
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार ने वित्त वर्ष 2025‑26 में एक नया आयाम छु लिया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सभी श्रेणियों में वाहनों की खुदरा बिक्री 13.3 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 2,96,71,064 यूनिट पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 2,61,87,255 यूनिट थी। यह उछाल इस बात का साफ संकेत देता है कि वाहन उद्योग ने न केवल पुराने रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि तीन करोड़ यूनिट के “मीलस्टोन” के बहुत करीब पहुंचकर नया डिमांड‑साइकिल शुरू कर दिया है।
रिकॉर्ड बिक्री का बड़ा आंकड़ा
इस वित्त वर्ष में यात्री वाहनों की मांग विशेष तौर पर आशाजनक रही। खुदरा स्तर पर कार बिक्री 41,63,927 यूनिट से बढ़कर 47,05,056 यूनिट हो गई, यानी 13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। SUV और कॉम्पैक्ट‑सेडान सेगमेंट में ग्राहकों की रुचि में तेजी आने से डीलरशिप्स पर ट्राफिक लगातार बढ़ा और कंपनियों ने प्रोडक्शन को भी इसी लाइन में अलाइन किया। इसी तरह दोपहिया वाहनों की बिक्री में सबसे बड़ा योगदान रहा; यह श्रेणी 1,88,89,595 यूनिट से बढ़कर 2,14,20,386 यूनिट पर पहुंचकर 13.4 फीसदी की वृद्धि दर्शाती है, जो ग्रामीण‑शहरी दोनों स्तरों पर मोटरसाइकिल और स्कूटर की सस्ती भुगतान‑योजनाओं से जुड़ी है।
सभी श्रेणियों में उछाल
तिपहिया वाहनों का सेगमेंट भी पिछले वर्ष से आगे निकल गया। FY26 में इस श्रेणी की खुदरा बिक्री 13,63,412 यूनिट रही, जो FY25 की 12,20,834 यूनिट के मुकाबले 11.68 फीसदी अधिक है। छोटे उद्यमियों, टैक्सी‑ऑपरेटर्स और किराए की सेवा देने वाले स्ट्रेट‑लाइन व्यवसायों की बढ़ती मांग से ऑटोरिक्शा और लाइट‑कमर्शियल तिपहिया वाहनों की डिमांड में सुधार आया। इसी दौरान कमर्शियल वाहनों की बिक्री में भी 11.74 फीसदी की उछाल देखी गई; CV यूनिट 9,49,406 से बढ़कर 10,60,906 पर पहुंच गई, जो लॉजिस्टिक्स, ई‑कॉमर्स और ग्रामीण रोड‑नेटवर्क के विस्तार का सीधा परिणाम माना जा रहा है।
उद्योग के लिए ऐतिहासिक वर्ष
FADA के अध्यक्ष सी.एस. विग्नेश्वर ने कहा कि 2025‑26 भारतीय मोटर वाहन खुदरा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक वर्ष रहा, जहां छह वाहन श्रेणियों में से पांच ने नया वार्षिक रिकॉर्ड बनाया। उनका मानना है कि यह उछाल सिर्फ कर‑पुनर्संतुलन का असर नहीं, बल्कि इस बात का भी संकेत है कि उद्योग तीन करोड़ यूनिट के स्तर के करीब पहुंच चुका है, जो कुछ साल पहले तक अव्यावहारिक लगता था।
उनके अनुसार, वित्त वर्ष की धीमी शुरुआत के बावजूद सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 लागू होने से दोपहिया, छोटी कारों, तिपहिया और कुछ कमर्शियल श्रेणियों पर प्रभावी कर भार में कमी आई, जिससे वाहनों की वहनीयता बढ़ी और ओर्डर‑बुक तेजी से भरने लगे।
भविष्य की चिंताएं और ईंधन का प्रभाव
हालांकि उद्योग निकाय भविष्य को लेकर कुछ चिंताएं भी जताता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन कीमतों के रुझान को भारतीय वाहन बाजार के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर माना जा रहा है। FADA के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 36.5 फीसदी डीलर्स का मानना है कि बढ़ती या संभावित ईंधन कीमतें ग्राहकों के खरीद‑निर्णयों को मध्यम से गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
इससे कई उपभोक्ता न केवल बड़ी कार या ट्रक खरीदने का फैसला टाल रहे हैं, बल्कि छोटे और फ्यूल‑एफिशिएंट मॉडल्स की ओर झुकाव बढ़ा रहे हैं। ऑटो निर्माता और डीलर अब वित्तवर्ष 2026‑27 को लेकर “सावधान‑आशावादी” रुख अपना रहे हैं, जहां रिकॉर्ड बिक्री जारी रह सकती है, लेकिन वैश्विक तेल बाजार और आपूर्ति‑श्रृंखला की स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी हो गया है।









