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अब इंटरनेट इस्तेमाल करना होगा और भी महंगा! 18% GST के बाद लगेगा एक और नया टैक्स?

इंटरनेट अब महंगा! 18% GST के बाद हर GB पर ₹1 नया टैक्स लग सकता है। PM मोदी की बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा, DoT जांच करेगा। 2025 की 229 अरब GB खपत से सरकार को 23,000 करोड़। विशेषज्ञ चिंतित: डिजिटल ग्रोथ रुकेगी, यूजर्स को दोहरी मार। सितंबर तक रिपोर्ट का इंतजार।

By Pinki Negi

अब इंटरनेट इस्तेमाल करना होगा और भी महंगा! 18% GST के बाद लगेगा एक और नया टैक्स?

भारत में इंटरनेट यूजर्स के लिए बुरी खबरें लगातार आ रही हैं। पहले रिचार्ज प्लान्स की बढ़ती कीमतें और 18% GST ने जेब ढीली कर दी, अब सरकार डेटा उपयोग पर अलग से टैक्स लगाने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसमें हर GB डेटा पर ₹1 टैक्स लगाने का विचार है। अगर यह लागू होता है, तो 2025 की 229 अरब GB मोबाइल डेटा खपत से सरकार को करीब 22,900 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है। लेकिन आम आदमी का बजट बिगड़ जाएगा, खासकर सोशल मीडिया और OTT कंटेंट के शौकीनों को।

वर्तमान टैक्स स्ट्रक्चर और नया प्रस्ताव

इंटरनेट सेवाओं पर पहले से 18% GST लागू है, जो 2025 से प्रभावी है। उदाहरणस्वरूप, ₹1000 के ब्रॉडबैंड या मोबाइल प्लान पर ₹180 GST लगता है, कुल बिल ₹1180 हो जाता है। व्यवसाय इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं, लेकिन खुदरा उपभोक्ता पूरा बोझ झेलते हैं। अब प्रस्तावित GB-आधारित टैक्स इस पर अतिरिक्त होगा।

दूरसंचार विभाग (DoT) को व्यवहार्यता जांचने का निर्देश दिया गया है, और सितंबर 2026 तक रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार का तर्क है कि इससे स्क्रीन टाइम कम होगा और डेटा का सकारात्मक उपयोग बढ़ेगा, जैसे शिक्षा या उत्पादक कार्य।

भारत में सस्ता इंटरनेट

भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में है जहां इंटरनेट डेटा सबसे सस्ता है, जिससे प्रति व्यक्ति खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। 2025 में 229 अरब GB डेटा यूज हुआ, लेकिन अत्यधिक उपयोग से स्क्रीन एडिक्शन की समस्या बढ़ी। सरकार स्पेक्ट्रम नीलामी, लाइसेंस फीस और AGR के अलावा नई आय के स्रोत तलाश रही है। ₹1/GB टैक्स से खजाना भरेगा, लेकिन लागू करने में तकनीकी चुनौतियां हैं – टेलीकॉम कंपनियां डेटा ट्रैकिंग और कलेक्शन का बोझ कैसे संभालेंगी? फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं, सिर्फ आंतरिक मंथन चल रहा।​

विशेषज्ञों की चिंता

TRAI के पूर्व प्रधान सलाहकार सत्या एन. गुप्ता ने प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताया। उनका कहना है कि यह डिजिटल सेवाओं को बाधित करेगा, इनोवेशन रुकेगा और भारत की वैश्विक डिजिटल लीडरशिप खतरे में पड़ जाएगी। दोहरी मार- 18% GST प्लस नया टैक्स- से मध्यम वर्ग के यूजर्स प्रभावित होंगे। शिक्षा बनाम मनोरंजन के डेटा उपयोग पर भेदभाव कैसे होगा, यह अस्पष्ट है। टेलीकॉम सेक्टर पहले से Jio, Airtel जैसी कंपनियों के दबाव में है, अतिरिक्त टैक्स से प्लान्स और महंगे हो सकते हैं।

संभावित प्रभाव और भविष्य

यदि लागू हुआ, तो नेटफ्लिक्स, प्राइम, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग महंगा पडेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डिवाइड बढ़ सकता है। सरकार DoT की रिपोर्ट का इंतजार कर रही, उसके बाद फैसला। यूजर्स को सतर्क रहना चाहिए- रिचार्ज प्लान्स चुनते समय अब डेटा लिमिट पर गौर करें। डिजिटल इंडिया की महत्वाकांक्षा के बीच यह कदम विवादास्पद साबित हो सकता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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