
इन दिनों सराफा बाजार में एक अलग ही तेजी देखने को मिल रही है। चांदी, जिसे कभी ‘गरीबों का सोना’ कहा जाता था, अब ₹2,50,000 प्रति किलो के पार निकल चुकी है। वहीं, शुद्ध सोना (24 कैरेट) भी ₹1,55,000 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका है।
इतनी तेजी क्यों आ रही है?
कीमतों के आसमान छूने के पीछे 4 सबसे बड़े कारण हैं:
- इंडस्ट्रियल इस्तेमाल (Industrial Demand): चांदी अब केवल गहनों तक सीमित नहीं है। सोलर प्लांट की प्लेट्स, इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स बनाने में चांदी का भारी उपयोग हो रहा है। सप्लाई कम है और मांग बहुत ज्यादा, इसलिए चांदी की कीमतें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
- ग्लोबल अनिश्चितता (Global Tension): जब भी दुनिया में युद्ध के हालात बनते हैं या देशों के बीच तनाव बढ़ता है, तो लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं। सोना दुनिया का सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है।
- डॉलर का खेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब डॉलर की कीमत गिरती है, तो सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं। निवेशक डॉलर के बजाय गोल्ड पर भरोसा जताने लगते हैं।
- भारत में शादियों का सीजन: भारत सोने का सबसे बड़ा खरीदार है। शादियों के सीजन में मांग इतनी बढ़ जाती है कि लोकल मार्केट में कीमतें अंतरराष्ट्रीय रेट से भी ऊपर चली जाती हैं।
आम आदमी की जेब पर कितना असर?
अगर आप आज की तारीख में 1 तोला (10 ग्राम) सोना खरीदने जाते हैं, तो गणित कुछ ऐसा बैठता है:
- बेस रेट: ₹1,55,000
- 3% GST: ₹4,650
- मेकिंग चार्ज (करीब 10%): ₹15,500
- कुल खर्च: लगभग ₹1,75,150
यानी अब एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार के लिए शादी के गहने बनवाना पहले के मुकाबले दोगुना महंगा हो गया है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं, लेकिन कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
- Sovereign Gold Bond (SGB): अगर गहने नहीं पहनने हैं, तो सरकारी गोल्ड बॉन्ड में निवेश करें। इसमें आपको ब्याज भी मिलता है और मेकिंग चार्ज भी नहीं देना पड़ता।
- गिरावट का इंतज़ार: जब कीमतें अपने सबसे ऊंचे स्तर (Peak) पर हों, तब एक साथ सारा पैसा न लगाएं। छोटी-छोटी किश्तों में (SIP की तरह) निवेश करें।
- चांदी में चमक: एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी आने वाले समय में सोने से भी तेज रिटर्न दे सकती है क्योंकि इसकी औद्योगिक मांग कभी कम नहीं होगी।







