
पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच भड़के युद्ध की लपटें भले ही आसमान छू रही हों, लेकिन भारतीय सर्रफा बाजार में सोना-चांदी के भाव उल्टी दिशा में लुढ़क गए हैं। पारंपरिक धारणा के विपरीत, जहां जियोपॉलिटिकल संकट में ये कीमती धातुएं सुरक्षित निवेश बनकर चमकती हैं, यहां युद्ध के बीच ₹12,489 प्रति 10 ग्राम की गिरावट के साथ सोना पिघल चुका है। चांदी तो ₹40,000 प्रति किलो से ज्यादा टूटकर धूल चाट रही है। एनालिस्ट्स हैरान हैं, निवेशक चौकन्ने। क्या यह गिरावट अस्थायी है या बाजार की नई हकीकत?
भावों का नया नजारा
27 फरवरी 2026 को IBJA रेट्स के मुताबिक सोना ₹1,59,097 (10 ग्राम) और चांदी ₹2,67,900 (किलो) पर बंद हुई थी। अगले दिन 28 फरवरी को युद्ध की आग भड़की, जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले बोले। उसके बाद 34 दिनों में भावों का यह नजारा देखिए- MCX पर जून गोल्ड ₹1,45,601 (₹4,503 गिरावट) और मई सिल्वर ₹2,25,999 (₹17,502 गिरावट) पर सिमट गया। मेरठ में 24 कैरेट सोना ₹15,108/ग्राम (₹1,51,080/10g) और चांदी ₹2,50,000/किलो तक लुढ़की। वैश्विक स्तर पर सोना $4,720/औंस और चांदी $73/औंस पर आ टिकी, जो $5,400 और $121 के हाई से करीब 25-40% नीचे है।
बाजार का चौंकाने वाला ट्विस्ट
ऑस्ट्रेलिया-ट्रेडिंग डॉट कॉम के सीईओ पीटर मैकगायर इसे बाजार का ‘चौंकाने वाला ट्विस्ट’ बता रहे हैं। कारण? अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.36% पर चढ़ी, जिससे निवेशक निश्चित आय वाली संपत्तियों की ओर दौड़े। मजबूत डॉलर ने विदेशी खरीदारों को महंगे सौदे थमा दिए। कच्चा तेल $109/बैरल पार कर गया, गैस फ्यूचर्स में भारी दांव लगे, तो लीवरेज्ड ट्रेडर्स ने सोना-चांदी के पोजीशन अनवाइंड कर प्रॉफिट बुक किया।
शेयर बाजारों की कमजोरी ने मार्जिन कॉल्स ट्रिगर किए, जहां निवेशकों ने धातुओं को बेचकर नुकसान भरा। युद्ध ने 12,000+ ईरानी टारगेट्स तबाह कर दिए, होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की धमकी दी, लेकिन सेफ-हेवन डिमांड की बजाय लिक्विडिटी क्राइसिस हावी हो गया।
ज्वेलर्स का उत्साह, निवेशक सतर्क
मेरठ जैसे शहरों में ज्वेलर्स उत्साहित हैं। “यह खरीदारी का स्वर्णिम मौका है,” कहते हैं स्थानीय व्यापारी। लॉन्ग-टर्म निवेशक गोल्ड ETF या सॉवरेन बॉन्ड्स पर नजर डाल रहे, जो टैक्स छूट देते हैं। मैकगायर की भविष्यवाणी है- अप्रैल-मई में एनर्जी उत्साह ठंडा पड़ने पर सोना-चांदी फिर चढ़ेंगे, शायद 20-40% रिकवरी के साथ। लेकिन सतर्क रहें, वोलेटिलिटी बरकरार है। युद्ध समाप्ति पर उछाल निश्चित, मगर डॉलर और यील्ड पर नजर रखें। क्या यह निवेशकों की किस्मत बदलेगा?









