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ईरान की मिसाइलें कितनी दूर तक मार कर सकती हैं? ट्रंप के हमले की स्थिति में किन 8 देशों पर हो सकता है पलटवार

क्या ईरान की मिसाइलें सात समंदर पार अमेरिका को दहला सकती हैं? 11,000 किमी की दूरी और मिसाइलों की सीमित रेंज के बीच जानें ईरान का वो 'प्लान-B', जिसके तहत ट्रंप के हमले की सूरत में 8 पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी बेस तेहरान के सीधे निशाने पर हैं।

By Pinki Negi

ईरान की मिसाइलें कितनी दूर तक मार कर सकती हैं? ट्रंप के हमले की स्थिति में किन 8 देशों पर हो सकता है पलटवार
ईरान की मिसाइलें

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान की मिसाइलें सात समंदर पार अमेरिका तक पहुँच सकती हैं? अगर हम नक्शे पर नज़र डालें, तो तेहरान से अमेरिकी मुख्य भूमि (Mainland) की दूरी बहुत ज़्यादा है, जिससे सीधा हमला करना ईरान के लिए लगभग असंभव है।

भले ही ईरान की सेना दुनिया की 16वीं सबसे बड़ी शक्ति है और उसके पास आधुनिक ड्रोन व एयर डिफेंस सिस्टम है, लेकिन उसकी मिसाइलों की रेंज अमेरिका तक नहीं पहुँचती। ऐसे में अमेरिका को जवाब देने के लिए ईरान ने एक अलग रणनीति बनाई है। ईरान के निशाने पर सीधे अमेरिका के बजाय वे 8 देश होंगे जहाँ अमेरिकी बेस या उनके सहयोगी मौजूद हैं। इसी खतरे को देखते हुए ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर मिसाइलों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।

मिसाइल की रेंज और अमेरिका की दूरी

ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है, लेकिन उनकी अधिकतम मारक क्षमता 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक ही है। इस रेंज में वह इजरायल और मध्य पूर्व के अमेरिकी सैन्य अड्डों को तो निशाना बना सकता है, लेकिन 11,000 किलोमीटर दूर स्थित अमेरिका तक पहुँचना उसके लिए असंभव है। तकनीकी रूप से ईरान की मिसाइलें अमेरिका तक की दूरी का एक चौथाई हिस्सा भी तय नहीं कर पाती हैं, जिससे सीधा हमला मुमकिन नहीं दिखता।

क्या ईरान अमेरिका को दे पाएगा मुंहतोड़ जवाब?

ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को उत्तर कोरिया, रूस और चीन जैसे देशों से तकनीकी मदद मिलती रही है। हालांकि उसकी सबसे चर्चित ‘शेजिल’ मिसाइल की रेंज भी 2,500 किमी तक ही सीमित है, लेकिन ईरान की असली ताकत उसके ‘शहीद’ (Shahed) ड्रोन हैं। इन ड्रोनों का लोहा दुनिया मान चुकी है, क्योंकि रूस ने यूक्रेन के खिलाफ और सूडान संघर्ष में इनका घातक इस्तेमाल किया है। सीधा अमेरिका तक न पहुँच पाने के बावजूद, ईरान अपने इस ड्रोन नेटवर्क और मिसाइलों के जरिए मध्य पूर्व (Middle East) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके मित्र देशों को भारी नुकसान पहुँचाने की क्षमता रखता है।

अमेरिकी अड्डों पर संकट

ईरान की मारक क्षमता को देखते हुए अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने सैन्य अड्डों को खाली करना शुरू कर दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, तेहरान ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हमला किया, तो वह उनकी धरती पर मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। कतर, बहरीन और यूएई जैसे देशों में स्थित अमेरिकी बेस ईरान की 2,500 किमी वाली मिसाइल रेंज के भीतर हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

ईरान की मिसाइल रेंज में अमेरिका के 8 ‘अभेद्य’ किले

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, पश्चिम एशिया में फैले अमेरिकी सैन्य अड्डे सबसे ज़्यादा खतरे में हैं। ये अड्डे न केवल सैन्य ताकत का केंद्र हैं, बल्कि ईरान की 2,500 किलोमीटर की मिसाइल रेंज के भीतर आते हैं। कतर के विशाल एयरबेस से लेकर तुर्की के परमाणु ठिकानों तक, अमेरिका ने रणनीतिक रूप से पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर रखी है। यदि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच युद्ध छिड़ता है, तो ये 8 देश मुख्य रणभूमि बन सकते हैं।

अमेरिकी सैन्य अड्डों का पूरा विवरण

देशसैन्य अड्डे का नाममहत्व और ताकत
1कतरअल-उदेद (Al Udeid)सबसे बड़ा बेस: 10,000 जवान; सेंट्रल कमांड का मुख्यालय।
2बहरीन5वां बेड़ा (5th Fleet)नेवी हेडक्वार्टर: लाल सागर और हिंद महासागर पर नियंत्रण।
3तुर्कीइनसर्लिक (Incirlik)परमाणु ठिकाना: यहाँ अमेरिकी न्यूक्लियर वॉरहेड होने की चर्चा है।
4UAEअल धाफरा एयर बेसएयरफोर्स हब: ISIS के खिलाफ जंग का मुख्य केंद्र।
5सऊदी अरबप्रिंस सुल्तान एयर बेसमिसाइल डिफेंस: 2,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात।
6कुवैतकैंप आरिफ़जान (सीमा के पास)लॉजिस्टिक हब: इराक सीमा के पास विशाल सैन्य मौजूदगी।
7इराकअल-असद एयरबेसरणनीतिक ठिकाना: नाटो और इराकी सेना की मदद का केंद्र।
8जॉर्डनअल साल्टी एयर बेसनिगरानी केंद्र: अम्मान के पास एयरफोर्स की बड़ी मौजूदगी।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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