
अक्सर प्राइवेट नौकरी करने वालों को डर रहता है कि नौकरी जाने के बाद उनका गुजारा कैसे होगा। अगर आपकी कंपनी आपका PF काटती है, तो आप EPS (एम्पलाई पेंशन स्कीम) के तहत पेंशन के हकदार बन जाते हैं। आपके पीएफ का एक हिस्सा पेंशन फंड में जमा होता है, जिसे EPFO मैनेज करता है।
मौजूदा नियमों के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद आपको कम से कम ₹1,000 और अधिकतम ₹7,500 तक की मासिक पेंशन मिल सकती है। यह पेंशन आपकी ₹15,000 वाली बेसिक सैलरी की लिमिट पर तय की जाती है। यानी भले ही आप सरकारी कर्मचारी न हों, फिर भी बुढ़ापे में पेंशन के जरिए आपको आर्थिक मदद मिलती रहेगी।
नौकरी छूटने या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने से क्या रुक जाएगी पेंशन?
आजकल कई लोग प्राइवेट नौकरी छूटने के बाद कॉन्ट्रैक्ट या फ्रीलांस काम करने लगते हैं, जहाँ पीएफ (PF) नहीं कटता। ऐसे में मन में यह डर बैठ जाता है कि क्या भविष्य में पेंशन मिलेगी या नहीं। असल में, आपकी पेंशन इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अपने पूरे करियर में कुल मिलाकर कितने साल पीएफ फंड में योगदान दिया है।
अगर आप बीच में गैप के बाद फिर से किसी ऐसी कंपनी में जुड़ते हैं जहाँ पीएफ कटता है, तो आपकी पिछली सर्विस उसमें जुड़ जाती है। पेंशन के लिए सबसे जरूरी शर्त यह है कि आपकी कुल सर्विस अवधि कम से कम 10 साल होनी चाहिए। अगर आपने यह समय सीमा पूरी कर ली है, तो नौकरी छूटने के बाद भी आप रिटायरमेंट की उम्र में पेंशन पाने के हकदार बने रहेंगे।
10 साल वाला जरूरी नियम और सैलरी लिमिट में होने वाला बदलाव
अगर आपकी प्राइवेट नौकरी छूट जाती है, तो आपको पेंशन मिलेगी या नहीं, यह आपकी 10 साल की सर्विस पर निर्भर करता है। ईपीएफओ (EPFO) के नियमों के मुताबिक, पेंशन पाने के लिए किसी भी कर्मचारी का कम से कम 10 साल तक पीएफ (PF) कटना अनिवार्य है।
अगर आपने 9 साल नौकरी की और फिर काम छोड़ दिया, तो आप पेंशन के हकदार नहीं होंगे। इसके अलावा, एक बड़ी खबर यह भी है कि सरकार पीएफ के लिए तय बेसिक सैलरी की लिमिट ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर सकती है। आखिरी बार यह बदलाव 2014 में हुआ था। अगर यह लिमिट बढ़ती है, तो आपकी पेंशन की रकम में भी बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।









