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Digital Arrest करने वाले स्कैमर्स की अब खैर नहीं! सरकार का मास्टरप्लान तैयार, WhatsApp नंबर नहीं सीधा फोन होगा ब्लॉक

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर केंद्र सरकार ने मास्टरप्लान तैयार किया है। अब केवल WhatsApp नंबर नहीं, बल्कि ठगी में इस्तेमाल होने वाले पूरे मोबाइल डिवाइस (Device ID) को हमेशा के लिए ब्लॉक किया जाएगा। इससे स्कैमर्स नया अकाउंट नहीं बना पाएंगे और उनका विदेशी नेटवर्क ध्वस्त हो जाएगा। पीड़ितों को राहत मिलेगी।

By Pinki Negi

Digital Arrest करने वाले स्कैमर्स की अब खैर नहीं! सरकार का मास्टरप्लान तैयार, WhatsApp नंबर नहीं सीधा फोन होगा ब्लॉक

पिछले कुछ महीनों से भारतीयों के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) नाम का एक भयानक स्कैम तबाही मचा रहा है। इसमें स्कैमर्स कभी सीबीआई अफसर, कभी उच्च पदाधिकारी या ईडी ऑफिशल बनकर शिकार से वीडियो कॉल करते हैं और उन्हें घंटों अपने घर में ही ‘कैद’ रहने को मजबूर कर देते हैं। डरा-धमकाकर ये ठग लोगों की सारी जमा-पूंजी लूट लेते हैं।

लेकिन अब इन जालसाजों पर कड़ा नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने एक मास्टरप्लान तैयार कर लिया है, जिसके तहत अब केवल WhatsApp नंबर बंद करने से काम नहीं चलेगा; बल्कि पूरे मोबाइल फोन (डिवाइस) को ही हमेशा के लिए ब्लॉक किया जाएगा।

हाई-लेवल कमेटी का सख्त निर्देश

सरकार की एक हाई-लेवल कमेटी ने हाल ही में WhatsApp को दो टूक कह दिया है कि पुरानी विधि अब असरदार नहीं रही। भारत सरकार के गृह मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक वाइरल मीटिंग में यह स्पष्ट किया गया कि स्कैमर्स अत्यंत शातिर होते हैं। जैसे ही उनका एक WhatsApp नंबर ब्लॉक होता है, वे तुरंत नया SIM कार्ड खरीदकर या पुराने नंबर को फर्जी तरीके से री-एक्टिवेट कर वापस वही काम शुरू कर देते हैं। इस चक्र को तोड़ने के लिए सरकार ने डिवाइस आईडी (Device ID/IMEI) को निशाना बनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

अब WhatsApp को निर्देश दिया गया है कि यदि किसी विशेष मोबाइल फोन से बार-बार डिजिटल अरेस्ट या अन्य साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट आती है, तो वह सिर्फ यूजर अकाउंट ही नहीं, बल्कि उस फोन के हार्डवेयर की पहचान (Device Fingerprint) को ब्लॉक कर दे। इसके बाद उसी हैंडसेट पर WhatsApp, Telegram या कोई भी अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म कभी काम नहीं कर पाएगा। यह कदम स्कैमर्स के लिए नया अकाउंट बनाने को नामुमकिन बना देगा।

विदेशी नेटवर्क पर चोट

पिछले कुछ समय में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में बाढ़ सी आ गई है। जांच में पता चला है कि ये स्कैमर्स अक्सर कंबोडिया, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों से ऑपरेट करते हैं। ये भारतीयों को कॉल करके यह डरावना झूठ बोलते हैं कि उनके नाम पर अवैध पार्सल आया है या बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। डर के मारे शिकार वीडियो कॉल पर घंटों कैद रहते हैं और लाखों रुपये ट्रांसफर कर देते हैं। सरकार का मानना है कि डिवाइस-लेवल ब्लॉकिंग से इन विदेशी आधारित नेटवर्क की operationल क्षमता पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी, क्योंकि उन्हें हर बार नया फोन खरीदना पड़ेगा, जो कि बड़े पैमाने पर संभव नहीं होगा।

आम जनता के लिए राहत

इस कदम से विशेषकर बुजुर्गों और तकनीकी रूप से कमजोर लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को संदिग्ध इंटरनेशनल कॉल्स पर_CATEGORY नजर रखने और डेटा को कुछ समय तक सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। पहले ठग अपना अकाउंट तुरंत डिलीट कर देते थे, जिससे पुलिस को सबूत मिलना मुश्किल था। अब डेटा सुरक्षित रहने से आरोपियों तक पहुंचना आसान होगा।

सावधानी बरतें: याद रखें, भारत में कोई भी जांच एजेंसी (पुलिस, सीबीआई, ED) कभी भी फोन पर किसी को ‘अर relent’ नहीं करती और न ही वीडियो कॉल पर बयान लेती है। ऐसे किसी कॉल पर घबराएं नहीं, तुरंत फोन काटें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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