
आज हर नौकरीपेशा व्यक्ति अपने पीएफ (प्रॉविडेंट फंड) या ईपीएफ खाते में सैलरी का 12 प्रतिशत अनिवार्य रूप से जमा कर रहा है। यह राशि रिटायरमेंट पर मिलने वाली सुरक्षा कवच है, लेकिन अगर आप इसे और मजबूत बनाना चाहते हैं, तो वॉलंटरी प्रॉविडेंट फंड (वीपीएफ) सबसे आसान और फायदेमंद विकल्प है। बजट 2026 में पीएफ नियमों को सरल बनाया गया है, जिसमें 7.5 लाख रुपये तक नियोक्ता योगदान टैक्स-फ्री है। इस बदलाव से कर्मचारियों को ज्यादा निवेश का मौका मिला है, बिना जटिलताओं के।
बजट 2026 के नए बदलाव
ईपीएफ में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों बेसिक सैलरी+डियरनेस अलाउंस (डीए) का 12-12 प्रतिशत जमा करते हैं। वर्तमान ब्याज दर 8.25 प्रतिशत है, जो सुरक्षित रिटर्न देती है। लेकिन रिटायरमेंट पर बड़ा कॉर्पस चाहिए, तो वीपीएफ से अतिरिक्त निवेश करें। वीपीएफ में आप ईपीएफ के ऊपर 500 रुपये से 1.5 लाख रुपये सालाना जमा कर सकते हैं। यह योगदान भी उसी ब्याज दर पर बढ़ता है और टैक्स छूट का लाभ मिलता है।
बजट 2026 के अनुसार, नियोक्ता का कुल योगदान (ईपीएफ+वीपीएफ+NPS) 7.5 लाख तक टैक्स-फ्री रहेगा। इससे ज्यादा पर पर्क्विजिट टैक्स लगेगा। पहले 50 प्रतिशत सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश बाध्यकारी था, अब ईपीएफ नियमों के तहत लचीलापन है।
वीपीएफ क्या है और क्यों जरूरी?
वीपीएफ ईपीएफ का विस्तार है, जहां आप अपनी मर्जी से अतिरिक्त रकम जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपकी बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो ईपीएफ में 6,000 रुपये मासिक कटता है। वीपीएफ से इसे 10,000 तक बढ़ा सकते हैं। फायदा: टैक्स बचत (सेक्शन 80C), सुरक्षित ब्याज और रिटायरमेंट पर बड़ा फंड। मौजूदा 8.25 प्रतिशत रिटर्न अन्य फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर है। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों के लिए सीमा 5 लाख है। लाखों सैलरी वालों के लिए यह सुनहरा मौका है, खासकर प्राइवेट सेक्टर में जहां सैलरी तेजी से बढ़ रही है।
वीपीएफ शुरू करने का आसान प्रोसेस
वीपीएफ लेना बेहद सरल है, कुछ ही स्टेप्स में हो जाता है:
- यूएएन एक्टिवेट करें: ईपीएफओ पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) पर लॉगिन करें। आधार, पैन और बैंक से KYC अपडेट करें।
- एचआर से संपर्क: कंपनी के HR को फॉर्म दें, जिसमें वीपीएफ प्रतिशत बताएं (जैसे 5-10 प्रतिशत सैलरी का)। नियोक्ता भी मैचिंग योगदान दे सकता है।
- अप्रूवल और कटौती: 7-15 दिनों में सैलरी स्लिप में अतिरिक्त कटौती दिखेगी। ईपीएफओ ऐप से पासबुक चेक करें।
- ट्रैकिंग: UMANG ऐप या SMS अलर्ट से बैलेंस मॉनिटर करें। कोई भी समय शुरू/बंद कर सकते हैं।
यह प्रक्रिया ऑनलाइन है, पेपरलेस। छोटी कंपनियों में HR अनुपस्थित हो तो ईपीएफओ हेल्पलाइन 1800-118-005 पर कॉल करें।
निकासी नियम: लचीलापन लेकिन सीमाएं
नौकरी के दौरान पूरा पैसा नहीं निकाल सकते। जरूरी मामलों में आंशिक निकासी संभव:
- शादी, शिक्षा, मेडिकल (खुद/परिवार के लिए)।
- घर खरीद/निर्माण के लिए 90 लाख तक।
- दो महीने बेरोजगारी पर पूरा बैलेंस।
5 साल से पहले एकमुश्त निकासी पर TDS (10 प्रतिशत बिना फॉर्म 15G/15H)। मैच्योरिटी (रिटायरमेंट) पर टैक्स-फ्री। नए नियमों से क्लेम प्रोसेसिंग तेज हुई है, 20 दिनों में पेमेंट।
फायदे, जोखिम और सलाह
वीपीएफ से कॉर्पस दोगुना हो सकता है। 30 साल नौकरी में 1.5 लाख सालाना VPF से 1 करोड़+ बन सकता है। टैक्स बचत अलग। लेकिन 7.5 लाख लिमिट न भूलें, वरना टैक्स ब्याज खाएगा। हाई सैलरी वालों को फाइनेंशियल प्लानर से सलाह लें। कुल मिलाकर, बजट 2026 ने पीएफ को और आकर्षक बनाया। आज ही वीपीएफ शुरू करें, रिटायरमेंट सिक्योर हो जाएगा।









