
सोना-चांदी की कीमतों पर भू-राजनीतिक तनाव, ट्रंप के बयान और अमेरिका-ईरान वार्ता का सीधा असर दिख रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई ताजा गिरावट ने निवेशकों की धारणा को और सतर्क बना दिया है. इसी पृष्ठभूमि में मार्च में गोल्ड ETF में निवेश घटा है, जो बताता है कि ऊंचे दाम और अस्थिरता के बीच निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सख्त टिप्पणी और “बातचीत के लिए जिंदा है” जैसे बयान के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ी, लेकिन उसी अनिश्चितता के बीच सोने में मुनाफावसूली भी शुरू हो गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 11 डॉलर से अधिक फिसलकर 4,751 डॉलर प्रति औंस तक आया, जबकि कॉमेक्स पर यह 47 डॉलर टूटकर 4,771 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ. चांदी भी दबाव में रही और कॉमेक्स पर 76.025 डॉलर प्रति औंस तक फिसली.
निवेशक क्यों सतर्क हैं
बाजार जानकारों के मुताबिक, यह गिरावट सिर्फ एक दिन की प्रतिक्रिया नहीं है बल्कि इसमें प्रॉफिट बुकिंग, डॉलर की मजबूती और ग्लोबल सेंटिमेंट में बदलाव जैसे कारण भी शामिल हैं. जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना विदेशी खरीदारों के लिए महंगा पड़ता है और मांग कमजोर पड़ती है. इसी कारण निवेशकों का एक हिस्सा फिलहाल सोने से दूरी बनाए हुए है, भले ही लंबे समय के लिए इसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता हो.
भारतीय बाजार पर असर
भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखने की संभावना है. शुक्रवार को IBJA रेट के मुताबिक 24 कैरेट सोना 150327 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 149725 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 239934 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई. अंतरराष्ट्रीय कमजोरी के बाद घरेलू बाजार में आज नरमी देखी जा सकती है, हालांकि वास्तविक रुख डॉलर, क्रूड और पश्चिम एशिया की बातचीत पर निर्भर करेगा.
क्रूड ऑयल की चाल
क्रूड ऑयल में भी कमजोरी आई है, क्योंकि अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर आपूर्ति जोखिमों में कमी की उम्मीद बनी है. शनिवार सुबह WTI क्रूड 2 डॉलर से अधिक गिरकर 96.57 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट 95.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. यह संकेत देता है कि अगर बातचीत सकारात्मक रहती है, तो कच्चे तेल और सोने दोनों पर दबाव बना रह सकता है.
निवेश को लेकर एक्सपर्ट राय
निवेश के नजरिए से विशेषज्ञ अभी पूरी तरह बाहर निकलने की सलाह नहीं दे रहे, बल्कि चरणबद्ध रणनीति को बेहतर मान रहे हैं. पृथ्वी फिनमार्ट के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन के अनुसार, अगर युद्ध और तनाव में नरमी आती है तो सोना फिर से चढ़ सकता है, और बड़ी गिरावट पर लंबी अवधि के लिए खरीद बेहतर हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि एसआईपी से निवेश करने वाले निवेशकों को इसे जारी रखना चाहिए, क्योंकि अस्थिर दौर में यही तरीका जोखिम को संतुलित करता है.
गोल्ड ETF में घटा निवेश
मार्च में गोल्ड ETF में केवल 2,266 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया, जो जनवरी और फरवरी की तुलना में काफी कम है. यह साफ दिखाता है कि ऊंचे दाम, तेज उतार-चढ़ाव और अनिश्चित वैश्विक हालात ने नए निवेश को धीमा किया है. फिर भी, कई विश्लेषक 2026 के अंत तक सोने में नई तेजी की संभावना जता रहे हैं, क्योंकि इसे वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश माना जाता है.
आगे की दिशा
आगे की दिशा अमेरिका-ईरान वार्ता, डॉलर इंडेक्स, फेड की नीति और क्रूड ऑयल की चाल पर निर्भर करेगी. अगर दोनों देशों में सहमति बनती है, तो सोने और तेल दोनों में और नरमी आ सकती है, लेकिन बातचीत टूटने पर फिर तेज उछाल संभव है. इसलिए मौजूदा समय में सोने को लेकर सबसे संतुलित रणनीति यही मानी जा रही है कि निवेशक घबराकर नहीं, बल्कि किस्तों में और लंबी अवधि की सोच के साथ कदम बढ़ाएं.









