
EWS (Economically Weaker Section) आरक्षण, जो सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों को शिक्षा और नौकरियों में 10% कोटा प्रदान करता है, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने डेरा डाल दिया है। उनका मानना है कि वर्तमान नियम ‘गरीबों’ को फायदा पहुँचाने के बजाय उनके लिए बाधा बन रहे हैं।
आंदोलन की मुख्य मांगें (Main Demands)
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख माँगें रखी हैं, जो इस प्रकार हैं:
- आय सीमा में बदलाव: वर्तमान में EWS के लिए पारिवारिक आय की सीमा ₹8 लाख वार्षिक है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि यह सीमा बहुत अधिक है, जिससे ‘असली गरीबों’ को प्रतिस्पर्धा में नुकसान होता है। वे इसे घटाने या श्रेणीबद्ध करने की मांग कर रहे हैं।
- समान मापदंड (Uniform Criteria): प्रदर्शनकारियों का कहना है कि OBC नॉन-क्रीमी लेयर और EWS के लिए आय सीमा एक जैसी (8 लाख) होना तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि दोनों श्रेणियों की सामाजिक पृष्ठभूमि अलग है।
- आयु सीमा में छूट (Age Relaxation): जैसे SC/ST और OBC वर्गों को सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट मिलती है, वैसी ही छूट EWS उम्मीदवारों को भी दी जाए।
- प्रयासों की संख्या (Number of Attempts): UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में EWS छात्रों के लिए ‘अटेम्प्ट्स’ की संख्या बढ़ाने की मांग की जा रही है।
- जमीन और संपत्ति के नियम: वर्तमान में 5 एकड़ कृषि भूमि या 1000 वर्ग फुट के घर जैसे नियमों को हटाने या उन्हें और सरल बनाने की मांग है।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद का मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई और सरकार की सिन्हो आयोग (Sinho Commission) की रिपोर्ट है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 8 लाख की आय सीमा के कारण मध्यम वर्गीय परिवार भी इस कोटे में आ जाते हैं, जिससे ग्रामीण और अत्यंत गरीब युवाओं के लिए 10% कोटे में जगह बनाना नामुमकिन हो जाता है।
सरकार का रुख (Government’s Stance)
सरकार ने अब तक इस मुद्दे पर बहुत ही नपा-तुला रुख अपनाया है:
- सरकार का तर्क है कि ₹8 लाख की सीमा काफी सोच-समझकर और एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों के आधार पर तय की गई है।
- केंद्र सरकार ने पहले भी कोर्ट में कहा है कि EWS कोटा किसी जाति पर नहीं बल्कि आर्थिक स्थिति पर आधारित है, इसलिए इसे अन्य आरक्षित वर्गों से तुलना नहीं की जानी चाहिए।
- हालांकि, बढ़ते विरोध को देखते हुए सूत्रों का कहना है कि सरकार नियमों की समीक्षा के लिए एक नई कमेटी गठित करने पर विचार कर सकती है।
क्या कोटे के नियम बदलेंगे?
नियमों में बदलाव पूरी तरह से सरकार की समीक्षा रिपोर्ट और आगामी चुनावों के समीकरणों पर निर्भर करेगा। यदि आंदोलन और उग्र होता है, तो सरकार आयु सीमा या संपत्ति के नियमों में ढील देकर बीच का रास्ता निकाल सकती है।









