
पॉपुलर राइटिंग असिस्टेंट ग्रामरली ने अपना विवादित AI फीचर ‘Expert Review’ को बंद कर दिया है। यह फीचर बिना लेखकों की अनुमति के उनकी लेखन शैली और नाम का इस्तेमाल कर रहा था, जिससे लेखकों और पत्रकारों में भारी गुस्सा फैल गया। ग्रामरली प्रो प्लान (लगभग 12 डॉलर प्रति माह) का हिस्सा यह टूल यूजर्स को एडिटिंग सुझाव देता था, मानो स्टीफन किंग या बेल हुक जैसे मशहूर लेखक उनके टेक्स्ट को देख रहे हों।
लेकिन आरोप लगा कि जीवित और दिवंगत लेखकों की सार्वजनिक सामग्री से ट्रेन किया गया यह AI उनकी पहचान चुरा रहा था, जो कॉपीराइट और प्राइवेसी का स्पष्ट उल्लंघन था। सोशल मीडिया पर #BoycottGrammarly जैसे ट्रेंड उभरे, जहां लेखकों ने इसे ‘डिजिटल चोरी’ करार दिया।
फीचर कैसे काम करता था?
‘Expert Review’ यूजर्स के टेक्स्ट को स्कैन कर सुझाव देता था, जैसे ‘स्टीफन किंग स्टाइल में इसे छोटा करें’ या ‘बेल हुक की तरह भावनात्मक गहराई जोड़ें’। कंपनी का दावा था कि सुझाव थर्ड-पार्टी AI मॉडल और सार्वजनिक डेटा पर आधारित हैं, बिना प्रत्यक्ष कॉन्टेंट कॉपी किए। फिर भी, लेखकों ने आपत्ति जताई कि उनकी अनूठी शैली को बिना सहमति के ‘AI एडिटर’ में बदल दिया गया।
उदाहरण के लिए, एक लेखिका ने बताया कि उनका नाम फीचर में दिखा, जबकि उन्होंने कभी ग्रामरली से बात नहीं की। यह फीचर Pro यूजर्स के लिए था, जो लाखों लेखकों, छात्रों और प्रोफेशनल्स इस्तेमाल करते हैं। विवाद मार्च 2026 में चरम पर पहुंचा, जब रेडिट और इंस्टाग्राम पर सैकड़ों पोस्ट वायरल हो गए।
कानूनी हमला और बहिष्कार
कई लेखकों ने ग्रामरली पर ‘पहचान की चोरी’ का आरोप लगाया। एक प्रमुख लेखिका ने 5 मिलियन डॉलर का क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया, दावा किया कि कंपनी ने बिना परमिशन के उन्हें ‘AI प्रॉक्सी’ बना दिया। पत्रकारों ने इसे ‘कीलॉगर जैसा’ बताया, जो क्रिएटिव वर्क चुरा सकता है। भारत में भी हिंदी लेखकों ने ट्विटर पर विरोध किया, कहा कि यह लोकल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए खतरा है। ग्रामरली के CEO शिशिर मेहरोत्रा ने माफी मांगी, स्वीकार किया कि फीचर ‘प्रभावी नहीं रहा’। कंपनी ने इसे तुरंत बंद कर समीक्षा शुरू की, लेकिन मुकदमे पर चुप्पी साधी।
ग्रामरली की प्रतिक्रिया
ग्रामरली ने 12 मार्च 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर फीचर हटा दिया। कंपनी ने कहा, ‘हम यूजर फीडबैक का सम्मान करते हैं और नैतिक AI पर फोकस करेंगे।’ लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह डैमेज कंट्रोल है। BBC और TechCrunch जैसी साइट्स ने इसे AI इंडस्ट्री के लिए चेतावनी बताया।
AI के नैतिक सवाल
यह विवाद AI के दुरुपयोग पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या बिना अनुमति शैली नकल करना चोरी है? विशेषज्ञों का मानना है कि GDPR और कॉपीराइट कानून सख्त होंगे। भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत ऐसे केस बढ़ सकते हैं। लेखकों को सलाह है कि AI टूल्स चुनते समय प्राइवेसी पॉलिसी चेक करें। ग्रामरली जैसी कंपनियों को अब ट्रांसपेरेंसी और सहमति पर जोर देना होगा, वरना भरोसा डगमगा सकता है।









