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Fighter Jet Mileage: एक लीटर ईंधन में कितनी दूर उड़ता है फाइटर जेट? माइलेज का आंकड़ा सुनकर पकड़ लेंगे अपना सिर

फाइटर जेट का माइलेज कार जैसा नहीं, “मीटर प्रति लीटर” वाला होता है। राफेल या F‑16 जैसे जेट 1 लीटर में सिर्फ 300–400 मीटर उड़ पाते हैं, यानी 1 किमी के लिए 2.5–3 लीटर ईंधन चाहिए। आफ्टरबर्नर, हथियारों का वजन और आकाशीय दबाव इस खराब माइलेज के मुख्य कारण हैं।

By Pinki Negi

fighter jet fuel consumption mileage per litre

लड़ाकू विमानों की तेज रफ्तार, आकाश में गूंजते इंजन और मिसाइल की तेज चमक देखकर आपने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनका माइलेज कार या बाइक से लाखों गुना खराब होता है। फाइटर जेट का माइलेज आमतौर पर “किलोमीटर प्रति लीटर” में नहीं, बल्कि “मीटर प्रति लीटर” में मापा जाता है। एक सामान्य मध्यम श्रेणी का लड़ाकू विमान, जैसे राफेल या F‑16, एक लीटर ईंधन में केवल 300 से 400 मीटर की दूरी ही तय कर पाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि 1 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए जेट को लगभग 2.5 से 3 लीटर ईंधन की जरूरत होती है।

अलग‑अलग जेट, अलग‑अलग माइलेज

फाइटर जेट का माइलेज उनकी बनावट, वजन और इंजन की संख्या पर काफी हद तक निर्भर करता है। भारी और दोहरा इंजन वाले विमान ज़्यादा ईंधन खाते हैं, जबकि हल्के और सिंगल‑इंजन जेट अपेक्षाकृत बेहतर ईंधन दक्षता देते हैं।

  • राफेल (Rafale)– इस फ्रांसीसी मल्टी‑रोल फाइटर जेट की क्रूज मोड में ईंधन खपत लगभग 2,500 लीटर प्रति घंटा होती है, जबकि माइलेज लगभग 300-400 मीटर प्रति लीटर रहता है।
  • सुखोई Su‑30 MKI– भारतीय वायुसेना का यह भारी, दोहरा इंजन वाला विमान हर घंटे लगभग 7,500-9,000 लीटर ईंधन खपता है, जबकि माइलेज महज लगभग 230 मीटर प्रति लीटर तक सीमित रहता है।
  • F‑16 – यह हल्का सिंगल‑इंजन जेट लगभग 2,800-3,000 लीटर प्रति घंटा ईंधन खाता है, पर माइलेज इससे बेहतर होकर 300- 500 मीटर प्रति लीटर तक पहुंच सकता है।
  • LCA Tejas– भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट Tejas अन्य भारी जेटों की तुलना में ईंधन खपत कम रखता है, लगभग 2,000-3,000 लीटर प्रति घंटा, जिसके कारण इसका माइलेज अपेक्षाकृत बेहतर होता है।
  • F‑22 रैप्टर– अमेरिकी सुपरसोनिक एयर सुपीरियरिटी जेट दुनिया के सबसे खर्चीलों में शामिल है, ईंधन खपत लगभग 8,000-10,000 लीटर प्रति घंटा और माइलेज सिर्फ 200-250 मीटर प्रति लीटर तक ही रहता है।

माइलेज क्यों इतना कम है?

फाइटर जेट का माइलेज इतना कम होने के पीछे कई तकनीकी और ऑपरेशनल कारण हैं। सबसे बड़ी वजह है आफ्टरबर्नर (Afterburner)। युद्ध या इमरजेंसी के दौरान जब पायलट को अचानक सुपर‑सोनिक या सुपरक्रूज रफ्तार की जरूरत पड़ती है, वे आफ्टरबर्नर चालू कर देते हैं। इस मोड में ईंधन की खपत 3 से 4 गुना तक बढ़ जाती है और माइलेज घटकर मात्र 100 मीटर प्रति लीटर के आस‑पास चला जाता है।

दूसरी बड़ी वजह हवा का ड्रैग (प्रतिरोध)। जब विमान पर मिसाइल, बम और बाहरी फ्यूल टैंक लटकाए होते हैं, तो हवा का दबाव बढ़ जाता है और इंजन को अधिक जोर लगाना पड़ता है, जिससे माइलेज और भी गिर जाता है। इसीलिए युद्ध से पहले लड़ाकू विमानों पर बाहरी हथियारों की संख्या और ईंधन टैंकों की योजना बेहद सावधानी से बनाई जाती है।

तीसरा महत्वपूर्ण पहलू है ऊंचाई (Altitude)। जैसे‑जैसे विमान ज्यादा ऊंचाई पर उड़ता है, जहां हवा पतली होती है, हवाई घर्षण कम हो जाता है और माइलेज बेहतर हो जाता है। इसीलिए लंबी दूरी की उड़ानों में जेट अधिकतर समय ऊंची क्रूज ऊंचाई पर ही उड़ान भरते हैं।

ईंधन क्षमता और बिना रुके उड़ान

राफेल जैसे आधुनिक फाइटर जेट की आंतरिक ईंधन क्षमता करीब 4,700 किलोग्राम होती है, जो ऑपरेशनल मोड में लगभग 2,000-2,500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने के लिए पर्याप्त होती है। जब बाहरी फ्यूल टैंकों के साथ यह क्षमता बढ़ाकर 11,400 किलोग्राम की कुल ईंधन क्षमता बन जाती है, तो विमान बिना लैंडिंग के लगभग 3,700 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। यह लंबी रेंज उसे दूर‑दराज़ के थियेटर ऑपरेशंस और गहरी देश अंतर्भाग तक पहुंचने योग्य बनाती है।

इन सब तथ्यों से साफ है कि लड़ाकू विमानों का माइलेज आम ग्राउंड वाहनों से अलग है और उनकी “ईंधन दक्षता” को उनकी ताकत, रफ्तार और युद्धक्षमता के संतुलन में देखना पड़ता है। इसीलिए आधुनिक वायुसेनाएं न केवल माइलेज और खपत के आंकड़ों पर नजर रखती हैं, बल्कि हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों पर भी भारी निवेश करती हैं, ताकि अपने फाइटर जेट को लंबे समय तक “किलीमेटर प्रति लीटर” की सीमा के बावजूद फ्रंट लाइन पर टिकाए रख सकें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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