है और इस मुनाफे वाले धंधे में उतरने के लिए सरकार की कौन सी शर्तें माननी अनिवार्य हैं, तो इसकी पूरी जानकारी यहाँ दी गई है।

कौन खोल सकता है शराब का ठेका?

शराब का ठेका लेने के लिए सरकार ने बेहद सख्त मापदंड तय किए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। सबसे पहले, आवेदक का भारतीय नागरिक होना और उसकी उम्र कम से कम 21 वर्ष (दिल्ली में 25 वर्ष) होना जरूरी है। इसके साथ ही, व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और उसका चरित्र पूरी तरह साफ होना चाहिए।

व्यापार के लिए अपनी जमीन होना एक प्राथमिक शर्त है, लेकिन ध्यान रहे कि सरकारी कर्मचारी, बैंक लोन डिफॉल्टर, वकील और डॉक्टर जैसे पेशेवर इस कारोबार का हिस्सा नहीं बन सकते। इन कड़े नियमों का उद्देश्य इस संवेदनशील व्यापार को जिम्मेदार हाथों में रखना है।

शराब ठेके के लिए आवेदन करने का तरीका और जरूरी दस्तावेजों की पूरी चेकलिस्ट

शराब का ठेका हासिल करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल होती है, जिसे आबकारी विभाग (Excise Department) की आधिकारिक वेबसाइट पर E-Lottery या टेंडर के माध्यम से पूरा किया जाता है। आवेदन करने के लिए आपके पास आधार, पैन कार्ड और पिछले कुछ वर्षों का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) होना अनिवार्य है। इसके अलावा, आपके पास जीएसटी (GST) रजिस्ट्रेशन, बैंक स्टेटमेंट, निवास प्रमाण और पुलिस द्वारा सत्यापित चरित्र प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होने चाहिए। इन सभी कागजातों की बारीकी से जांच के बाद ही आपको इस प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलता है।

कैसे मिलता है शराब की दुकान का लाइसेंस

शराब का ठेका हासिल करना किसी साधारण व्यापारिक प्रक्रिया जैसा नहीं है, जहाँ केवल पैसा जमा करने से काम चल जाए। इसके लिए सरकार की बेहद सख्त और पारदर्शी ई-लॉटरी (E-Lottery) या नीलामी (Auction) प्रक्रिया का हिस्सा बनना पड़ता है। आबकारी विभाग हर साल दुकानों के लाइसेंस के लिए आवेदन आमंत्रित करता है, जिसके लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन अप्लाई करना होता है। कुछ राज्यों में सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को लाइसेंस दिया जाता है, तो कुछ में भाग्य का फैसला कंप्यूटर द्वारा निकाली गई लॉटरी से होता है। यह जटिल प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि दुकानों का आवंटन निष्पक्ष और नियमानुसार हो।

शराब का ठेका खोलने में कितनी आती है लागत और लाइसेंस की फीस

शराब का कारोबार शुरू करना एक बड़े निवेश का काम है, जिसके लिए आपके पास 15 से 25 लाख रुपये का बैकअप होना जरूरी है। लाइसेंस की फीस आपकी दुकान की श्रेणी पर निर्भर करती है; उदाहरण के लिए, सिर्फ अंग्रेजी शराब या बीयर शॉप के लिए लगभग 1.5 लाख रुपये फीस लगती है, लेकिन यदि आप ग्राहकों के बैठने के लिए ‘परमिट रूम’ भी खोलना चाहते हैं, तो यह खर्च 5.5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, एक बड़ा हिस्सा दुकान के सेटअप, स्टाफ की सैलरी और स्टॉक खरीदने में खर्च होता है। अलग-अलग राज्यों के नियमों के अनुसार इन शुल्कों में थोड़ा बदलाव भी हो सकता है।

कहां खोल सकते हैं शराब का ठेका?

