
गोवा सरकार बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की दिशा में अग्रसर है। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रोहन खाउंटे ने सोमवार को घोषणा की कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर गहन अध्ययन किया जाएगा। डिजिटल व्यसन, साइबरबुलिंग और ऑनलाइन सुरक्षा जोखिमों से उपजी चिंताओं के बीच यह कदम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और समग्र विकास को प्राथमिकता देने वाला बताया जा रहा है।
मंत्री खाउंटे का बयान और चिंताएं
मंत्री खाउंटे ने कहा, “16 वर्ष बहुत कोमल आयु है। इस समय बच्चों को पढ़ाई, खेलकूद और व्यक्तिगत निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि अनियंत्रित डिजिटल दुनिया में उलझना।” उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां हाल ही में लागू सख्त नियमों के पहले महीने में ही 47 लाख से अधिक किशोर अकाउंट निष्क्रिय हो गए।
ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जो गोवा सरकार के प्रस्तावित प्लान का वैश्विक मॉडल बन सकता है। भारत में भी आर्थिक सर्वे 2025-26 ने उम्र-आधारित प्रतिबंध की सिफारिश की है, जो इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर बहस को बल दे रही है।
विशेष टास्क फोर्स का गठन
सरकार जल्दबाजी से बचते हुए इस मुद्दे पर बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने जा रही है। मंत्री ने विशेष टास्क फोर्स गठन का ऐलान किया, जिसमें अकादमिक विशेषज्ञ, अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA), उद्योग प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। इस फोर्स का कार्य होगा: सोशल मीडिया जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन करना, उम्र सत्यापन तकनीकों का परीक्षण करना, तथा रचनात्मक डिजिटल उपयोग (जैसे शैक्षणिक ऐप्स) को बढ़ावा देने वाली नीतियां तैयार करना। “हमारा लक्ष्य प्रतिबंध मात्र नहीं, बल्कि संतुलित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है,” खाउंटे ने जोर दिया।
राज्य में डिजिटल लत के आंकड़े
यह प्रस्ताव गोवा में बढ़ते डिजिटल लत के आंकड़ों से प्रेरित है। राज्य में 10-15 साल के बच्चों में स्मार्टफोन उपयोग 70% से अधिक हो चुका है, जिससे चिंता, अवसाद और व्यक्तिगत डेटा चोरी की घटनाएं 30% बढ़ी हैं। साइबरबुलिंग के मामलों में भी उछाल आया है, जहां स्कूली बच्चे ट्रोलिंग और हैरासमेंट का शिकार हो रहे हैं। PTA संगठनों ने इसका स्वागत किया है, लेकिन कार्यान्वयन चुनौतियों पर सवाल उठाए हैं- जैसे उम्र सत्यापन कैसे सुनिश्चित हो, प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक) पर दबाव कैसे डाला जाए।
कर्नाटक की समानांतर पहल
गोवा अकेला नहीं है। पड़ोसी कर्नाटक सरकार भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन पर विचार कर रही है। जनवरी 2026 में विधानसभा में आरडीपीआर मंत्री प्रियंक खरगे ने पुष्टि की कि राज्य ‘बीयॉन्ड स्क्रीन्स’ डिजिटल डिटॉक्स कार्यक्रम को विस्तार देगा, जिसमें 3 लाख छात्र और 1 लाख शिक्षक शामिल हैं। कर्नाटक हाईकोर्ट ने पहले 21 साल की न्यूनतम आयु सीमा सुझाई थी, जो अब 16 साल पर केंद्रित हो रही है। दोनों राज्यों की यह पहल केंद्र सरकार को प्रेरित कर सकती है, खासकर जब पीएम मोदी डिजिटल इंडिया के साथ बच्चों की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं।
कार्यान्वयन चुनौतियां और भविष्य
कार्यान्वयन में मुख्य बाधा तकनीकी है। प्लेटफॉर्म्स को Aadhaar-लिंक्ड सत्यापन या AI-आधारित उम्र डिटेक्शन अपनाना पड़ सकता है, लेकिन गोपनीयता चिंताएं बढ़ेंगी। अभिभावकों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, स्कूलों में जागरूकता कैंपेन चलेंगे। यदि सफल, तो यह अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनेगा। फरवरी 2026 तक प्लान स्टेज पर है, लेकिन टास्क फोर्स मार्च में सक्रिय हो सकता है।









