
महंगाई के चलते सिर्फ 1000 रुपये मासिक पेंशन पर गुजारा कर रहे बुजुर्गों के लिए राहत की मांग एक बार फिर संसद में गूंजी है। राज्यसभा सांसद डॉ. मेधा विष्णु कुलकर्णी ने पेंशनर्स की दयनीय स्थिति का मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा कि क्या न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7500 रुपये करने की कोई योजना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में इलाज और जरूरी खर्चों के लिए वर्तमान पेंशन बहुत कम है। इस दौरान सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया कि क्या महाराष्ट्र के पेंशन संगठनों की मांगों पर कोई समय सीमा (Timeline) तय की गई है।
पेंशन बढ़ोतरी पर सरकार का जवाब
पेंशनर्स की उम्मीदों के बीच श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम EPS पेंशन को 7,500 रुपये करने का फिलहाल कोई नया प्रस्ताव या निश्चित समयसीमा तय नहीं है। उन्होंने बताया कि पेंशन की राशि बढ़ाने का कोई भी फैसला लेने से पहले पेंशन फंड की आर्थिक मजबूती और भविष्य की वित्तीय स्थिति को देखना अनिवार्य है। सरकार के इस जवाब से साफ है कि पेंशन बढ़ोतरी के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि बजट और फंड प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है।
कैसे बनता है पेंशन फंड और कितना होता है योगदान
श्रम मंत्री ने स्पष्ट किया कि EPS-95 योजना एक तय योगदान पर आधारित है। इसमें पेंशन का पैसा दो मुख्य स्रोतों से आता है: पहला, नियोक्ता (कंपनी) आपके वेतन का 8.33 प्रतिशत हिस्सा इस फंड में जमा करती है। दूसरा, केंद्र सरकार भी 15,000 रुपये तक के वेतन पर 1.16 प्रतिशत का योगदान देती है। इन्हीं दोनों हिस्सों से इकट्ठा हुए फंड के जरिए सभी रिटायर बुजुर्गों को हर महीने पेंशन दी जाती है। सरकार का तर्क है कि पेंशन बढ़ाने के लिए इस फंड में जमा होने वाली राशि का संतुलन में रहना जरूरी है।
पेंशनर्स को सरकारी मदद और फंड का ऑडिट
केंद्र सरकार फिलहाल बजट के माध्यम से यह सुनिश्चित करती है कि EPS पेंशनर्स को हर महीने कम से कम 1,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन जरूर मिले। यह वित्तीय मदद सरकार के नियमित अंशदान (1.16%) के अतिरिक्त दी जाती है ताकि किसी भी बुजुर्ग को इससे कम राशि न मिले। साथ ही, मंत्री ने स्पष्ट किया कि पेंशन फंड की हर साल ‘एक्ट्यूरियल वैल्यूएशन’ (विशेषज्ञों द्वारा वित्तीय मूल्यांकन) की जाती है। इसका उद्देश्य यह जांचना होता है कि भविष्य में पेंशन देने के लिए फंड में पर्याप्त पैसा बना रहे और आय-खर्च के बीच सही संतुलन बना रहे।
पूरे देश के लिए एक ही पेंशन नियम, राज्यों के लिए अलग फंड नहीं
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि EPS-95 योजना के तहत राज्यों के आधार पर कोई अलग पेंशन फंड नहीं बनाया गया है। इसका मतलब है कि चाहे महाराष्ट्र हो या कोई अन्य राज्य, सभी पेंशनभोगियों के लिए एक ही केंद्रीय फंड और समान नियम लागू होते हैं। महाराष्ट्र या किसी अन्य राज्य के संगठनों से मिलने वाले ज्ञापनों और मांगों पर सरकार व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि पूरे देश के स्तर पर विचार करती है। इसी वजह से पेंशन बढ़ाने का कोई भी फैसला किसी एक राज्य के लिए नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए एक साथ लिया जाएगा।
EPF वेतन सीमा में बढ़ोतरी की तैयारी
पेंशन के साथ-साथ अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में बड़े सुधारों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चा है कि सरकार पीएफ कटौती के लिए अनिवार्य वेतन सीमा (Salary Limit) को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकती है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो निजी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों नए कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे। इससे न केवल कर्मचारियों की भविष्य की बचत (EPF) बढ़ेगी, बल्कि उनके पेंशन फंड (EPS) में भी बड़ा योगदान जमा हो सकेगा, जो रिटायरमेंट के बाद अधिक वित्तीय मजबूती प्रदान करेगा।