शराब का ठेका केवल लाइसेंस मिलने से नहीं खुलता, इसके लिए स्थान का चुनाव भी सरकार और सुप्रीम कोर्ट के कड़े नियमों के अधीन होता है। नियमों के अनुसार, आप अस्पताल, स्कूल, धार्मिक स्थल या महिला हॉस्टल के पास दुकान नहीं खोल सकते। साथ ही, नेशनल या स्टेट हाईवे से इसकी दूरी कम से कम 500 मीटर (छोटे शहरों में 220 मीटर) होना अनिवार्य है। इसके अलावा, बिहार, गुजरात और लक्षद्वीप जैसे ‘ड्राई स्टेट्स’ (Dry States) में शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध है, इसलिए वहां चाहकर भी यह कारोबार नहीं किया जा सकता। इन नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द होने के साथ-साथ भारी जुर्माना भी लग सकता है।

नियमों की एक भी चूक और लाइसेंस रद्द

शराब का व्यवसाय पूरी तरह से आबकारी विभाग (Excise Department) के कड़े नियमों और एक्साइज ड्यूटी के अधीन होता है। लाइसेंस मिलते ही सरकार नियमों की एक विस्तृत सूची सौंपती है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त ग्राहकों की उम्र को लेकर होती है। भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों को शराब बेचना एक गंभीर कानूनी अपराध है। यदि किसी दुकान पर इस उम्र से कम का व्यक्ति शराब खरीदते हुए पकड़ा जाता है, तो प्रशासन तुरंत दुकान का लाइसेंस रद्द कर सकता है और भारी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

समय की पाबंदी और MRP का सख्त नियम

शराब की दुकान का लाइसेंस होने का मतलब यह नहीं है कि आप इसे अपनी मर्जी से संचालित कर सकते हैं। दुकान खोलने और बंद करने का समय प्रशासन द्वारा कड़ाई से निर्धारित किया जाता है, जिसका पालन करना अनिवार्य है। इसके अलावा, कीमतों को लेकर भी सरकार का रुख बेहद सख्त रहता है। यदि कोई दुकानदार तय अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से मात्र 1 रुपया भी ज्यादा वसूलता है, तो शिकायत मिलने पर उसका लाइसेंस तुरंत रद्द किया जा सकता है। यह नियम सुनिश्चित करते हैं कि ग्राहकों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी न हो और बाजार में अनुशासन बना रहे।

शराब लाइसेंस रिन्यूअल के नियम और चूक होने पर होने वाले नुकसान

शराब के कारोबार में लाइसेंस मिलना ही काफी नहीं है, बल्कि इसे बरकरार रखना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। ध्यान रहे कि शराब की दुकान का लाइसेंस ‘लाइफटाइम’ नहीं होता; इसे हर साल रिन्यू (Renew) कराना अनिवार्य है। यदि आप समय पर रिन्यूअल फीस जमा करने में चूक जाते हैं या जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी नहीं करते, तो विभाग आपका लाइसेंस रद्द कर सकता है। एक बार लाइसेंस रद्द होने के बाद आपको फिर से लंबी और जटिल आवेदन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे न केवल समय बल्कि व्यवसाय का भी भारी नुकसान हो सकता है।

सालाना करोड़ों का टर्नओवर और लाखों का मुनाफा

भारत में शराब का कारोबार मुनाफे के मामले में सबसे आगे रहने वाले व्यवसायों में से एक है। विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे टियर 1 शहरों में, एक व्यवस्थित शराब की दुकान सालाना 9 करोड़ से 15 करोड़ रुपये तक का बड़ा राजस्व (Revenue) आसानी से जुटा लेती है। सभी खर्चों, टैक्स और लाइसेंस फीस को काटकर एक दुकानदार साल भर में लगभग 75 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) कमा सकता है। यही कारण है कि भारी निवेश और सख्त नियमों के बावजूद, इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा हमेशा चरम पर रहती है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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