
कई बार ऐसा होता है जब आपको पता चलता है कि आपकी जितनी ही आय और उम्र वाले किसी शख्स को आपसे कम ब्याज दरों पर लोन मिल गया। मन में सवाल उठता है- आखिर फर्क क्यों? दरअसल, बैंकिंग में आय से ज्यादा महत्वपूर्ण है आपका वित्तीय अनुशासन। इसी अनुशासन को मापने का पैमाना है क्रेडिट स्कोर। यह तीन अंकों का जादुई नंबर (300-900) लोन स्वीकृति, ब्याज दर और क्रेडिट कार्ड लिमिट तय करता है।
भारत में CIBIL स्कोर कैसे काम करता है
भारत में CIBIL, Experian जैसी क्रेडिट ब्यूरो इस स्कोर की गणना करती हैं। मुख्य फैक्टर हैं- पेमेंट हिस्ट्री (35%), क्रेडिट उपयोग (30%), क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई (15%), नए क्रेडिट (10%) और मिक्स ऑफ क्रेडिट (10%)। समय पर EMI न चुकाना या क्रेडिट लिमिट का 30% से ज्यादा उपयोग स्कोर को तेजी से गिरा देता है। उदाहरणस्वरूप, 750+ स्कोर पर होम लोन 8.5% ब्याज पर मिल सकता है, जबकि 600 से नीचे पर 12% या रिजेक्शन।
गलतियां जो स्कोर बिगाड़ती हैं
सबसे घातक है देरी से भुगतान। एक EMI लेट होने पर 50-100 अंक गिर सकते हैं। क्रेडिट कार्ड पर सिर्फ मिनिमम ड्यू भरना या लिमिट फुल यूज करना ‘जोखिम भरा’ संकेत देता है। कम समय में कई लोन अप्लाई करना या पुराने अकाउंट बंद करना भी नुकसानदेह। अगर स्कोर जीरो है, तो कोई हिस्ट्री न होने से बैंक हिचकते हैं।
5 आसान तरीके स्कोर बढ़ाने के
- समय पर हर पेमेंट: EMI और बिल रिमाइंडर सेट करें। यह 3-6 महीने में 100 अंक सुधार ला सकता है।
- क्रेडिट उपयोग 30% से कम: लिमिट बढ़वाएं या खर्च नियंत्रित रखें। ज्यादा उपयोग ‘ऋण जाल’ का संकेत।
- पुराने लोन पहले क्लोज: असुरक्षित लोन चुकाएं, नए कम लें। लंबी टेन्योर चुनें ताकि EMI मैनेजेबल रहे।
- सिक्योर्ड कार्ड से शुरुआत: FD पर क्रेडिट कार्ड लें, जिम्मेदारी से यूज करें। बिना हिस्ट्री वालों के लिए बेस्ट।
- रिपोर्ट चेक और सुधार: CIBIL ऐप/साइट पर मुफ्त रिपोर्ट देखें, गलतियां (जैसे पुराना डिफॉल्ट) ठीक कराएं।
ये आदतें अपनाने पर स्कोर धीरे-धीरे सुधरता है- रातोंरात नहीं। विशेषज्ञ कहते हैं, 6 महीने की नियमितता से औसत 50-150 अंक बढ़ोतरी संभव। अच्छा स्कोर न सिर्फ लोन आसान बनाता है, बल्कि किराए के समझौते, जॉब वेरिफिकेशन में भी मददगार।









