
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। कई देशों में LPG की भारी किल्लत देखी जा रही है, लेकिन भारतीय सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। IOC, BPCL और HPCL जैसी तीनों प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) लगातार सिलेंडर सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं। हर घर की रसोई का अहम हिस्सा बने LPG सिलेंडर की मांग समय के साथ बढ़ रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है- गैस एजेंसी मालिक एक सिलेंडर से कितनी कमाई करते हैं? आइए, इसकी गहराई से पड़ताल करें।
गैस एजेंसी की कमाई का मूल गणित
घरेलू 14.2 किलो LPG सिलेंडर पर डिस्ट्रीब्यूटर को औसतन 75-80 रुपये का कमीशन मिलता है, जिसमें डिलीवरी और हैंडलिंग चार्ज शामिल होते हैं। यह राशि दो हिस्सों में बंटी होती है – करीब 39-40 रुपये स्थापना/दुकान खर्च (ऑफिस, स्टाफ, बिजली) और 33-34 रुपये डिलीवरी/ट्रांसपोर्ट (डिलीवरी बॉय की सैलरी, डीजल) के लिए। PPAC समय-समय पर इन दरों की समीक्षा करता है।
मान लीजिए, कोई मध्यम आकार की एजेंसी महीने में 5,000 घरेलू सिलेंडर डिलीवर करती है। कुल ग्रॉस कमीशन: 5,000 × 80 = 4 लाख रुपये। अब खर्चे घटाएं – 10-12 स्टाफ की सैलरी (लगभग 1.5-2 लाख), गाड़ियों का डीजल-मेंटेनेंस (50,000-70,000 रुपये), गोदाम/किराया (30,000-50,000 रुपये), इंश्योरेंस-सेफ्टी उपकरण (20,000 रुपये)। नेट प्रॉफिट: 1-1.5 लाख रुपये तक रह जाता है। बड़े वॉल्यूम (8,000-10,000 सिलेंडर) पर यह 3-5 लाख तक पहुंच सकता है।
कमर्शियल सिलेंडर: ज्यादा मार्जिन, ज्यादा चुनौतियां
कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो या 35 किलो) पर कमीशन घरेलू से कहीं ज्यादा है – 50 से 100 रुपये या उससे अधिक प्रति सिलेंडर। रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, बेकरी जैसे फूड आउटलेट्स इन्हें इस्तेमाल करते हैं। दूरी, हैंडलिंग और लोकेशन पर निर्भर यह राशि OMCs तय करती हैं। उदाहरणस्वरूप, 300 कमर्शियल कनेक्शन वाली एजेंसी महीने में 1,200 सिलेंडर बेचे तो 1.2 लाख रुपये अतिरिक्त ग्रॉस इनकम। कुल मिलाकर, मिक्स्ड बिजनेस से नेट प्रॉफिट 2-4 लाख तक संभव है।
5 किलो छोटे सिलेंडर पर कमीशन 36-46 रुपये रहता है – 19-20 रुपये स्थापना और 16-17 रुपये डिलीवरी। हालांकि, इनकी संख्या ज्यादा होने से कुल कमाई बढ़ सकती है।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार का राहत भरा फैसला
मिडिल ईस्ट युद्ध से प्रभावित कमर्शियल LPG सप्लाई में कमी के कारण रेस्टोरेंट-होटल इंडस्ट्री संकट में है। कई आउटलेट बंद होने की कगार पर हैं। ऐसे में सरकार ने बड़ा कदम उठाया – कमर्शियल सिलेंडरों पर 20% अतिरिक्त कोटा आवंटित। इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स को ज्यादा वॉल्यूम मिलेगा, जिसका सीधा फायदा उनकी कमाई में दिखेगा। Indane, Bharat Gas और HP Gas एजेंसियां अब तेजी से सप्लाई बढ़ा रही हैं।
क्या प्रभावित करता है एजेंसी की कमाई?
कमाई के फैक्टर कई हैं। सबसे बड़ा – एक्टिव कनेक्शन की संख्या। ग्रामीण इलाकों में डिलीवरी रेडियस ज्यादा होने से खर्च बढ़ता है। कंपनी की पॉलिसी (इंसेंटिव, बोनस), ऑपरेटिंग कुशलता (रूट प्लानिंग, कम वेस्टेज) और अतिरिक्त सर्विसेज (रेगुलेटर, चूल्हा बिक्री) प्रॉफिट मार्जिन तय करते हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स अक्सर शिकायत करते हैं कि 70-80 रुपये का कमीशन मौजूदा महंगाई में पर्याप्त नहीं, इसलिए हड़ताल की धमकियां भी आती रहती हैं।
कुल मिलाकर, LPG एजेंसी एक स्थिर लेकिन मेहनती बिजनेस है। छोटी एजेंसियां 1-2 लाख, जबकि बड़ी 4-5 लाख महीना कमा सकती हैं। मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत की सप्लाई चेन मजबूत है, जो एजेंसी मालिकों के लिए अच्छी खबर है।









