
भारत में अगर कोई किरायेदार बार‑बार कहने के बाद भी आपका घर खाली नहीं कर रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। 2026 के मौजूदा रेंट कानून, Model Tenancy Act और नए रेंट रूल्स के तहत मकान मालिक को कई कानूनी अधिकार दिए गए हैं, जिनका सही इस्तेमाल करके आप बिना झगड़े और बिना गैर‑कानूनी तरीके अपनाए, अपनी प्रॉपर्टी वापस ले सकते हैं।
सबसे पहले कानूनी नोटिस क्यों जरूरी है?
किरायेदार को बेदखल करने का पहला और सबसे अहम कदम है एक लिखित Legal Notice भेजना। इसमें साफ‑साफ लिखा जाता है कि आप किस आधार पर किरायेदारी खत्म कर रहे हैं और घर खाली करने के लिए कितने दिन का समय दे रहे हैं।
- नोटिस में आमतौर पर 15 से 30 दिन की टाइम लिमिट दी जाती है, जब तक किरायेदार को घर खाली करना होता है।
- अगर रेंट एग्रीमेंट में नोटिस पीरियड पहले से लिखा है (जैसे 30 या 60 दिन), तो उसी के हिसाब से टाइम देना बेहतर रहता है।
अकसर वकील के लेटरहेड पर भेजा गया नोटिस ही किरायेदार को सीरियस कर देता है और कई केस बिना कोर्ट गए ही सुलझ जाते हैं।
नोटिस के बाद क्या? रेंट कंट्रोल कोर्ट का सहारा
अगर किरायेदार नोटिस के बाद भी घर खाली नहीं करता, तो अगला स्टेप है अपने क्षेत्र की Rent Control Court, Rent Authority या सिविल कोर्ट में Eviction Petition दाखिल करना।
- अलग‑अलग राज्यों में अलग Rent Control Act और व्यवस्था होती है, इसलिए लोकल वकील से सलाह लेकर सही कोर्ट में केस दायर करना ज़रूरी है।
- नए रेंट रूल्स और Home Rent Rules 2025 जैसी गाइडलाइन्स में यह भी तय किया जा रहा है कि ऐसे विवाद 60 दिन जैसी फिक्स टाइमलाइन में निपटाए जाएं, ताकि केस सालों न लटके।
जरूरत हो तो आप National Consumer Helpline, लीगल एड अथॉरिटी या किसी भरोसेमंद लॉ पोर्टल से भी प्राइमरी सलाह ले सकते हैं।
किन कारणों पर मिलती है बेदखली?
कोर्ट किसी किरायेदार को यूं ही घर से नहीं निकालती, इसके लिए मकान मालिक को वैध और कानूनी आधार साबित करने होते हैं।
- किराया न देना: लगातार 2–3 महीने या उससे ज्यादा समय तक किराया न चुकाना, जबकि बार‑बार मांग और नोटिस दिया जा चुका हो।
- अनुबंध का उल्लंघन: रेंट एग्रीमेंट में जो शर्तें लिखी हैं (जैसे सबलेट न करना, समय पर किराया देना, सिर्फ रिहायशी उपयोग आदि), उनका खुला उल्लंघन।
- अवैध या गलत उपयोग: घर को बिना इजाज़त कमर्शियल उपयोग में बदल देना या वहां अवैध/क्रिमिनल गतिविधियाँ चलाना।
- संरचना को नुकसान: प्रॉपर्टी की स्ट्रक्चर को ऐसा नुकसान पहुंचाना जिसे सामान्य wear and tear नहीं माना जा सके।
- मकान मालिक की निजी जरूरत (bonafide requirement): अगर मकान मालिक या उसका फैमिली मेंबर खुद रहने के लिए या genuine business के लिए उस प्रॉपर्टी की जरूरत साबित कर दे, तो यह भी मजबूत आधार माना जाता है।
Model Tenancy Act और ओवरस्टे पर दोगुना–चार गुना किराया
Model Tenancy Act का मकसद दोनों पक्षों के हितों को बैलेंस करना है, लेकिन इसमें एक बहुत मजबूत प्रावधान मकान मालिक के पक्ष में भी है।
- अगर किरायेदार टेनेंसी खत्म होने के बाद भी घर खाली नहीं करता, तो मकान मालिक डबल Rent के मुआवजे का हकदार हो सकता है।
- एक्ट में साफ लिखा है कि ओवरस्टे की स्थिति में पहले दो महीनों के लिए किरायेदार को सामान्य किराए का दो गुना देना होगा, और उसके बाद जितने भी महीने वह कब्जा बनाए रखेगा, उस पूरे पीरियड के लिए चार गुना तक किराया वसूलने का प्रावधान है।
ध्यान रहे, Model Tenancy Act एक मॉडल कानून है, जिसे राज्यों को अपने‑अपने यहां नोटिफाई करके लागू करना होता है। इसलिए किसी भी मुआवजे या पेनल्टी की डिमांड करने से पहले यह जरूर चेक करें कि आपके राज्य ने यह एक्ट या इसकी मुख्य धाराएं अपनाई हैं या नहीं।
क्या न करें?
गुस्से में आकर मकान मालिक अकसर ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो बाद में उन्हीं के खिलाफ केस बन जाती हैं।
- बिजली या पानी काट देना: Essential services जानबूझकर बंद करना कई रेंट कानूनों के तहत punishable act है और Rent Authority आपके खिलाफ पेनल्टी लगा सकती है।
- ताला बदलना या सामान फेंकना: बिना कोर्ट ऑर्डर के ताला बदलना, सामान बाहर फेंकना या जबरन घर में घुसना आपराधिक केस (trespass, criminal intimidation आदि) तक में बदल सकता है।
- धमकी, बदसलूकी या पर्सनल प्रेशर: लिखित नोटिस और कोर्ट के रास्ते के अलावा किसी तरह की गैर‑कानूनी दबाव की कोशिश उल्टा पड़ सकती है और किरायेदार पुलिस कंप्लेंट कर सकता है।
सही रास्ता यही है कि पूरा प्रोसेस लीगल चैनल से ही चलाया जाए – नोटिस, डॉक्यूमेंटेड कम्युनिकेशन, सही कोर्ट में केस और जरूरत पड़ने पर लोकल Department of Justice/कानून विभाग या राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए रेंट कानूनों को देखकर स्टेप फाइनल किए जाएं।
मकान मालिक खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
मकान किराए पर देने से पहले ही कुछ बेसिक सावधानियां रखेंगे, तो बाद में बेदखली की नौबत भी कम आएगी और केस होने पर आपका पक्ष मजबूत रहेगा।
- हर बार लिखित रेंट एग्रीमेंट बनाएं, जिसमें किराया, डिपॉजिट, नोटिस पीरियड और बेदखली की कंडीशन क्लियर हों, और जहां लागू हो वहां ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं।
- किरायेदार का Police Verification और KYC ठीक से कराएं, ताकि किसी अवैध गतिविधि का रिस्क कम हो और जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड आपके पास हो।
- किराया कैश देने की बजाय अकाउंट ट्रांसफर या रसीद के साथ लें, जिससे कभी भी आप कोर्ट में payment history दिखा सकें।









