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जमीन के 6,000 फीट नीचे मिला ‘सोने का महाखजाना’! पत्थरों से निकल रहा है 138 गुना ज्यादा गोल्ड, एक्सपर्ट्स भी दंग

चीन के हुनान प्रांत में जमीन के 6,000 फीट नीचे दुनिया का सबसे बड़ा सोने का भंडार मिला है। 1,100 टन सोने की यह खजाना 83 अरब डॉलर का है। सामान्य खानों की तुलना में यहाँ 138 गुना ज्यादा सोना (138 ग्राम/टन) मिल रहा है। experts इसे 'सुपरजायंट डिपॉजिट' कह रहे हैं, लेकिन उत्पादन में 10-20 साल लग सकते हैं।

By Pinki Negi

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दुनियाभर के सोने के बाजार में हलचल मचा देने वाली एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भारत के पड़ोसी मुल्क चीन में जमीन के करीब 6,000 फीट (लगभग 2 किलोमीटर) नीचे इतना विशाल और उच्च-गुणवत्ता वाला सोने का भंडार मिला है कि भूवैज्ञानिक और वित्त विशेषज्ञ भी हैरान रह गए हैं। इसे केवल एक खदान नहीं, बल्कि चीन के लिए ‘कुबेर का खजाना’ कहा जा रहा है।

वांगू गोल्ड फील्ड: 40 से अधिक ‘सोने की शिराएं’

चीन के हुनान प्रांत के भूवैज्ञानिक ब्यूरो ने पिंगजियांग काउंटी में स्थित ‘वांगू गोल्ड फील्ड’ के नीचे इस भंडार की आधिकारिक पुष्टि की है। 65 किलोमीटर से अधिक लंबे ड्रिलिंग मिशन के दौरान चट्टानों की गहन जांच की गई, जिसमें 40 से ज्यादा सोने की शिराएं (veins) मिलीं। करीब 6,560 फीट की गहराई पर पहले ही 300 मीट्रिक टन सोना कंफर्म हो चुका है। हालांकि, आधुनिक 3D जियोलॉजिकल मॉडलिंग के अनुसार, यदि 9,840 फीट (3 किमी) तक गहराई पर जाकर जांच की जाए, तो कुल भंडार 1,100 मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है।

138 ग्राम/टन: ऐसी ‘ग्रेड’ दुनिया में बिछी है दुर्लभ

इस खोज की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी ‘ग्रेड’ यानी समृद्धि है। आमतौर पर एक टन अयस्क से केवल 1 से 5 ग्राम सोना निकाला जाता है, जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक माना जाता है। लेकिन वांगू फील्ड के कुछ नमूनों में प्रति टन 138 ग्राम शुद्ध सोना मिला है- यानी सामान्य खानों की तुलना में 138 गुना ज्यादा केंद्रित सोना।

जानकारों के मुताबिक, अयस्क जितना समृद्ध होगा, उसे रिफाइन करने का खर्च उतना ही कम आएगा, जिससे मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा। ड्रिलिंग से निकले पत्थरों में सोना सीधे चमकता हुआ भी देखा गया है, जो इसकी शुद्धता की है।

वैज्ञानिक रहस्य

नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इतनी विशाल मात्रा में सोने के जमाव के पीछे एक दिलचस्प प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि भूकंपीय तनाव के दौरान क्वार्ट्ज चट्टानों में ‘पीजोइलेक्ट्रिसिटी’ यानी बिजली पैदा होती है। इस बिजली के प्रभाव से गर्म हाइड्रोथर्मल तरल पदार्थों से सोना तेजी से अलग होकर चट्टानों की दरारों में जमा हो गया, लाखों सालों से एक ‘सुपरजायंट डिपॉजिट’ बना दिया।

दुनिया का नंबर 1 बनेगा?

अगर 1,100 टन के अनुमान की अंतरराष्ट्रीय मानकों पर पुष्टि हो जाती है, तो यह भंडार दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध ‘साउथ डीप’ खदान को पीछे छोड़कर पृथ्वी का सबसे बड़ा एकल सोने का भंडार बन जाएगा। वर्तमान सोने की बाजार दरों के अनुसार इसकी कुल अनुमानित कीमत 83 अरब डॉलर (करीब 7 लाख करोड़ रुपये) है।

चुनौतियां: 10-20 साल का समय

हालांकि, विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इस भंडार का वास्तविक उत्पादन शुरू होने में 10 से 20 साल लग सकते हैं। 2-3 किलोमीटर की गहराई पर खनन अत्यंत जटिल, तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और lanzamiento लागत वाला कार्य है। अभी यह प्रोजेक्ट केवल खोज के चरण में है और अंतरराष्ट्रीय खनन मानकों, पर्यावरण प्रभाव अध्ययन और तकनीकी कार्यान्वयन की परीक्षा में खरा उतरना बाqi है।

यदि सफल रहा, तो यह खोज न केवल चीन को सोने का आयातक से निर्यातक बना सकती है, बल्कि वैश्विक सोने की कीमतों और भू-राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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