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Budget Relief: शैंपू, क्रीम से लेकर दवा तक होगी सस्ती! सरकार ने हटाई कस्टम ड्यूटी, देखें सामानों की पूरी लिस्ट

मध्य पूर्व के युद्ध और क्रूड‑महंगाई के बीच सरकार ने 41 जरूरी पेट्रोकेमिकल इनपुट्स पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है, जिससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़े, दवा और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टरों की लागत कम होगी। इस फैसले से शैंपू, क्रीम, टूथपेस्ट और अन्य रोजमर्रा के प्रोडक्ट्स की कीमतें लंबे समय में स्थिर या सस्ती रहने की उम्मीद है, जबकि पेट्रोल‑डीजल और ब्लड‑बैग जैसी मेडिकल चीजों की आपूर्ति भी बेहतर बनी रहेगी।

By Pinki Negi

Budget Relief: शैंपू, क्रीम से लेकर दवा तक होगी सस्ती! सरकार ने हटाई कस्टम ड्यूटी, देखें सामानों की पूरी लिस्ट

मध्य पूर्व में चल रहे सैन्य संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजी आवाजाही लगभग बंद होने से दुनियाभर में क्रूड ऑयल और एलपीजी सहित ऊर्जा आपूर्ति की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अस्थिरता के बीच कच्चे तेल की कीमतें ब्रेंट क्रूड में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चलती रही हैं, जिससे भारत सहित कई देशों में राफ्तार भरी महंगाई का डर बढ़ गया। इस दबाव को कम करने के लिए सरकार ने एक के बाद एक कई राहत‑पैकेज जारी किए हैं, जिनमें पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह हटाना और शैंपू, क्रीम, दवा जैसी ज़रूरी चीजों की मैन्युफैक्चरिंग लागत कम रखना भी शामिल है।

मध्य पूर्व संकट और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार अब 41 जरूरी पेट्रोकेमिकल आइटम पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह शून्य कर दी गई है। यह छूट 2 अप्रैल, 2026 से शुरू हो चुकी है और आगामी 30 जून तक लागू रहेगी। सरकार का मकसद यह है कि घरेलू उद्योगों को पेट्रोकेमिकल इनपुट्स आसानी से और कम लागत पर मिल सकें, जिससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल, केमिकल और ऑटोमोटिव सेक्टर जैसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब्स की कॉस्ट पर दबाव कम हो सके। इससे आम उपभोक्ता को लंबे समय में रोजमर्रा की जरूरी चीजों की काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

क्रूड और एलपीजी से लेकर शैंपू‑क्रीम तक

मध्य पूर्व में युद्ध तेज होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकर और कमर्शियल जहाजों की आवाजाही जरूरत से बहुत कम हो गई। एक्सपर्ट्स के अनुसार यहाँ से गुजरने वाले जहाजों की संख्या पहले 135 तक प्रतिदिन थी, जो अब सिर्फ दस‑बारह जहाजों तक सिमट गई है। इस वजह से तेल‑गैस ढुलाई लागत और बीमा- दोनों में बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर इंडिया में पेट्रोल–डीजल और एलपीजी की कीमतों पर भी पड़ा।

इस दबाव को रोकने के लिए सरकार ने पहले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की। इसके बाद अब पेट्रोकेमिकल पर कस्टम ड्यूटी को शून्य करके यह संकेत दिया गया है कि “लागत बढ़ने पर बोझ पहले से आम आदमी पर नहीं डाला जाएगा।”

मेथेनॉल से लेकर पॉलीइथिलीन तक

40–41 जरूरी पेट्रोकेमिकल इनपुट्स में मेथेनॉल, टॉल्यून, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर, मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG), फीनोल, एसिटिक एसिड, प्यूरिफाइड टेरेफ्थैलिक एसिड (PTA), पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपीलीन, पॉलीस्टाइरीन, पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC), पॉलीइथिलीन टेरेफ्थालेट (PET) और इंजीनियरिंग प्लास्टिक जैसे ABS और पॉलीकार्बोनेट शामिल हैं। इन्हीं केमिकल्स से प्लास्टिक दूध की बोतल, शॉपिंग बैग, फूड‑पैकेजिंग, शैंपू और ऑयल‑कंटेनर, टॉयलेट बैग, डिस्पोजेबल ग्लव्स और यहाँ तक कि दवाओं के ब्लिस्टर‑पैक तक बनते हैं। मेथेनॉल से प्लाईवुड, इंसुलेशन फोम, सिंथेटिक फाइबर, पेंट‑कोटिंग और दवाएँ बनती हैं, जबकि टॉल्यून पेंट, थिनर, गोंद, रबर, रेजिन और टीवी‑मोबाइल केस जैसी चीजों की बेस बनाता है।

इसी तरह मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG) का इस्तेमाल पानी, कोल्ड ड्रिंक, शैंपू और ऑयल की बोतल, साथ‑साथ कपड़े और फाइबर बनाने में होता है, जबकि पॉलीइथिलीन से दूध‑जूस की बोतल, प्लास्टिक बैग, फूड‑रैप, शॉपिंग बैग और डिस्पोजेबल ग्लव्स जैसे रोजमर्रा उपयोग की चीजें तैयार होती हैं। जब इन कच्चे माल पर अब इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी, तो इनकी लैंडिंग कॉस्ट घटेगी, जिससे प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग की मैन्युफैक्चरिंग लागत भी कम होगी। इसका असर धीरे‑धीरे उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों पर भी दिखेगा।

दवा, प्लास्टिक और ऑटो पार्ट्स पर दबाव कम

सरकार का मानना है कि जब पेट्रोकेमिकल इनपुट्स सस्ते होंगे, तो दवा‑उत्पादन, प्लास्टिक‑पैकेजिंग और ऑटोमोटिव पार्ट्स जैसे क्षेत्रों की कॉस्ट भी नियंत्रित रहेगी। विनाइल क्लोराइड मोनोमर से बनने वाले प्लास्टिक, ब्लड‑बैग, मेडिकल ट्यूबिंग, टॉयज और क्रेडिट कार्ड जैसी चीजों की लागत भी इस फैसले से सीधे तौर पर लाभान्वित हो सकती है। फार्मा सेक्टर में पेट्रोकेमिकल‑आधारित इनपुट्स का अहम भूमिका है, खासकर ऐसी दवाओं के उत्पादन में जो लंबे समय तक जरूरी होती हैं। इस तरह से सरकार का यह कदम न सिर्फ इंडस्ट्री को तत्काल राहत देता है, बल्कि आम उपभोक्ता को भी चुपचाप लंबे समय तक लाभ दे सकता है।

निर्यात और नीति‑मैनेजमेंट का रणनीति

इस राहत के साथ‑साथ सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात ड्यूटी भी लगाई है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो और भारत अपने ईंधन‑भंडार को भी सुरक्षित रख सके। मध्य पूर्व में तेल‑गैस आपूर्ति बाधित होने के बावजूद भारत ने अगले कुछ सप्ताह के लिए अन्य स्रोतों से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है, लेकिन लागत अस्थिरता बनी रहेगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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